प्राचीन मिस्त्र के कई रहस्य हैं, लेकिन वहां की ब्यूटी ट्रिक्स को किसी से नहीं छुपी हैं। लोगों को लगता है कि अरबों डॉलर के उद्योग में विकसित हो चुकी मेकअप इंडस्ट्री आधुनिक जमाने की देन है, लेकिन ऐसा नहीं है। प्राचीन समय में भी मेकअप प्रोडक्ट्स लोगों की जिंदगी में इतने ही महत्वपूर्ण हुआ करते थे। मिस्र के साम्राज्य के शुरुआती काल में पुरुषों और महिलाओं दोनों मेकअप में आईलाइनर, आईशैडो, लिपस्टिक और रूज लगाया करते थे।
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प्राचीन मिस्त्र के लोग मेकअप का इस्तेमाल सिर्फ सुंदरता को बढ़ाने के लिए नहीं करते बल्कि उनमें ये रिवाज के तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा ये लोग अपनी सुंदरता दिनचर्या को बेहद गंभीरता से लेते हैं। सबसे परिष्कृत सौंदर्य अनुष्ठान मिस्त्र की अमीर महिलाओं के शौचालय से ही सामने आए हैं।
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मध्य साम्राज्य (2030-1650 ई.पू.) के दौरान रहने वाली महिलाएं कोई भी मेकअप लगाने से पहले उसके लिए अपनी स्किन को तैयार किया करती थी। वे त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए दूध में डेड सी साल्ट मिलाकर स्नान किया करती थी। इसके अलावा चेहरे पर दूध और शहद का मास्क सबसे लोकप्रिय उपचार था।
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वे अपने अंडरआर्म्स में डियोड्रेंट की जगह अगरबत्ती का इस्तेमाल किया करती थी। अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए फूलों और मसालों से निकाले गए तेल को लगाया करती थी। इन्होंने ही शहद और चीनी के मिश्रण से वैक्सिंग करने की तरकीब का आविष्कार किया था। आज जिसे ब्यूटी कंपनी हॉट वैक्स के नाम से बेचा करती हैं।
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इस सब के बाद मेकअप से जुड़ी सभी सामग्रियों को रखने के लिए जिन जार का इस्तेमाल किया जाता था वो अपने आप में काफी लेविश हुआ करते थे। परफ्यूम से लेकर आई पेंट को रखने के लिए कीमती पत्थर, कांच और सोने का इस्तेमाल कर जार बनाए जाते थे। कोहल और आईशैडो को तैयार करने के लिए सिल्टस्टोन पैलेट को क्रश किया जाता था।