हिंदी सिनेमा के नए जंपिंग जैक रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय हिंदी सिनेमा के युवा शौकीनों के लिए वैलेंटाइंस डे गिफ्ट है। मशहूर रैपर्स नेज़ी और डिवाइन की ज़िंदगियों से प्रेरित फिल्म की कहानी मुंबई की झोपड़पट्टियों में रहने वालों के जीवट की जीती जागती दास्तां हैं।
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Film Review: रणवीर के फैंस और रैप के दीवानों के लिए वैलेंटाइंस डे गिफ्ट है 'गली ब्वॉय'
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 14 Feb 2019 02:40 PM IST
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मूवी रिव्यू: गली बॉय
हिंदी सिनेमा के नए जंपिंग जैक रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय हिंदी सिनेमा के युवा शौकीनों के लिए वैलेंटाइंस डे गिफ्ट है। मशहूर रैपर्स नेज़ी और डिवाइन की ज़िंदगियों से प्रेरित फिल्म की कहानी मुंबई की झोपड़पट्टियों में रहने वालों के जीवट की जीती जागती दास्तां हैं।
हिंदी सिनेमा के नए जंपिंग जैक रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय हिंदी सिनेमा के युवा शौकीनों के लिए वैलेंटाइंस डे गिफ्ट है। मशहूर रैपर्स नेज़ी और डिवाइन की ज़िंदगियों से प्रेरित फिल्म की कहानी मुंबई की झोपड़पट्टियों में रहने वालों के जीवट की जीती जागती दास्तां हैं।
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फिल्म की कहानी एक कार ड्राइवर के बेटे मुराद के ईद गिर्द घूमती है। उसने जीवन में बचपन का प्यार भी है और आगे बढ़ने के लिए सपने भी। दो वक्त की रोटी कमा लेने को ही जीवन की कामयाबी मान लेने वालों के बीच मुराद का दम घुटता है। उसकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट आता है जब एक शख्स की उसकी जिंदगी में एंट्री होती है। कहानी में यहां एंट्री होती है स्काई की। तीनों मिलकर कुछ ऐसा करते हैं और मुराद बन जाता है गली बॉय।
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बतौर निर्देशक जोया अख्तर के सबसे अच्छे कामों की लड़ी में एक और कड़ी इस फिल्म के साथ जुड़ गई है। ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा के बाद उनकी यह दूसरी फिल्म होगी जो दर्शकों को काफी पंसद आने वाली है। फिल्म में धारावी की गरीबी और तौर तरीके सही ढंग से दर्शाए गए हैं हालांकि बाकी की मुंबई का कुछ पता इस फिल्म से नहीं चलता।
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देखा जाए तो फिल्म में ऐसे बहुत कम सीन्स हैं जो बता सकें कि कहानी मुंबई की है। यहां की बोली और यहां की खोली समझने वाले ही बता सकते हैं कि फिल्म मुंबई में बनी है। सिनेमैटोग्राफर जय ओजा ने फिल्म को उसका कलेवर देने में काफी मेहनत की है लेकिन डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफर का तालमेल काफी बेहतर होने की गुंजाइश फिल्म में बाकी रह गई है।
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अभिनय के लिहाज से देखें तो नए अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी ने कमाल का काम किया है, कई दृश्यों में तो वह रणवीर के किरदार पर भारी भी पड़े हैं। फिल्म में आलिया का रोल बहुत ज्यादा नहीं है पर जितना भी है तारीफ के लायक है। रणवीर कॉलेज स्टूडेंट के हिसाब से काफी बड़े लगते हैं पर मुंबई की टपोरी बोली पर उनकी पकड़ उन्हें बचा ले गई। रणवीर को आगे अपने किरदार सलीके से चुनने होंगे नहीं तो पहले सिम्बा और अब गली बॉय की कामयाबी का क्रेडिट भी उनके बजाय निर्देशक के खाते में जमा होने वाला है। कल्कि केकलां अपना काम बखूबी करने में कामयाब रहीं।

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