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बाइस्कोप: डिंपल कपाड़िया ने शादी के बाद इस फिल्म में दिए थे सबसे बोल्ड सीन्स, ये गाना नहीं भूले लोग

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 10 Jun 2020 08:37 PM IST
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janbaaz this day that year series by pankaj shukla 10 june 1986 bioscope feroz khan dimple hot scene
जाबांज - फोटो : अमर उजाला

अगर आप हिंदी सिनेमा के शौकीन हैं तो इन दिनों आपको सबसे ज्यादा जिस फिल्म का इंतजार होगा, वह है रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ और अगर आप हॉलीवुड सिनेमा पसंद करते हैं तो आपकी विश लिस्ट में इन दिनों जो पहली फिल्म होगी, वह है क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘टेनेट’। दिलचस्प बात ये है कि इन दोनों फिल्मों में हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को अपनी पहली ही फिल्म ‘बॉबी’ से भा जाने वाली बिंदास अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया अहम किरदारों में हैं। 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘जंजीर’ से एंग्री यंग मैन बनकर चमके अमिताभ बच्चन और 1973 में ही रिलीज हुई फिल्म ‘बॉबी’ से देसी बार्बी डॉल बनकर चमकीं डिंपल कपाड़िया। डिंपल कपाड़िया ने वैसे तो शादी के एक दशक से भी ज्यादा समय बाद वापसी करते हुए साल 1985 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म ‘सागर’ में ही अपने हुस्न की अनदेखी अदाओं से अपने करोड़ो नए दीवाने बना लिए थे। लेकिन, उसके अगले साल रिलीज हुई फिल्म ‘जांबाज़’ में उनके जलवों के रंग निराले ही रहे। ये डिंपल कपाड़िया के करियर की सबसे बोल्ड फिल्म मानी जाती है और यही फिल्म ‘जाबांज़’ है हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म।



भारतीय सिनेमा के काऊब्वॉय हीरो कहलाने वाले फिरोज खान की फिल्म ‘जांबाज़’ जिन हादसों और हालात से गुजरते हुए परदे पर पहुंची वह भी किसी दिलेरी से कम नहीं है। फिरोज खान ने इस फिल्म के तमाम नए रिश्ते बनाए, तमाम पुराने रिश्ते तोड़े और यहां तक कि अपने खून के रिश्तों में भी दरार डाल बैठे। फिरोज खान हिंदी सिनेमा के उन गिने चुने सितारों में से है जिन्होंने पहले राज कपूर, देवानंद और दिलीप कुमार की तिकड़ी के समय अपनी पहचान बनाने में कामयाबी पाई और फिर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के समय में भी खूब शोहरत बटोरी। साल 1972 में फिल्म ‘अपराध’ से फिरोज खान निर्देशक बने और उनकी इसके बाद बनी अगली दोनों फिल्में ‘धर्मात्मा’ और ‘कुर्बानी’ भी सुपरहिट फिल्में रहीं। कुर्बानी ने फिरोज खान को इतनी दौलत दी कि उनके पास की तिजोरियां ये कमाई रखने के लिए कम पड़ गईं। लोग बताते हैं कि वह पहले फिल्म निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने सिर्फ नोट गिनने के लिए अलग से एक टीम रखी हुई थी। उनके बैंगलोर फार्म हाउस पर जिन्हें भी जाने का मौका मिला है, वे जानते हैं कि फिरोज खान ने उन दिनों कैसे दोनों हाथों से दौलत लुटाई और उन्हें भी जानते हैं जिन्होंने खूब जतन करके ये दौलत लूटी भी।

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फिल्म- जाबांज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘कुर्बानी’ में फिरोज खान का हर दांव बिल्कुल सही पड़ा था। फिल्म ब्लॉकबस्टर थी। फिल्म का म्यूजिक उससे भी बड़ा हिट था। और, फिरोज खान को अब एक नई तरह का सिनेमा अपने सपनों में दिखने लगा था। इस सिनेमा में परंपरागत कहानियों की कोई जगह नहीं थी। सलीम जावेद वाले सलीम खान को वह अपने साथ विदेश घुमाने ले गए। दोनों कोई महीना भर साथ घूमे। विदेश के बार देखे, पब देखे, अय्याशी के वे सारे मुकाम देखे, जहां फिरोज खान अपनी एक ऐसी फिल्म देख रहे थे, जिसे वह इंटरनेशनल मार्केट में रिलीज कर सकें। वह ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो हिंदी में देसी दर्शकों की पसंद के हिसाब से बने और अंग्रेजी में बने तो ऐसे दृश्यों के साथ कि हॉलीवुड को भी मात कर दे। ‘कुर्बानी’ 1980 में रिलीज हुई और अगले छह साल तक फिरोज खान ने इतने रंग बदले कि फिल्म इंडस्ट्री हैरान हो गई। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि फिरोज खान असल में करना क्या चाह रहे हैं।

‘कुर्बानी’ की रिलीज से पहले फिरोज खान ने एक फिल्म 1977 में शुरू की थी जीनत अमान के साथ। लेकिन फिल्म का कुछ हिस्सा शूट करने के बाद उन्होंने ये फिल्म बंद कर दी और ‘कुर्बानी’ बनाने लगे। ‘कुर्बानी’ हिट हुई तो वे कसक नाम की इस पुरानी फिल्म की तरफ फिर लौटे, इस बार उन्होंने इस फिल्म में जीनत अमान की जगह परवीन बाबी को लिया और साथ में रेखा भी आईं। फिरोज खान के अलावा फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा और संजीव कुमार भी थे। फिल्म की दो महीने शूटिंग हो चुकी थी और एक दिन परवीन बाबी मुंबई से लापता हो गईं। परवीन बाबी के जाने और सलीम खान के सीन में आने के बाद फिरोज खान ने ‘जांबाज़’ नाम की नई फिल्म शुरू की। हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ बनने वाली इस फिल्म के लिए फिरोज खान ने लंदन में तमाम विदेशी मॉडल्स के साथ रेखा पर एक गाना शूट किया। बताते हैं कि रेखा से फिरोज खान फिल्म में ऐसे सीन्स करवाना चाहते थे, जिनके लिए रेखा कतई तैयार नहीं थी। दोनों में तगड़ा झगड़ा हुआ और फिरोज खान ने फिल्म से रेखा को निकाल दिया। लोग अब तक यही समझ रहे थे कि फिरोज खान अपनी पुरानी फिल्म ‘कसक’ को ही ‘जांबाज़’ के नाम से बना रहे हैं क्योंकि दोनों में दो हीरोइनें थी और दोनों के किरदार स्टेज सिंगर के थे।

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फिल्म- जाबांज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रेखा से पंगा होने के बाद फिरोज खान ने फिर अपनी दिशा बदल दी। 1983 में उन्होंने एक नई फिल्म लॉन्च की और नाम हालांकि इसका भी ‘जांबाज़’ ही था लेकिन उन्होंने लोगों से जो स्टार कास्ट इस बार मिलवाई, वो पूरी तरह अलग थी। कहानी भी इस बार काफी अलग थी। कहानी इस बार दो भाइयों की थी, जिसमें एक जिम्मेदार पुलिस अफसर है और एक मस्तमौला टाइप का इंसान। दोनों के पिता के दोस्त की बेटी मुश्किल में होती है तो वह इनके यहां आकर रहने लगती है। छोटा वाला भाई उस पर लट्टू हो जाता है। लेकिन, शारीरिक संबंध बनाने पर जब उसे इग्नोर करने लगता है तो बदला लेने के लिए ये लड़की परिवार के साथ काम करने वाले एक इंसान को अपना दोस्त बना लेती है। ये दोस्त छोटे भाई से होने वाली झड़प में मारा जाता है और बड़े भाई पर अब जिम्मेदारी है छोटे भाई को कानून के हाथों में सौंपने की।

फिल्म में एक कहानी इसके समानांतर और चल रही होती है जो है बड़े भाई और उसकी प्रेमिका की जो नशे की गिरफ्त में आकर अपनी जिंदगी खो बैठती है। फिल्म में बड़े भाई राजेश के किरदार में हैं फिरोज खान और छोटे भाई अमर बने अनिल कपूर। इनके घर में रहने आने वाली रेशमा बनीं डिंपल कपाड़िया और राजेश की प्रेमिका सीमा का किरदार बतौर स्पेशल अपीयरेंस फिल्म में किया श्रीदेवी ने। श्रीदेवी ने पहले तो फिल्म की कहानी सुनने के बाद फिल्म करने से मना कर दिया था। तब फिरोज खान ने फेंका अपना तुरुप का पत्ता और ये ये था श्रीदेवी से उनका तमिल में बात करना। फिरोज खान बहुभाषी इंसान थे और उनका तमिल में बात करना श्रीदेवी को भा गया। जांबाज़ ही पहली फिल्म है जिससे श्रीदेवी ने अपनी डबिंग करनी खुद शुरू की, वह भी फिरोज खान के हौसला बढ़ाने पर। फिल्म में उन पर फिल्माया गया और आनंद बक्षी का लिखा ये गाना सुपर हिट रहा, हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में....

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फिल्म- जाबांज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म जाबांज़ का संगीत कल्याणजी आनंदजी ने फिरोज खान के कहने पर पूरी तरह पश्चिमी साजों पर ही बनाया था। इस फिल्म में उन्होंने फिल्म के संगीत के साथ खूब प्रयोग किए और हिंदी सिनेमा दर्शकों ने इसे पसंद भी खूब किया। वह डिस्को का दौर था और फिल्म के सारे गाने फिरोज खान ने उसी अंदाज में बनवाए भी और फिल्माए भी। फिल्म की कहानी भी फिरोज खान तब तक अपने खास दोस्त के के शुक्ला के साथ मिलकर पूरी बदल चुके थे और इस बात की जानकारी भी सलीम खान को दे आए थे। हां, उन्होंने सलीम खान से गुजारिश की वह फिल्म का टाइटल उन्हें ‘जाबांज़’ ही रखने की मंजूरी दे दें। सलीम खान ने जो फिल्म पहले लिखी थी और उसमें जिस तरह से फिरोज खान ने तमाम उत्तेजक दृश्य डाले थे, उससे सलीम खान खुश भी नहीं थे। उन्होंने इस बात का शुक्र मनाया कि अब फिल्म में उनका नाम नहीं जा रहा है और खुशी खुशी फिल्म का टाइटल फिरोज खान को दे दिया। फिरोज खान ने सलीम खान की लिखी फिल्म तो नहीं बनाई लेकिन उस फिल्म के लिए जो गाना उन्होंने रेखा पर लंदन में शूट किया था, उसे जरूर इस फिल्म का हिस्सा बनाया। गाना ये भी अपने जमाने का सुपरहिट गाना रहा, एक तो कम जिंदगानी..

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फिल्म- जाबांज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हॉलीवुड फिल्म डुएल इन द सन पर बनी फिल्म ‘जांबाज़’ अनिल कपूर को अपनी चर्चित फिल्म ‘मशाल’ के प्रीमियर पर मिली थी। यश चोपड़ा ने अनिल कपूर की उस दिन खूब तारीफें की और ‘मशाल’ के प्रीमियर वाली रात ‘जाबांज़’ के अलावा उन्होंने एक और फिल्म साइन की जो थी निर्माता निर्देशक सुभाष घई की फिल्म, ‘मेरी जंग’। कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म ‘जाबांज़’ में अनिल कपूर को ये रोल कमल हासन के मना करने पर ही मिला। कमल हासन की तमाम फिल्मों के रीमेक में अनिल कपूर ने काम किया है, लेकिन ये पहली फिल्म रही जिसे लिखा तो गया कमल हासन को ध्यान में रखते हुए लेकिन जिसमें काम किया अनिल कपूर ने।

फिल्म ‘जाबांज़’ के बाद फिरोज खान ने अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और खुद को लेकर भारतीय सेना पर एक फिल्म ‘यलगार’ बनाने का ऐलान किया था। श्रीदेवी ने ‘जाबांज़’ में जो स्पेशल अपीयरेंस दी, वह इसी फिल्म ‘यलगार’ को बतौर हीरोइन साइन करने के बाद ही दी थी। लेकिन, फिरोज खान की जैकी श्रॉफ से कुछ खटपट हुई तो उन्होंने जैकी को फिल्म से निकाल दिया। जैकी और अनिल की दोस्ती उन दिनों ऐसी थी कि जैकी गए तो अनिल कपूर ने भी फिल्म करने से मना कर दिया और फिर ये फिल्म बनी ही नहीं। बाद में इसी नाम से फिरोज खान ने एक फिल्म संजय दत्त, नगमा और मनीषा कोइराला के साथ बनाई। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 11 जून को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

 

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