"किसे पता था एक कातिल चुड़ैल मेरे लिए रहमत का फरिश्ता बनकर आएगी" ये डायलॉग उस अजनबी शख्स की शान में जुबैदा तब बोलती है जब एक 'चुड़ैल' उसे अपने ही मां-बाप की कैद से छुड़ाने में मदद करती है। जब पर्दे के किरदारों का परिचय कातिल और चुड़ैल जैसे शब्दों से कराया जाए तो आप भी कश्मकश में पड़ जाएंगे कि आखिर ये कौन सी दुनिया के बाशिंदे हैं। ये दुनिया दरअसल बसती है कराची की बड़ी बड़ी कोठियों और छोटी-छोटी गलियों में। पाकिस्तान की इस वेब सीरीज का नाम है -चुड़ैल्स, जो जी-5 पर स्ट्रीम हो रही है और भारत में भी इस पर काफी चर्चा हो रही है। पर इस पाकिस्तानी वेब सीरीज में न कोई जादू टोना है न भूत प्रेत। ये कहानी है उन काल्पनिक औरतों की जिन्हें असल जिंदगी में आप शायद रोज मिलते या देखते होंगे पर उनकी असल कहानी से वाकिफ होकर भी अंजान ही रहते हैं। कहानी में किरदार खुद को कुछ इस अंदाज में इंट्रोड्यूस करते हैं- "एक वकील,एक कातिल, एक वेडिंग प्लानर और एक बॉक्सर मिल बैठे और उन्हें एहसास हुआ कि अब तक वो सिर्फ पुतले बन कर जी रहे थे। पुतले जो आप ही की इज्जत के लिए आप ही की इज्जत में लिपटे रहते हैं।"
पाकिस्तान की इन 'चुड़ैल्स' अभिनेत्रियों ने मचाया भारत में धमाल, हो रही है खूब चर्चा
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इस कहानी की खास बात ये है कि ये ऐसी औरतों की कहानी है जो अपना हक मांगना जानती हैं, न मिले तो छीन लेना चाहती हैं, बात न बने तो साम-दाम-दंड-भेद कुछ भी अपना सकती हैं और ये सब मर्दाना नजरिए से नहीं, बल्कि एक औरत के नजरिए से ही बताया हुआ लगता है। सीरीज के निर्देशक आसिम अब्बासी ब्रिटिश पाकिस्तानी हैं। जब मैंने ये सवाल उनसे पूछा तो मानो खुद पर ही हंसते हुए उन्होंने जवाब दिया,"मेरे लिए चैलेंज था कि मैं औरतों की कहानी औरत की नजर से ही दिखा सकूं। ये एक तरह से खौफनाक तजुर्बा भी था। क्योंकि हूं तो मैं भी मर्द ही।'' ''दो साल तक मुझे हमेशा ये डर लगता रहता कि कहीं गलती से मेरी पुरुषों वाली मानसिकता हावी न हो जाए। इसलिए मैं जो भी लिखता अपनी एसिसटेंट डायरेक्टर्स को दिखाता था क्योंकि वो ज्यादातर औरतें थीं।" चुड़ैल्स और इसमें जुड़े मुद्दों को समझने के लिए इसके किरदारों की दुनिया को समझना भी जरूरी है। परत दर परत जैसे जैसे चुड़ैल्स के किरदारों की तह खुलती है, आप किरदारों के साथ-साथ अपने ही समाज की नई-नई हकीकतो से रूबरू होते हैं। यहां पहली चुड़ैल है सारा (सरवत गिलानी) जो बेहद अमीर आदमी की पढ़ी लिखी बीवी है और बच्चों और पति की देख-रेख में मसरूफ रहती है।
एक दिन सारा को लगता है कि उसे अपनी वकालत दोबारा शुरू करनी चाहिए पर पति जमील बहुत आसानी से कह देता है - "तुम्हारे काम को जंग लग चुका है। तुम्हे कौन काम देगा। कमी किस बात की वैसे.. मैं हूं ना" सारा कहती है, "हां लेकिन आजकल मैं थोड़ी कम हूं"। इस एक संवाद में आप सारा का ही नहीं उस जैसी तमाम औरतों का खालीपन महसूस कर सकते हैं जिनपर 'नौकरी करने की क्यों जरूरत है जब पति काम रहा है' की दलील पेश की जाती है, बगैर ये समझे कि काम करना हर औरत के लिए केवल पैसे कमाने के लिए लिया गया फैसला नहीं होता। दूसरी चुड़ैल है सारा की दोस्त जुगनू चौधरी (यसरा रिजवी)- वो भी संभ्रात, अमीर परिवार की सिंगल लड़की है जिसे घरवालों ने नकार दिया क्योंकि उसने एक काले शख्स से शादी की और ये रंग का भेद उनकी शादी तोड़कर ही टूटा। बिंदास जुगनू समाज की उन औरतों का प्रतिनिधित्व करती है जो बंधनों को नहीं मानती लेकिन कुछ अनकहे किस्से हैं जीवन के जिनका बोझ लेकर वो जीती हैं।
तीसरी चुड़ैल जुबैदा (मेहर बानो) हैं जिसे मोहम्मद अली बनना है और जो कहती है कि "जब मैंने हाथों में ग्लव्स पहने होते हैं और मैं मुक्के पे मुक्का मार रही होती हूं तो ऐसा लगता है जैसे मेरी जान में जान आ गई हो।" पर उसका घर जहन्नुम से कम नहीं। ऐसा घर जहां लड़की को अपनी मर्जी से कुछ करने की आजादी नहीं। एक लड़के से दोस्ती करने और लड़की होते हुए बॉक्सिंग का शौक पालने की सजा के तौर पर जुबैदा को मां-बाप ने घर में कैद कर लिया है।अपने आस-पास ऐसी जुबैदा शायद देखी ही होगी आपने। चौथी चुड़ैल वो है जिसके बारे में पड़ोसियों की राय है, "हमारी बिल्डिंग में चोर और चरसी काफी नहीं थे जो पड़ोस में कातिल भी आ गई। चुड़ैल कहीं की।" बतूलल का किरदार निभाने वाली पाकिस्तानी अभिनेत्री निमरा बूचा बताती हैं,"आम तौर पर औरतों को टीवी या फिल्मी पर्दे पर इस तरह दिखाया जाता है कि दुनिया के लिए उसे हजम करना आसान हो जाए। मतलब औरत या तो बेचारी है या फिर एक आदमी ही उससे मोहब्बत करके उसको बचा सकता है।"
"या फिर वो एक ऐसी औरत है जो दूसरी औरत की पीठ में छुरी घोंप रही है। वो सास हो, ननद हो या फिर सहेली। बस यही दिखाते हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन है। जबकि असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता। बस ये एक ट्रेंड है। और आपको डर लगने लगता है कि हम कुछ अलग करेंगे तो लोगों को शायद पसंद न आए। लेकिन चुड़ैल्स के किरदार बहुत रियल और मजेदार थे।" बतूल ऐसी औरत है जो 20 साल जेल में काट कर आई है- जुर्म ये कि पति का कत्ल किया। वजह ये कि पति न सिर्फ उसके साथ ज्यादती करता था बल्कि छोटी सी सात-आठ साल की बेटी के साथ भी शारीरिक दुराचार। चुड़ैल्स के एक पुलिसवाले की जबान में बोलें तो, "उसकी मर्दानगी को इस्तरी से जलाकर उसकी सारी गर्मी निकाल दी थी। फिर उसी इस्तरी से उसका सर भी फाड़ डाला था।" बलात्कार, बच्चियों का यौन शोषण, घरेलू हिंसा ये सारे मुद्दे इस वेब सीरीज में एक-एक कर उभरते हैं। यानी कहानी भले ही कराची की है लेकिन आप चाहें तो कराची को हटाकर वहां मुंबई कर सकते हैं।