बुराई पर अच्छाई की और अधर्म पर धर्म की जीत का नौ दिन तक चलने वाला पर्व नवरात्रि अपनी पूरी छटा के साथ मुंबई में मनाया जा रहा है। बीती रात से ही मां दुर्गा की प्रतिमाओँ का घरों में गाजे बाजे के साथ आना शुरू हो गया। सोमवार को पहली नवरात्रि पर मां की विधिवित स्थापना पूजा के साथ ही रात से पूरे शहर में गरबा और डांडिया का उत्सव के रंग दिखने लगेंगे। नारी शक्ति को समर्पित इस पवित्र उत्सव के बारे में हमने नौ अलग अलग अभिनेत्रियों से बात की और उनसे शक्ति के इन नौ स्वरूपों के बारे में उनके विचार जाने। आइए जानते हैं...
Navaratri 2022: नौ अभिनेत्रियों से जानिए दुर्गा के नौ रूपों का सार, हर दिन के ध्यान से शर्तिया बदल जाएगा जीवन
धारावाहिक ‘दूसरी मां‘ में यशोदा का किरदार निभा रहीं नेहा जोशी ने कहा, ‘‘नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री, जिन्हें देवी पार्वती के नाम से भी जाना जाता है, की पूजा की जाती है। देवी पार्वती को हिमालय की पुत्री माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन में अत्यधिक चेतना, उत्साह, कामयाबी एवं खुशी आती है। वह प्रकृति मां का सम्पूर्ण रूप हैं। इस दिन देवी को प्रसन्न करने एवं खुशी तथा प्रसन्नता जाहिर करने के लिये लोग पीले रंग के परिधान पहनते हैं। मेरे होमटाऊन में हम देवी के चरणों में शुद्ध घी अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी को शुद्ध घी अर्पित करने से माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों एवं बीमारियों से मुक्त जीवन का आशीर्वाद देती हैं।’
धारावाहिक ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश सिंह ऊर्फ कामना पाठक ने कहा, ‘‘नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन हमें अपनी आंतरिक दिव्यता का पता लगाने का प्रयास करना चाहिए और मेडिटेशन अथवा ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति को जगाना चाहिए। देवी का यह स्वरूप समर्पण, प्रेम एवं निष्ठा को व्यक्त करता है। इसलिये उस ऊर्जा को प्रसारित करने के लिये हर दिन हरे रंग के वस्त्र पहने जाते हैं।’
‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अंगूरी भाबी की भूमिका अदा कर रहीं, शुभांगी अत्रे ने कहा, ‘‘देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है। वह ग्रे रंग के परिधान पहनती हैं और मस्तक पर अर्द्धचंद्र धारण करती हैं। वह अपने भक्तों को मुसीबत में डालने वालों से संघर्ष करने और उनका संहार करने के लिये तैयार रहती हैं। वह शेर की सवारी करती हैं और ऐसी माना जाता है कि अपने इस रूप में माता रानी सभी दुष्टों और दुराचारियों का नाश करती हैं। इस क्रोधायुक्त देवी को प्रसन्न करने के लिये उन्हें दूध, मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है।‘‘
धारावाहिक ‘दूसरी माँ‘ में माला बनीं निधि उत्तम ने कहा, ‘‘नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की उपासना की जाती है। कूष्मांडा का अर्थ होता है कुम्हड (कद्दू)। यह एक सब्जी का नाम है और ऐसा माना जाता है कि इस सब्जी में जीवन को अवशोषित एवं उत्सर्जित करने की शक्ति होती है। देवी की चमक और उनके पास मौजूद दिव्यता सूर्य को प्रकाशित करती है। उन्हें ‘प्रसन्नचित्त देवी‘ भी कहा जाता है, जोकि जुनून, क्रोध एवं शुभता का प्रतीक हैं। इसलिये इस देवी को प्रसन्न करने के लिये भक्तजन नारंगी रंग के वस्त्र पहनते हैं।‘‘

कमेंट
कमेंट X