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Renowned filmmakers critics writers delegates make Sanskar Bharti organized cine talkies a successful event
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Cine Talkies 2024: सिनेमा की सफलता अपनी कहानियों में, नकल करने जाएंगे तो अपना भी खो देंगे
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: सुवेश शुक्ला
Updated Wed, 18 Dec 2024 06:48 PM IST
सार
Cine Talkies 2024: मुंबई में संस्कार भारती नामक संस्था बहुत ही शांत तरीके से सिनेमा को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास लगातार कर रही है। इसी क्रम में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मे तीन दिवसीय सिने टॉकीज 2024 महोत्सव में भारतीय सिनेमा को राष्ट्रीय पहचान के साथ जोड़ने पर गंभीर विचार मंथन हुआ।
देश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले शहर मुंबई में ही देश की सबसे ज्यादा फिल्में, वेब सीरीज और म्यूजिक वीडियो बनते हैं। सिनेमा की दिशा और दशा तय करने वाले शहर में बीते कुछ वर्षों से संस्कार भारती नामक संस्था बहुत ही शांत तरीके से सिनेमा को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास लगातार कर रही है। इसी क्रम में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मे तीन दिवसीय सिने टॉकीज 2024 महोत्सव में भारतीय सिनेमा को राष्ट्रीय पहचान के साथ जोड़ने पर गंभीर विचार मंथन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत अभिनेता, निर्माता, लेखक और निर्देशक सचिन पिलगांवकर ने की। उनके साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एमडी-सीईओ आशीष चौहान, सिने टॉकीज 2024 की संरक्षक अभिनेत्री और निर्माता खुशबू सुंदर और फिल्म समीक्षक भारती प्रधान भी मौजूद रहे। इस साल की थीम ‘भारतीय सिनेमा: वुड्स टू रूट्स’ के बारे में सचिन ने कहा कि हमारी जड़ें इतनी मजबूत हैं कि फिल्म निर्माता उनमें डुबकी लगा सकते हैं तथा अपनी विषय-वस्तु पर नए विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। कंतारा, मुंज्या, स्त्री जैसी फिल्मों की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति फिल्म निर्माता के लिए बहुत सी नई कहानियां तथा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
इस मौके पर खुशबू सुंदर ने इस बात पर जोर दिया कि ओटीटी के माध्यम से हमारे युवाओं को चुपचाप दी जा रही सामग्री पर नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने स्वतंत्रता के नाम पर ओटीटी प्लेटफार्मों पर दिखाए जा रहे कंटेंट पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि संस्कार भारती की इस तरह की पहल से उम्मीद है कि इस बारे में संवाद और जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। ‘क्या सिनेमा की सफलता का एकमात्र पैमाना बॉक्स ऑफिस है?’ इस पैनल में चर्चा के दौरान निर्माता शिबाशीष सरकार ने निर्माताओं को जोखिम उठाने के लिए तैयार रहने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। एक दूसरे पैनल में फिल्म अभिनेत्री मृणाल कुलकर्णी ने अपनी हालिया रिलीज टीवी सीरीज पैठणी का उदाहरण देते हुए कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। पैनल में शामिल निर्देशक अपूर्व सिंह कर्की ने कहा कि सिनेमा का अंतिम उद्देश्य हमेशा दर्शकों को सोचने के लिए कुछ देना होना चाहिए।
एक और पैनल में निर्देशक नील माधव पांडा, अभिनेता स्वप्निल जोशी और लेखक निरेन भट्ट ने इस बात पर आम राय जताई कि भारतीय संस्कृति में कई कहानियां हैं जो कही जानी बाकी हैं। भारतीय फिल्म निर्माताओं को भी अपनी विषय-वस्तु के लिए क्षेत्रीय लोककथाओं, इतिहास और संस्कृतियों को देखना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान उपस्थित रहे प्रतिनिधियों की भी ये आम राय थी कि भारतीय सिनेमा की सफलता अपने आसपास की कहानियों में ही है। हम विदेशी सिनेमा की नकल करने जाएंगे तो अपना भी खो देंगे।
‘सिने टॉकीज 2024’ का तीसरा दिन एक बहुत ही गंभीर परिचर्चा के साथ शुरू हुआ जिसका विषय था, ‘भारतीय सिनेमा का पुनरुत्थान: वुड्स टू रूट्स’। लेखक-निर्देशक अभिजीत देशपांडे ने इस मौके पर कहा कि क्षेत्रीय फिल्मों की हालिया सफलता से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा का सही मायने में फिर से उदय हुआ है, लेकिन उन्होंने दर्शकों को क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए समान प्रशंसा दिखाने की आवश्यकता पर बल दिया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्ममाता मनीष सैनी ने कहा कि कहीं न कहीं हिंदी फिल्म उद्योग पश्चिमी सामग्री की नकल करने की कोशिश में अपनी मौलिकता से दूर हो गया है। अब समय आ गया है कि उद्योग सावधानीपूर्वक चयन करे कि वे किस दर्शक वर्ग के लिए फिल्में बना रहे हैं। साउथ सिनेमा के निर्माता एस श्रीनिवासन ने इस मौके पर सिनेमा में जोखिम की जरूरत पर खासा जोर दिया।
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