हिंदीभाषी राज्यों के क्षेत्रीय सितारों की जब भी बात होती है तो इन दिनों सपना चौधरी का नाम सबसे आगे आता है। उनके डांस वीडियो के करोड़ों दीवाने हैं। बड़े बडे चैनल उनके नाम का सहारा अपनी टीआरपी दुरुस्त करने के लिए लेते हैं। सपना चौधरी से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने की ये खास मुलाकात।
EXCLUSIVE: सपना चौधरी भूली नहीं मनोज तिवारी से पहली मुलाकात की खटास, डिजिटल मीडिया पर कही ये बात
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दुनिया को शायद पहली बार टीवी शो ‘बिग बॉस’ से ही पता चला कि सपना चौधरी नाम की डांसर किसी डूबते टीवी शो की टीआरपी इतनी बढ़ा सकती है, आपको इस शो से कितना फायदा हुआ।
फायदा तो होता ही है, मैं कहूंगी कि कहीं न कहीं रीजनल स्टार के जो श्रोता या दर्शक होते हैं वे लोक में बहुत पकड़ रखते हैं। अगर हमें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिले तो हमारे पास वे दर्शक भी आते हैं तो हमें जानते ही नहीं या जिनके पास तक हमारी कला पहुंचती ही नहीं। संभ्रांत वर्ग की यह दर्शक संख्या हमारी कला को देखती है तो क्षेत्रीय कलाकारों को बहुत फायदा होता है। साथ ही हमें खुद को बदलने और अपनी कला को निखारने की सीख भी मिलती है।
किसानों, मजदूरों और गांव वालों के बीच मंचीय प्रस्तुतियां देने के बरसों बाद आपको मुख्य धारा के मनोरंजन उद्योग ने सिर आंखों पर बिठाया, कितना कठिन रहा ये संघर्ष?
काबिल से काबिल कलाकार भी कुछ नहीं कर पाएगा अगर उसकी कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए साधन ही न हों। साधन हर कलाकार के लिए बहुत जरूरी है। मेरे लिए तो ये सब बहुत बाद में मिल सका। मेरी यात्रा में तो शायद भगवान ने ही संघर्ष लिख दिया था। जितना संघर्ष हमने अपने समय में किया, उसका लाभ अब आने वाली पीढ़ी को मिल रहा है। मुझे खुशी होती है जब मैं और नई लड़कियों को वह सब करते देखती हूं जिसे करने के लिए एक समय में मुझे समाज से लोहा लेना पड़ा।
डिजिटल मनोरंजन से लोक कलाकारों को कितना लाभ हो रहा है?
अभी तो पलक झपकते इंसान स्टार बन सकता है। अब आपके हुनर को कोई दबा नहीं सकता। कौशल है तो करिश्मा होगा ही, ये तय है। इतने सारे डिजिटल ऐप्स आ गए हैं कि पूछो मत। हमारे समय तो ये कुछ नहीं था। टिक टॉक से ही इतने स्टार बन गए हैं और भी ना जाने कितने शॉर्ट वीडियो वाले हमसे संपर्क करते रहते हैं। तो ये डिजिटल क्रांति गांव, गली, कूंचे के कलाकारों के लिए वरदान से कम नहीं हैं। हमारे पास ऐसा कोई प्लेटफार्म नहीं था तभी शायद हमें लोगों तक पहुंचने में बहुत समय लग गया।
अभी आप दो और क्षेत्रीय सितारों मनोज तिवारी और रवि किशन के साथ काम कर रही हैं। मनोज तिवारी से आपकी पहली मुलाकात कब और कैसे हुई?
मनोज तिवारी से मेरी पहली मुलाकात हुई थी मौर्या होटल में।वह उस समय दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बने बने थे। शायद वह मुझे उस समय अच्छे से जानते नहीं थे या फिर जानते थे तो ना जानने का बहाना कर रहे थे। हालांकि, मेरे अंदर नहीं है ये चीज। लेकिन मैंने देखा है जब कोई बड़ा आर्टिस्ट दूसरे से मिलता है तो उसे जानते हुए भी उसे अनदेखा करता है। ये नहीं पता कि ऐसा वह क्यूं करता है। वहां बस हमारी हाय, हैलो हुई थी। वह बोले, ‘अच्छा तुम हो। अच्छा ठीक है। हां, हां, सुना है सुना है। ठीक है।’ फिर उसके बाद मुलाकातें हुईं और प्रेम बढ़ने लग गया तो हम फिर बहुत अच्छे मित्र बन गए आपस में।