निर्माता एकता कपूर की चर्चित टीवी फ्रेंचाइजी 'नागिन' के चौथे सीजन 'भाग्य का जहरीला खेल' में अहम भूमिका निभाने वालीं अभिनेत्री जैस्मिन भसीन भी रियलिटी शो 'बिग बॉस' के 14वें सीजन की एक प्रतियोगी हैं। उन्होंने अब तक बाहर से ही इस शो का विश्लेषण किया है लेकिन अब वह खुद अंदर से अपने मानवीय स्वभाव को जानेंगी। अपने करियर के हर फैसले में जैस्मिन को अपने परिवार का समर्थन मिला है और इस शो के लिए भी वह अपने परिवार से ही आशीर्वाद लेकर आई हैं। अमर उजाला ने खास बातचीत में जैस्मिन से उनके सफल हो सकने का मंत्र जाना।
Bigg Boss 14: इसलिए जैस्मीन ने खींच रखी है अपने आसपास 'लक्ष्मण रेखा', अमर उजाला से बातचीत में किया खुलासा
आपको बिग बॉस के घर में रहने वालों की खासियत क्या नजर आती है?
बिग बॉस के घर में रहने वाले प्रतियोगियों का असली स्वभाव पता चलता है। वहां रहकर असली इंसान सामने आता है। अक्सर जो टीवी पर दिखावा करते हुए लोग नहीं समझ पाते, वह बिग बॉस के घर में पता चलता है। वहां पता चलता है कि हर किसी को भूख लगती है, लड़ाइयां करते हैं, चिड़चिड़ा हट होती है, जलन होती है। वह सब कुछ होता है जो किसी दूसरे इंसान को होता है। यही मानव स्वभाव है।
आपकी ताकत क्या है जो बिग बॉस के घर में आपके काम आएगी?
(हंसते हुए) मेरी ताकत…! ताकत तो मेरी यही है कि मेरे आस-पास एक सीमा है जिसे मैं लोगों को पार नहीं करने देती। इस इंडस्ट्री में काम करते हुए मुझे कई साल बीत गए हैं लेकिन इस दौरान मैंने कुछ गिनती के चार या पांच दोस्त ही बनाए हैं जो उस सीमा को पार कर सकते हैं और मेरे करीब आ सकते हैं। मेरी यही ताकत है कि मैं अपने आसपास एक सीमा बना कर रखती हूं जिसे मैं किसी को भी पार नहीं करने देती। वैसे मैं सबके लिए अच्छी हूं लेकिन मैं किसी को मौका नहीं देती कि कोई मेरे पास आए और मुझे शारीरिक या फिर मानसिक रूप से प्रभावित कर सके।
आपके वह दोस्त कौन हैं जो उस सीमा को पार कर सकते हैं और आपके करीबी हैं?
ऐसे मेरे कई सारे दोस्त हैं। अर्चना है, पंकज है और तीन-चार लोग टेलीविजन की दुनिया से भी हैं। सीमा लांघने का मतलब यह है कि कौन मेरे सबसे ज्यादा गरीब है? कौन मेरी छुट्टियों के दिनों में साथ रहते हैं? खास दिनों पर साथ रहते हैं? त्योहारों पर हम खुशियां साथ बांटते हैं? और कौन मेरे व्यक्तिगत जीवन का हिस्सा हैं? ये सारे काम मेरे कुछ ही दोस्तों के साथ होते हैं।
बिग बॉस के घर में दूसरे प्रतियोगी अपनी रणनीति बनाएंगे। वहां भी गुटबाजी चलती है। तो, उससे निपटने के लिए आपने क्या तैयारियां की हैं?
जी, जैसी स्थिति बनेगी, उसी हिसाब से उसमें ढल जाएंगे। कोई रणनीति स्थिति को समझने से पहले तो नहीं बनाई जा सकती। कोशिश करूंगी कि जैसी मैं हूं, वैसी ही रहूं। उस खेल में मैं अपने आप को कुछ और बनाकर पेश करने से कहीं ऐसा न हो कि कहीं मैं खुद ही खो जाऊं। मेरी कोशिश रहेगी कि अब तक मैंने अपनी जिंदगी के 30 साल जिस तरह काटे हैं, ये कुछ हफ्ते भी मैं उसी छवि के साथ बिताऊं। क्योंकि, आज तक मैंने अपने आप से जो भी फैसले लिए हैं, वह सब सही ही हुए हैं।
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