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MS. Subbulakshmi: क्या आप जानते हैं यूनाइटेड नेशन्स में गाने वाली पहली महिला को? नेहरू कहते थे संगीत की रानी

Wed, 11 Dec 2024 11:47 AM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Wed, 11 Dec 2024 11:47 AM IST
सार

MS Subbulakshmi Death Anniversary: आज संगीत की दुनिया की रानी कहे जाने वाली एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की डेथ एनिवर्सरी है। आइए इस अवसर पर महान संगीतकार के जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को जानते हैं… 

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MS Subbulakshmi death Anniversary know unknown facts about her award achievements first lady sang in UN
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
संगीत की दुनिया में एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का नाम आज भी ध्रुव तारे की तरह चमक रहा है। एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सुरीली आवाज के दीवाने महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी थे। एम एस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मद्रास में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज से ताल्लुक रखती थीं, जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक गायक थे। उनकी दादी अक्कम्मल वायलिन वादक थीं। संगीत उन्हें विरासत में मिला, लेकिन किसे पता था वह इस विरासत को इतनी ऊंचाई पर ले जाएंगी कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री उन्हें ‘संगीत की रानी’ कहकर संबोधित करेंगे। 



 
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एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
मां ने कराया संगीत से परिचय
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का संगीत से परिचय उनकी मां ने कराया। उनकी मां एक वीणा वादक थी। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी को पं. नारायण राव व्यास से ट्रेनिंग दिलवाई। महज दस साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली रिकॉर्डिंग की।
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एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
13 साल की उम्र में पहली बार दिया स्टेज परफॉर्मेंस
अपने संगीत करियर के शुरुआती दिनों में सुब्बुलक्ष्मी अपनी मां के साथ स्टेज पर प्रस्तुति दिया करती थी। वह अपनी मां के साथ भजन गाया करती थीं। पहली बार उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में साल 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर प्रस्तुति दी। यह एकेडमी अपने सख्त नियमों के लिए जानी जाती थी, जहां उम्र को लेकर भी काफी पाबंदिया थीं। हालांकि, सुब्बुलक्ष्मी के गीत सुनकर उन्हें अपना यह नियम भी तोड़ना पड़ा और कम उम्र की होने के बावजूद उन्हें गाने का अवसर दिया गया। 

 

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एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला

स्वामी विवेकानंद के बाद यूनाइटेड नेशन्स में जाने वाली पहली भारतीय

कहते हैं कि एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी के कंठ में सरस्वती विराजमान थी। वह जब गीत गाती थी तो लगता था कि देवलोक का कोई गंधर्व गीत गा रहा हो। सुब्बुलक्ष्मी की ख्याती केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में थी। उन्होंने साल 1966 में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली के लिए न्यूयॉर्क में प्रदर्शन कर इतिहास रचा। स्वामी विवेकानंद के बाद यूएन और विदेश में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय हैं। इसके बाद उन्होंने लंदन, कनाडा से लेकर कई देशों में प्रदर्शन किया। साल 1974 में ‘रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार पाने वाली भी वह पहली भारतीय संगीतकार हैं। 1975 में उन्हें पद्म विभूषण दिया गया और 1968 में उन्हें संगीत कलानिधि से सम्मानित किया गया है। यह अवार्ड जीतने वाली वह पहली महिला हैं। वहीं, 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से सम्मानित होने वाली वह पहली संगीतकार हैं।
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एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
फिल्मी दुनिया में भी रचा इतिहास
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने अपनी युवावस्था में कुछ तमिल फिल्मों में भी काम किया। उनकी पहली फिल्म ‘सेवासदनम’ थी, जो 2 मई 1938 को रिलीज हुई थी। के. सुब्रमण्यम द्वारा निर्देशित इस फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी के साथ एफजी नटेसा अय्यर मुख्य अभिनेता थे। यह फिल्म सुपरहिट थी। इसके बाद वह 1940 में ‘शकुंतलाई’ में, 1941 में ‘सावित्री’ में नजर आईं। साल 1945 में सुब्बुलक्ष्मी के पति सदाशिव ने उनके गानों को लोगों तक पहुंचाने के लिए  फिल्म ‘मीरा’ बनाई। कल्कि कृष्णमूर्ति ने इसकी स्क्रिप्ट लिखी और एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने मुख्य भूमिका निभाई। 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर यह फिल्म रिलीज हुई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने सुब्बुलक्ष्मी के थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद इसे हिंदी में ‘मीराबाई’ के नाम से रिलीज किया गया। इस फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियां पहुंची थीं। फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है।
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