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रामानंद सागर को रामायण के बाद लड़नी पड़ी 10 साल की ये कानूनी लड़ाई, इसलिए खत्म हो गया 'राम' का करियर

Wed, 08 Apr 2020 05:34 PM IST
Avinash Pal अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Avinash Pal Updated Wed, 08 Apr 2020 05:34 PM IST
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Unknown and interesting facts about arun govil ramananad sagar ramayan
रामानंद सागर की रामायण का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लॉकडाउन के दौरान किसी भी शो या फिल्म की शूटिंग नहीं चल रही है। इस वजह से दूरदर्शन के स्वर्णिम दिनों (सैटेलाइट चैनल आने से पहले के दिन) के तमाम शोज फिर से इस चैनल पर प्रसारित किए जा रहे हैं। 33 साल बाद भी रामानंद सागर की रामायण को लेकर लोगों में खास उत्साह है। हालांकि, भारतीय टीवी के इतिहास में दर्जनों रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले इस शो की शुरुआत काफी मुश्किलों भरी रही। शो के निर्देशक रामानंद सागर से लेकर विभिन्न कलाकारों को भी तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा। चलिए बताते हैं आपको ऐसे ही कुछ दिचचस्प किस्से।

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Arun Govil

रामानंद के इंतजार का सागर
रामानंद सागर को रामायण का प्रसारण शुरू करने में करीब दो साल का वक्त लग गया। इसके लिए उन्होंने दूरदर्शन और सूचना प्रसारण मंत्रालय में काफी चक्कर भी लगाए थे। उन्हें इस सीरियल को बनाने की अनुमति तो 1985 में मिल गई थी लेकिन इसका प्रसारण 25 जनवरी 1987 से शुरू हो सका। दरअसल इसके शुरुआती तीन पायलट एपिसोड मंत्रालय की तरफ से नकार दिए गए थे। इससे पहले कभी इस तरह का प्रसारण नहीं हुआ था इस वजह से सभी आला अधिकारी काफी सर्तक थे। उन्होंने शो से जुड़ी अपनी  कई आपत्तियां दर्ज कराई जिसमें सीता का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के वेशभूषा प्रमुख रही।

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Ramayan - फोटो : social media

रविवार सुबह मचती अफरातफरी
कोई भी धारावाहिक जब बनता है तो इसे बनाने वाली कंपनी के साथ साथ जिस चैनल पर ये प्रसारित होता है, उसकी क्रिएटिव टीम भी स्क्रिप्ट लिखे जाने से लेकर शूटिंग और एडीटिंग तक साथ लगी रहती है। लेकिन, ये कोशिश हाल के बरसों में शुरू हुई है, पहले निर्माता धारावाहिक एपीसोड बनाकर भेज देता था और चैनल को अगर कोई आपत्ति होती थी निर्माता को वह हिस्सा फिर से शूट करना होता था। ऐसा ही कुछ रामायण के साथ भी होता था। रामानंद सागर अपना एपीसोड भेज देते। दूरदर्शन वाले अपने हिसाब से उसे देखते और फिर करेक्शन बताते। इंटरनेट वगैरह तब था नहीं, बस टेप ही आती जाती थी। ऐसे में कई कई बार रामायण का फाइनल कैसेट दूरदर्शन तक शो शुरू होने के ठीक पहले ही पहुंच पाता था।

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Ramayan Serial - फोटो : twitter

लव कुश की कानूनी लड़ाई
ये उन दिनों की बात है जब दूरदर्शन हर धारावाहिक को 13 एपिसोड या फिर इसके गुणक में अनुमति देता था और तब धारावाहिकों की कहानी टीआरपी बढ़ जाने के बाद भी खींची नहीं जाती थी। रामायण को 78 एपिसोड्स की मंजूरी मिली। और, जब ये हिट हो गया तो लोगों ने लव कुश की कहानी दिखाए जाने की मांग शुरू कर दी। रामानंद सागर इसके लिए तैयार नहीं थे। उनके अनुसार अगर वह लव कुश की कहानी बनाते हैं तो यह एक काल्पनिक कथा होगी। और हुआ भी यही, इस कहानी के प्रसारित होने के बाद शो से जुड़े कई तरह के विवाद सामने आए। रामानंद सागर को इनके लिए 10 साल तक कोर्ट में केस भी लड़ने पड़े।

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Arun govil - फोटो : Twitter

खत्म हो गया 'राम' का करियर
रामायण में निभाए राम के किरदार से अरुण गोविल को पूरे देश में शोहरत और इज्जत तो खूब मिली लेकिन यह किरदार लोगों के जहन में इस कदर से बैठ गया कि लोग अरुण गोविल में सिर्फ श्रीराम की छवि ही देखने लगे। अरुण गोविल कहते हैं, 'रामायण के बाद मैं सिनेमा में वापसी करना चाहता था लेकिन राम के तौर पर मेरी छवि ऐसी बन गई कि निर्माता कोई दूसरा काम मुझे देते ही नहीं थे। उन्हें लगता था कि अब मैं कमर्शियल फिल्मों के लिए उपयुक्त नहीं रहा हूं। यह मेरे करियर का सबसे बड़ा नकारात्मक पक्ष बन गया। मैंने बाद में कुछ टीवी शोज भी किए लेकिन जब भी मैं कुछ नया करता तो लोग मुझे नकार देते  और कहते कि अरे, रामजी क्या कर रहे हैं।'

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