मीना कुमारी किसी पहचान की मोहताज नही हैं। बॉलीवुड में ट्रेजेडी क्वीन कही जाने वाली मीना अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहती थीं। इसी तरह वह अपनी दोस्ती के लिए भी खासी मशहूर थीं। दरअसल, मीना कुमारी की दोस्ती उस वक्त की हीरोइन नरगिस दत्त से थी। अब दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़ा एक किस्सा अब भी लोगों को चौंका देता है। बता दें कि मीना कुमारी के निधन पर नरगिस दत्त ने उन्हें मौत की मुबारकबाद दी थी। इसके पीछे काफी बड़ी वजह थी, जिसे पढ़कर आपके होश उड़ जाएंगे।
Meena Kumari: नरगिस ने मीना कुमारी को क्यों दी थी मौत की मुबारकबाद? वजह जानकर उड़ जाएंगे होश
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मीना की शादीशुदा जिंदगी बेहद उलझी हुई थी। दरअसल, मीना ने कमाल अमरोही से निकाह किया था। कमाल फिल्म इंटस्ट्री के जाने-माने निर्देशक थे। उस वक्त मीना की उम्र महज 18 साल थी। इसके बावजूद उन्होंने 34 साल के कमाल से रिश्ता जोड़ लिया था। बताया जाता है कि निकाह के बाद कमाल अमरोही ने मीना पर कई तरह की पाबंदियां लगा दीं। कमाल नहीं चाहते थे कि मीना फिल्मों से ताल्लुक रखें। हालांकि, बाद में कुछ शर्तों पर उन्होंने मीना को फिल्मों में काम करने की इजाजत दे दी, जिसमें शाम को जल्दी आना और मेकअप रूम में किसी और गैर मर्द की एंट्री पर पाबंदी आदि शर्तें शामिल थीं।
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मीना और कमाल के रिश्तों में धीरे-धीरे फासले बढ़ने लगे। मीना ने इन उलझनों से दूर जाने के लिए शराब का सहारा लिया और वह दिन रात शराब के नशे में धुत रहने लगीं। वहीं, कमाल भी मीना से मारपीट करने लगे, जिसका मीना पर काफी खराब असर पड़ा। उन्होंने लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी की वजह से 38 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया।
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दरअसल, साल 1972 में मीना कुमारी इस दुनिया को अलविदा कह गई थी। उनके आखिरी दर्शन के लिए उन्हें श्रद्धांजलि देने नरगिस दत्त भी गई थीं। उस वक्त उन्होंने कहा था कि मीना तुम्हें मौत मुबारक हो। इसके बाद नरगिस का एक पत्र उर्दू पत्रिका में छपा था, जो उन्होंने मीना कुमारी के लिए लिखा था। अपने इस पत्र की शुरुआत करते उन्होंने लिखा था ‘आपकी मृत्यु पर बधाई मैंने पहले कभी यह नहीं कहा। मीना, आज आपकी बड़ी बहन आपको आपकी मृत्यु पर बधाई देती है और आपसे इस दुनिया में फिर कभी कदम न रखने के लिए कहती है। यह जगह आप जैसे लोगों के लिए नहीं है।'
नरगिस ने बताया, 'एक रात की बात है जब मीना के कमरे से लड़ाई-झगड़े की आवाज आ रही थी। अगले दिन हमें पता चला कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह काम पर नहीं गईं। कुछ देर बाद मैं मीना के कमरे में गई। वह बहुत ज्यादा रो रही थीं, जिससे उनकी आंखें सूजी हुई थीं। मैंने कमल के सेक्रेटरी से बात की और पूछा कि तुम लोग मीना को क्यों मारना चाहते हो? उसने तुम्हारे लिए बहुत काम किया है।' इस पर सेक्रेटरी ने कहा- 'जब सही समय आएगा, हम उसे आराम देंगे।'

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