छोटे परदे के लोकप्रिय शो मेरे साईं की कहानी सोमवार से एक नए कालखंड में प्रवेश कर रही है। इसी के साथ शो में साईं का चेहरा भी बदल रहा है। सोमवार से इस शो में साईं की भूमिका में मशहूर अभिनेता तुषार दलवी नजर आएंगे। तुषार यहां बता रहे हैं साईं के बारे में अपने अनुभवों के बारे में। पढ़िए आगे की स्लाइड्स में।
आज से बदल जाएगा 'मेरे साईं' में बाबा का चेहरा, दलवी बोले- मैंने साईं की शिक्षा को जीवन में ढाला है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
“साईं बाबा पर लोगों की आस्था उनके तमाम चमत्कारों की वजह से है। लेकिन, उनके जीवन का सबसे बड़ा चमत्कार रहा इलाके में फैले हैजा रोग से लोगों को चावल के दानों से ठीक कर देना। शो में ये चमत्कार दिखाया जा चुका है। अब साईं अपने जीवन के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं और इसी के साथ परदे पर ये भूमिका मुझे मिल रही है।”
“मैं और मेरा परिवार हमेशा साईं में विश्वास करते रहे हैं और लंबे समय से उनकी शिक्षाओं का पालन कर रहे हैं। अगर कोई मुझे साईं भक्त कहकर संबोधित करता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। साईं बाबा वह व्यक्ति थे जो हाल के दिनों में हमारे साथ थे और यह कोई बनाया हुआ चरित्र नहीं है। यह केवल उनके द्वारा किए गए चमत्कार ही नहीं हैं बल्कि उनके मूल्य और शिक्षाएं भी हैं जो उन्होंने सभी को देने की कोशिश की। श्रद्धा और सबूरी दो शब्द हैं जो उन्होंने मानव जाति को उपहार में दिए और अगर हम उन्हें अपने जीवन में शामिल करने की कोशिश करते हैं, तो इससे हमारा जीवन और लोगों का जीवन और अधिक आरामदायक बन जाएगा। इन शब्दों ने वास्तव में मुझे जीवन को बेहतर और अधिक सकारात्मक बनाने में मदद की।”
“मैं उन लेखकों के काम की सराहना करना चाहूंगा जो कहानियों के बारे में गहराई से शोध करते हैं। जब मुझे साईं के रूप में चुना गया तो मैंने शो की पृष्ठभूमि और कहानी को समझने के लिए नियमित रूप से शो देखना शुरू कर दिया। मैंने साईं चरित्र का पाठ करना भी शुरू कर दिया है क्योंकि मैं चरित्र को अधिक प्रामाणिक और दर्शकों के लिए अधिक विश्वसनीय बनाना चाहता हूं।”
“मेरे साईं पौराणिक शो नहीं है यह एक ऐसा शो है जो साईं बाबा की यात्रा और चमत्कारों के बारे में बात करता है जिसने उन्हें अपने भक्तों के बीच इतना लोकप्रिय बना दिया है। पिछले 100 वर्षों में उनके पंथ में तेजी से कई गुना वृद्धि हुई है और उनके संदेश और शिक्षा ने उनके लाखों अनुयायियों पर अनुग्रह किया है।”