तमाम अफरातफरी के बीच साउथ सिनेमा के आइकन स्टार अल्लू अर्जुन ने अपनी नई फिल्म ‘पुष्पा 2’ का ट्रेलर पटना में लॉन्च कर दिया। जैसा कि अपेक्षित था, इस दौरान खूब गदर मचा। चप्पलें चलीं। पुलिस ने लाठियां भांजी और भीड़ के इस उफान को देखकर वह ‘पुष्पा’ भी इन लोगों के सामने भरे मंच पर झुक गया, जिसका सबसे मशहूर संवाद ही ये रहा है कि ‘पुष्पा, झुकेगा नहीं साला!’ अब बिहार के ही लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यहां आकर ये सब करने का फिल्म को फायदा कितना मिलेगा? आइए पहले हिंदी फिल्मों के देश मे वितरण को समझने की कोशिश करते हैं।
Pushpa 2 Trailer: ‘पुष्पा 2’ के पटना कार्यक्रम पर नया बवाल, जानिए कितनी होती बिहार से हिंदी फिल्मों की कमाई
साउथ सिनेमा के आइकन स्टार अल्लू अर्जुन ने अपनी नई फिल्म ‘पुष्पा 2’ का ट्रेलर पटना में लॉन्च कर दिया। आखिर यहां आकर ये सब करने का फिल्म को फायदा कितना मिलेगा? आइए पहले हिंदी फिल्मों के देश मे वितरण को समझने की कोशिश करते हैं।
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देश के फिल्म वितरण सर्किट
हिंदी फिल्मों के देश में वितरण के लिए साल 1930 में पहली बार फिल्म सर्किट अस्तित्व में आए। शुरू में वितरण के सिर्फ छह सर्किट बॉम्बे सर्किट, ईस्टर्न सर्किट, दिल्ली यूपी सर्किट, सीपी सीआई राजस्थान सर्किट, पंजाब सर्किट और साउथ सर्किट ही थे। फिर कालांतर में फिल्म वितरकों ने इन छह सर्किटों को आगे विभाजित कर 11 सर्किटों में बांट दिया। अब जो मुख्य सर्किट देश में फिल्म वितरण के काम आते हैं, उनके नाम और उनमें शामिल भौगोलिक क्षेत्र इस प्रकार हैं:
| क्रमांक | मुख्य सर्किट | सर्किट में शामिल क्षेत्र |
| 1 | बॉम्बे सर्किट | मुंबई, गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र व कर्नाटक के कुछ हिस्से |
| 2 | दिल्ली सर्किट | तेलंगाना, महाराष्ट्र व कर्नाटक के कुछ हिस्से |
| 3 | निजाम सर्किट | तेलंगाना, महाराष्ट्र व कर्नाटक के कुछ हिस्से |
| 4 | आंध्र सर्किट | आंध्र प्रदेश |
| 5 | ई्स्ट पंजाब सर्किट | पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर |
| 6 | ईस्टर्न सर्किट | बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, अंडमान-निकोबार, उत्तर पूर्व के बारी राज्य, भूटान, नेपाल |
| 7 | सीपी बरार सर्किट | महाराष्ट्र (विदर्भ), मध्य प्रदेश (दक्षिण-पश्चिम), छत्तीसगढ़ |
| 8 | सेंट्रल इंडिया सर्किट | मध्य प्रदेश के बाकी बचे हिस्से |
| 9 | राजस्थान सर्किट | राजस्थान |
| 10 | मैसूर सर्किट | बंगलुरु और कर्नाटक के कुछ हिस्से |
| 11 | तमिलनाडु सर्किट | तमिलनाडु और केरल |
ये तो हो गए फिल्म वितरण के देश में बने सर्किट, लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदी फिल्में इन सर्किट में से सबसे ज्यादा कमाई किन सर्किट में करती हैं। हिंदी फिल्मों के कुल कारोबार का औसतन जो प्रतिशत अलग अलग सर्किट से आता है, वह परंपरागत रूप से इस प्रकार रहा है:
| सर्किट | हिंदी फिल्मों की कुल कमाई का औसत प्रतिशत |
| बॉम्बे सर्किट | 30 |
| दिल्ली-यूपी सर्किट | 22 |
| ईस्टर्न सर्किट | 15 |
| ईस्ट पंजाब सर्किट | 11 |
| मैसूर सर्किट | 05 |
| सी पी सर्किट | 05 |
| राजस्थान सर्किट | 04 |
| सी आई सर्किट | 04 |
| निजाम आंध्र सर्किट | 03 |
| तमिलनाडु, केरल स. | 01 |
लेकिन, ताजा आंकड़े बताते हैं कि ईस्टर्न सर्किट में शामिल इलाकों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, अंडमान-निकोबार, उत्तर पूर्व के बारी राज्यों के अलावा पड़ोसी देशों भूटान और नेपाल में भी हिंदी सिनेमा से अब उतनी रकम नहीं आती जितनी कुछ साल पहले तक आया करती थी। नेपाल और भूटान में नई हिंदी फिल्मों का कारोबार बहुत चुनौती भरा हो चुका है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में किसी हिंदी फिल्म के कारोबार की भागीदारी अब 10 फीसदी तक भी सब मिलाकर नहीं पहुंचती। और, ये बात ‘पुष्पा 2’ का प्रचार कर रही पीआर एजेंसी (इसके प्रमोटर बिहार से हैं) ने शायद फिल्म ‘पुष्पा 2’ बनाने वालों तक नहीं पहुंचाई।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने इसी के चलते सोमवार को अपने सोशल मीडिया पेज पर इस आयोजन को लेकर सवाल भी किया है कि कोई बता सकते हैं किसी फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में बिहार की कितनी भागीदारी है? इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम को लेकर बहस सी छिड़ चुकी है। इस बारे में ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन का कहना है, “अल्लू अर्जुन की पिछली फिल्म ‘पुष्पा’ के हिंदी संस्करण ने सबसे ज्यादा कारोबार ईस्टर्न सर्किट और दिल्ली-यूपी सर्किट से ही किया था। वह अपने इन्हीं प्रशंसकों का आभार जताने पटना पहुंच रहे हैं। वहां से फिर वह दिल्ली यूपी सर्किट और अन्य सर्किट का भ्रमण करते हुए मुंबई पहुंच सकते हैं।”