सब जानते हैं कि पंजाब की युवा रगों में नशे का जहर तेजी से घुल रहा है। इसी सामाजिक मुद्दे को वायलेंटली उठाने वाली फिल्म 'उड़ता पंजाब' सेंसर बोर्ड के गले के नीचे नहीं उतर रही है। सेंसर बोर्ड के रुख और फैसले के चलते सियासी पारा भी गरम हो गया है। बोर्ड ने फिल्म को फूहड़ता और अश्लीलता के घेरे में पाया है। तर्क दिया है कि फिल्म में जरूरत से ज्यादा गालियों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं सत्ताधारी दल ने फिल्म को पंजाब की छवि बिगाड़ने वाला बताया तो विपक्षी पार्टियां इस बहाने सूबे की सरकार से लेकर मोदी सरकार तक को निशाने पर ले रही हैं।
उड़ता पंजाब के पहले इन फिल्मों पर भी खूब बरपा है विवाद
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वो फिल्में जिन पर गरमाई सियासत
परजानिया
साल 2007 में आई फिल्म परजानिया पर खूब सियासी बवाल हुआ। फिल्म 2002 के गुजरात दंगों की कड़वी सच्चाई बयां करती है। दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार हुआ था। जिसमें 69 लोगों को मारे गए थे। इसी बीच एक पारसी लड़का अजहर मोदी गुमशुदा हो गया था। उसी लड़के की कहानी को परदे पर उतारा गया था। फिल्म को राहुल ढोलकिया ने निर्देशित किया था। मुख्य किरदारों में सारिका और नसीरुद्दीन शाह थे। जज्बातों से भरी ये फिल्म बजरंग दल की आंखों में ऐसी खटकी कि गुजरात के एक भी सिनेमाघर में नहीं चलने दी। बाद में बवाल होता देख सिनेमाघर मालिकों ने खुद इस फिल्म से हाथ पीछे खींच लिए।
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फिराक
साल 2008 में आई 'फिराक' एक ऐसी फिल्म है जो गुजरात के गोधरा कांड के बाद की कहानी बयां करती है। लेकिन बदकिस्मती देखिए कि गुजरात में रिलीज तक नहीं हो सकी। ये फिल्म विदेशों में खूब चली और कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार बटोरे। फिल्म खास इसलिए भी थी कि अभिनेत्री नंदिता दास ने इस फिल्म के जरिए बतौर डायरेक्टर डेब्यु किया था। फिल्म में जबरदस्त स्टारकास्ट थी। नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल, रघुवीर यादव, दीप्ती नवल, संजय सूरी, सहाना गोस्वामी और टिस्का चोपड़ा जैसे मंझे हुआ कलाकारों ने बेहद मार्मिक फिल्म तैयार की थी। हालांकि बाद में कहा गया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स ने फिल्म के लिए पैसों की डिमांड इतनी ज्यादा कर दी कि बजट गड़बड़ा गया और फिल्म गुजरात में रिलीज नहीं हो सकी। जबकि फिल्म के विषय और इसकी सियासी वजह से सब वाकिफ हैं।
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ब्लैक फ्राइडे
साल 2007 में ही आई फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' पर बहुत बवाल हुआ। फिल्म की कहानी साल 1993 में हुए मुंबई धमाकों पर आधारित थी। निर्देशक अनुराग कश्यप ने हुसैन जैदी की किताब 'द ट्रू स्टोरी ऑफ द बॉम्बे बॉम्ब ब्लास्ट' से स्क्रिप्ट तैयार की थी। धमाकों और आतंकवाद पर बनी ये फिल्म इतनी विवादित रही कि सेंसर बोर्ड ने 2 साल के लिए इसकी रिलीज पर पाबंदी लगाई, लेकिन बाद में सेंसर बोर्ड ने कुछ सुधारों के साथ फिल्म को प्रदर्शित करने की हरी झंडी दे दी।
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आंधी
साल 1975 में गुलजार निर्देशित फिल्म 'आंधी' को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैन कर दिया था। फिल्म की कहानी इंदिरा गांधी की जिंदगी पर ही आधारित थी। उस दौरान देश में आपातकाल भी लगा था। ऐसे में इंदिरा गांधी नहीं चाहती थीं कि उनकी निजी जिंदगी के बारे में लोग फिल्म के जरिए जानें। आखिरकार सत्ता परिवर्तन के साथ ही साल 1977 में फिल्म रिलीज हुई और फिल्म ने बेस्ट मूवी अवॉर्ड भी अपने नाम किया। मुख्य भूमिका में सुचित्रा सेन और संजीव कुमार थे। फिल्म के गाने आज तक लोग गुनगुनाते हैं।