शबाना आजमी हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री हैं। उन्होंने अपने शानदार अभिनय क्षमता से दर्शकों का काफी मनोरंजन किया है। एक सफल अभिनेत्री होने के साथ-साथ वह मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर की पत्नी भी हैं। अब हाल ही में, अभिनेत्री ने जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट पर अपने विचार साझा किए और महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा है।
Shabana Azmi: 'महिलाओं को 16वीं से 21वीं सदी तक दबाया गया है', हेमा कमेटी रिपोर्ट पर बोलीं शबाना आजमी
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एक इवेंट में शबाना आजमी ने सदियों से भारत में महिलाओं को लगातार दबाए जाने के मुद्दे पर अपनी राय रखी है। शबाना ने कहा, "आपको यह समझना चाहिए कि भारत में महिलाओं ने सदियों से अपनी यात्रा की है। 16वीं से 21वीं सदी तक, उन्होंने प्रगति की है, लेकिन साथ ही उन्हें दबाया भी गया है। भारत में महिलाएं प्रगति और दमन का एक विरोधाभास रही हैं, ठीक भारत की तरह।"
अभिनेत्री ने आगे कहा कि महिलाओं की कहानियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि महेश भट्ट की निर्देशित उनकी एक फिल्म अर्थ को आज फिर से रिलीज किया जाना चाहिए क्योंकि यह अभी भी प्रासंगिक है और महिला आंदोलन के बारे में बात करती है। 1982 की यह फिल्म महिलाओं के संघर्ष और स्वतंत्रता को दर्शाती है।
हेमा रिपोर्ट केरल सरकार ने बनाई गई थी। जस्टिस हेमा समिति का गठन 2017 में एक प्रमुख अभिनेत्री से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न मामले के मद्देनजर किया गया था। इसकी रिपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य मलयालम अभिनेत्रियों द्वारा सामना की जाने वाली कार्य स्थितियों, यौन उत्पीड़न और लैंगिक असमानता की जांच करना है।
इसने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के बारे में परेशान करने वाली सच्चाइयों को उजागर किया। इसमें यह वास्तविकता भी शामिल है कि कई महिलाओं को भूमिकाएं हासिल करने के लिए यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है।
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