इस साल का ‘होमियो आइकन अवार्ड’ जीत चुकीं डॉ. आकांक्षा भटनागर की क्लीनिक पर जुटने वाले पुराने मरीजों के रोगी इन दिनों उनकी दवा के साथ साथ उनकी आवाज की भी खूब तारीफ कर रहे हैं। शौकिया तौर पर अभिनय करती रहीं आकांक्षा ने हाल ही में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘कब्जा’ के हिंदी संस्करण में रानी मधुमति के किरदार की डबिंग की है और ये फिल्म जब से अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है, उनके मरीजों की कतार एकाएक लंबी हो गई है। लोग फिल्म में उनकी आवाज पहचान कर फोन करके भी खूब बधाइयां दे रहे हैं।
Kabzaa Hindi: रानी मधुमति की ‘आवाज’ बनकर आकांक्षा ने खींचा ध्यान, डबिंग जगत में हुई नए सितारे की एंट्री
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‘दिल्ली क्राइम’ में आईं नजर
‘अमर उजाला’ से एक एक्सक्लूसिव मुलाकात में आकांक्षा बताती हैं, ‘मैं पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक हूं और गुजरात के एक सह शासकीय अस्पताल में नौकरी भी कर चुकी हूं। दिल्ली में रहने के दौरान मैंने दोस्तों के कहने पर एक दो ऑडिशन दिए थे, और वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ सीजन वन में मैंने अभिनय भी किया। इसके बाद मेरे पास कुछ धारावाहिकों के प्रस्ताव भी आए और मैं अब तक तीन धारावाहिक भी कर चुकी हूं। लेकिन, डबिंग की फील्ड में आना महज संयोग ही रहा।’
ऐसे मिला पहला बड़ा मौका
ओटीटी पर इन दिनों तकरीबन हर वेब सीरीज और फिल्म की डबिंग भारतीय भाषाओं में भी शुरू होने से उन कलाकारों को खूब काम मिल रहा है जिनकी भारतीय भाषाओं पर पकड़ अच्छी है और जिनका उच्चारण साफ है। आकांक्षा बताती हैं, ‘इस क्षेत्र में हाथ आजमाने के लिए मुझे मेरे छोटे भाई अर्पित ने प्रेरित किया। वह साउंड डिजाइनिंग में ही सक्रिय है और उसके बहुत जोर देने पर मैं प्रिंस स्टूडियो में एक दिन ऐसे ही सैंपल देने चली गई थी। लेकिन, वहां से हफ्ते भर बाद ही फोन आ गया कि आपकी आवाज फिल्म के लीड किरदार के लिए चुन ली गई है।’
‘मर्डर मिस्ट्री 2’ की भी डबिंग
आकांक्षा इसके पहले फिल्म ‘बधाई दो’ के अंतर्राष्ट्रीय संस्करण के अलावा नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘मर्डर मिस्ट्री 2’ औऱ अमेजन प्राइम वीडियो की अंतर्राष्ट्रीय सीरीज ‘पॉवर’ के लिए भी डबिंग कर चुकी हैं। आकांक्षा का मानना है कि मुंबई में डबिंग के क्षेत्र में जो नया काम शुरू हुआ है वह उन लोगों के लिए बहुत काम का है जो थियेटर या अच्छी हिंदी की पृष्ठभूमि से हैं और जिनको अपनी आवाज पर मेहनत करने में दिक्कत नहीं है।
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डबिंग को बना सकते हैं करियर
वह कहती हैं, ‘डबिंग को करियर ऑप्शन के तौर पर भी अब चुना जा सकता है। ओटीटी के आने के बाद से इतना काम जो हो रहा है।’ आकांक्षा अपनी अच्छी हिंदी का श्रेय अपने घरवालों और हिंदी अखबारों को देती हैं। वह कहती हैं, ‘मेरा बचपन राजस्थान में बीता है तो हम लोग अक्सर घर में भी मारवाड़ी में बात करना शुरू कर देते थे। लेकिन मेरे माता पिता ने हमेशा हमें सही हिंदी बोलने और लिखने की प्रेरणा दी और इसमें मदद भी की। मुझे खुशी है कि उनकी सिखाई बातें डबिंग में मेरे खूब काम आई हैं।’