अगर आपके बच्चे दूरदर्शन पर फिर से प्रसारित हो रहा सीरियल शक्तिमान देख रहे हैं तो टीवी बंद होने के बाद उन पर नजर जरूर रखिए। खासतौर से तब जब वह घर की बालकनी या छत पर जा रहे हों। कम लोगों को ही पता होगा कि पहली बार के प्रसारण के दौरान शक्तिमान की कहानी कभी अपने सिरे तक नहीं पहुंच पाई। तब ये सीरियल अचानक ही बंद कर दिया गया था। और, इसकी वजह को लेकर भी तमाम किस्से प्रचलित रहे हैं।
इस वजह से पहले प्रसारण पर बीच में ही बंद हो गया शक्तिमान, मुकेश खन्ना ने यूं खोले साजिश के सारे राज
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नब्बे के दौर के बच्चों की यादों में शक्तिमान एक मजबूत अध्याय है। यह भारत का पहला सुपरहीरो शो था जो 13 सितंबर 1997 से लेकर 27 मार्च 2005 तक दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ। शो में शक्तिमान का किरदार मुकेश खन्ना ने निभाया। वह इस शो के निर्माता भी थे। तमाम शोहरत और टीआरपी मिलने के बावजूद यह शो एक दिन अचानक बंद हो गया। तब के दर्शक बताते हैं कि लोगों को कभी टीवी पर शो का अंत देखने को नहीं मिला।
शक्तिमान अपने प्रसारण के दिनों में तमाम बातों को लेकर सुर्खियों में रहा है। कभी दूरदर्शन के अधिकारियों से विवादों को लेकर तो कभी बच्चों के छतों से कूद जाने को लेकर। कहा ये भी जाता है कि बच्चों के छतों से कूदने की खबरें तब जानबूझकर भी फैलाई गई थीं। मुकेश खन्ना ने कभी ये नहीं माना कि बच्चों के अपनी जान जोखिम में डालने के प्रयासों के चलते शो बंद हुआ। उन्होंने दूरदर्शन के रवैये को शो का प्रसारण रुकने की असल वजह बताया था।
शक्तिमान का प्रसारण रुकने के कुछ साल बाद मुकेश खन्ना ने एक इंटरव्यू में ये खुलासा किया कि शो के प्रसारण के लिए उनके द्वारा दी जाने वाली धनराशि में दूरदर्शन लगातार इजाफा कर रहा था जिसके चलते उनके लिए प्रसारण चालू रखना मुश्किल हो गया। मुकेश खन्ना के मुताबिक, 'पहले शक्तिमान शनिवार की सुबह और मंगलवार की शाम को आता था। यह प्राइम टाइम ना होते हुए भी दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा था। उस समय इस शो के प्रसारण फीस के तौर पर उन्हें तीन लाख अस्सी हजार रुपये देने होते थे। 100 से लेकर 150 एपिसोड्स तक ऐसा ही चला।
मुकेश ने बताया कि शो को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही थी तो दूरदर्शन ने इसे रविवार को दिखाने का निर्णय लिया। तर्क दिया गया कि उस दिन बच्चों की छुट्टी भी होती है। उनके मुताबिक, 'इसके लिए मुझे सात लाख अस्सी हजार रुपये देने होते थे। अगले साल शो के 104 एपिसोड्स थे और मुझे दस लाख अस्सी हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। फिर मुझे पता चला कि इस धनराशि को भी बढ़ाकर 16 लाख करने की बात चल रही है। मैंने इसका विरोध किया लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी। इतनी अधिक फीस के चलते मुझे काफी दिक्कत हो रही थी। मैं शक्तिमान का प्रसारण कभी रोकना नहीं चाहता था लेकिन मुझे यह कदम उठाना पड़ा।'