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Criminal Justice: Behind Closed Doors Review: धीरे-धीरे असर करेगी बदलती दुनिया की महिलाओं की कहानी

Thu, 24 Dec 2020 09:04 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 24 Dec 2020 09:04 AM IST
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Criminal Justice Behind Closed Doors Review Pankaj Shukla kirti kulhari Pankaj tripathi rohan sippy jisshu sengupta
क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स - फोटो : अमर उजाला

वेब सीरीज रिव्यू: क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स


निर्देशक: रोहन सिप्पी, अर्जुन मुखर्जी
लेखक: अपूर्व असरानी (मूल अंग्रेजी सीरीज से अनूदित)
कलाकार: पंकज त्रिपाठी, अनुप्रिया गोयनका, कीर्ति कुल्हरी, दीप्ति नवल, मीता वशिष्ठ, जीशू सेनगुप्ता, शिल्पा शुक्ला, पंकज सारस्वत, अयाज खान आदि।
रेटिंग: ***


दिवाली पर मैं परिवार समेत अपने गांव में रहा। कोई दो तीन हफ्ते। गुरुग्राम के किसी शानदार रेस्तरां में काम करने वाला एक शेफ से कोरोना काल में अपनी पत्नी का दुख न देखा गया और वह सब कुछ छोड़छाड़कर एक ऐसे गांव चला आया, जहां तक पहुंचना किसी भी सार्वजनिक साधन से संभव नहीं है। अलाव तापते उसने अपनी पूरी राम कहानी सुनाई और जाते जाते कह गया एक वाक्य, जो ग्रामीण भारत का असली कष्ट है। उसने कहा, ‘पता नहीं, जो कुछ भी मेरे घर में होता है, वह पड़ोसियों को कैसे पता चल जाता है!’ यह निंदा रस ही परंपरा से तमाम सारे कथित सुखों की खान रही है। वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स इसी निंदा रस पर आधारित है। अमीर परिवारों की तथाकथित कलई खोलती एक तस्वीर। पांच सितारा सुविधाओं में रहने वाली एक महिला को एक ऐसे शौचालय में शौच के लिए जाती दिखाती कहानी जिसकी हालत देख उसे उल्टी आ जाती है। गांजे की आपूर्ति जेल में जारी रहे, इसके लालच में एक दूसरी महिला कैदी से इस शौचालय की सफाई कराई जाती है। महिला आत्मसम्मान के तमाम संवेदनशील मुद्दे उठाती ये वेब सीरीज अगर इसी तरह प्रचारित की जाती तो इसके नतीजे बहुत अच्छे हो सकते थे।

Criminal Justice Behind Closed Doors Review Pankaj Shukla kirti kulhari Pankaj tripathi rohan sippy jisshu sengupta
क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स - फोटो : अमर उजाला मुंबई

वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स’ को देखने का मुख्य आकर्षण पंकज त्रिपाठी को बनाया गया है। कोरोना काल में दो तीन लोगों के ही दिन बहुरे हैं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मनोज बाजपेयी और पंकज त्रिपाठी। तीनों की बरसों से अटकी रही फिल्में इसी झटके में रिलीज हो जा रही हैं। नवाजुद्दीन तो गोटी फिट करके श्यामअप्सरा भी घर ले आए हैं। पंकज यहां फिर से वकील बने हैं। ऐन सुहागरात के दिन उन्हें ये पंचसितारा केस मिलता है और वह पत्नी के रतिसुख की परवाह न करके एक ‘मालदार पार्टी’ का केस लड़ने आ जाते हैं मुंबई। लेकिन, पत्नी बिहार की है तो क्या हुआ, है दबंग! वह भी पीछे पीछे मुंबई आ धमकती है और अपने पति का रहन सहन देख रोती नहीं है बल्कि मोर्चा संभालती है अपने अधिकार हासिल करने का। ये कहानी दरअसल ऐसी ही तमाम महिलाओं की कहानी है।

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क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स’ को बताया भले कोर्टरूम ड्रामा गया हो लेकिन इसे देखने के लिए आप किसी सस्पेंस थ्रिलर की उम्मीद लेकर बैठेंगे तो निराश होंगे। इसे फुर्सत में देखिए। रफ्ता रफ्ता, चुस्कियों के साथ। एक एपीसोड आज, अगला कल परसों और फिर आगे, आगे। सीरीज का लेखन बहुत सशक्त है। महिलाओं के चरित्र चित्रण के लिहाज से। सारे ऐशो आराम पाने के बावजूद एक वकील की अंदर ही अंदर घुटती बीवी है। वह अपने पति के पेट में सात इंची चाकू घुसा देती है। पति बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा वकील है। पर उसको पता ही नहीं कि पत्नी के साथ भी जबरिया संबंध अपराध हैं। वैसे सीरीज के कला निर्देशन विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यहां मुंबई हाईकोर्ट बना दिया है। ये गलती अदालती सुनवाई पर आधारित सीरीज में खटकती है।

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कीर्ति कुल्हरी (क्रिमिनल जस्टिस सीजन 2) - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वकील की पत्नी अपनी बेटी को पुलिसिया उत्पीड़न से बचाने के लिए पुलिस की बताई बातों पर चलती रहती है। एक दरोगा को मुंबई में रह रही इतने संभ्रांत परिवार की महिला से जिस तरह बात करते दिखाया गया है, वह रोचक है। उसकी पत्नी भी पुलिस में ही है। दोनों के रतिसुख के बीच दरोगा की मां का अपनी आवाज बुलंद करना भी रोचक है।  इतने सारे महिला किरदारों के बीच वकील निखत भी हैं, अपनी मां के अपने अब्बा से अब भी प्यार करने की वजह और अपने लिए एक अदद नौकरी टटोलतीं। उसकी पुरानी बॉस अब भी उतनी ही खड़ूस है। वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स’ का पूरा ताना बाना इन महिला किरदारों पर ही बुना गया है। हां, अभी महिला जेल के तमाम और किरदारों पर रंग चढ़ने बाकी हैं, लेकिन उनके कहानी में आते ही कहानी की बुनावट ढीली पड़ने लगती है।

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क्रिमिनल जस्टिस सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस-बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स’ फुर्सत की कहानी है, बिंज वॉच के लिए नहीं। पहले एपीसोड के बिल्कुल आखिर में प्रकट हुए पंकज त्रिपाठी का ट्रैक लगातार दिलचस्पी जगाए रहता है। उनके मुखमंडल पर आने वाले हावभाव उनके अभिनय के विस्तार की चुगली फिर कर जाते हैं। जमाना फिलहाल इन्हीं अदाओं पर फिदा है, तो वह भी न्यू मिलेनियल्स के राजपाल यादव बने हुए हैं। मसखरी करने में और उम्दा अदाकारी करने में यही फर्क है। निखत हुसैन का नाम काफी दमदार तरीके से क्रेडिट में शामिल है पर सीरीज की असली स्टार हैं कीर्ति कुल्हरी। अपने पति के साथ हमबिस्तर होने के ख्याल से ही जिस पत्नी का दिल टुकड़े टुकड़े हो जाता हो, वह औरत जियेगी कैसे? पति के पेट में चाकू है और उसके अपने पेट में बच्चा। बहुत इमोशनल ड्रामा है। कीर्ति का गजब का अभिनय है। दीप्ति, मीता के लिए ऐसे किरदार बाएं हाथ का काम हैं। रोहन सिप्पी और अर्जुन मुखर्जी चाहते तो इस स्लो सीरीज को थोड़ा बेहतर गति दे सकते थे और अपने वीडियो एडीटर के साथ बैठ हर एपीसोड को कम से कम 8-10 मिनट तो छांट ही सकते थे। लेकिन, फिर भी सीरीज देखी जा सकती है, जैसाकि मैंने पहले भी बताया, आहिस्ता आहिस्ता।

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