बात 25 जून 1975 की है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष अरुण जेटली अपने नारायणा वाले घर के आंगन में सोए हुए थे। बाहर कुछ आवाज़ हुई तो वो जाग गए। उन्होंने देखा कि उनके पिता कुछ पुलिसवालों से बहस कर रहे थे। ये पुलिस वाले उन्हें गिरफ्तार करने आए थे। ये देखते ही अरुण अपने घर के पिछले दरवाजे से बाहर निकल आए। वो रात उन्होंने उसी मोहल्ले में अपने दोस्त के यहां बिताई। अगले दिन उन्होंने सुबह साढ़े दस बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 200 छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के दफ्तर के सामने जमा किया।
लग्जरी घड़ियों के शौकीन थे अरुण जेटली, कॉलेज के दिनों में लंबे बालों में दिखते थे ऐसे
जेटली के एक करीबी दोस्त अनिप सचदे बताते हैं, 'अरुण जेटली का राजनीतिक 'बपतिस्मा' विश्वविद्यालय कैंपस में न होकर तिहाड़ जेल की कोठरी में हुआ था। रिहा होते ही उन्हें इस बात का अंदाज़ा हो गया कि अब राजनीति उनका करियर होने जा रहा है।'
अरुण जेटली ने अपनी पढ़ाई दिल्ली के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल और मशहूर कॉलेज श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से की। उस ज़माने में जेटली के बाल लंबे हुआ करते थे और वो 'बीटल्स' वाले जॉन लेनन के अंदाज़ में नज़र का चश्मा पहनते थे। उनके चश्मे के शीशे की बनावट गोल हुआ करती थी। कुछ लोग उसे 'गांधी गॉगल्स' कह कर भी पुकारते थे।
मशहूर किताब 'द मैरीगोल्ड स्टोरी' लिखने वालीं कुमकुम चड्ढा ने बताया कि जेटली के कॉलेज की एक दोस्त बीना कहती हैं, 'अरुण की शक्ल ठीकठाक हुआ करती थी। लड़कियां उनको नोटिस करती थीं लेकिन अरुण उन्हें घास नहीं डालते थे, क्योंकि वो बहुत शर्मीले थे। स्टेज पर तो वो घंटों बोल सकते थे लेकिन स्टेज से उतरते ही वो एक 'शेल' में चले जाते थे। मैं नहीं समझती कि उन दिनों वो किसी लड़की को 'डेट' पर ले गए हों।'
अरुण जेटली के सबसे करीबी दोस्त मशहूर वकील रेयान करंजावाला बताते हैं, 'अरुण जेटली को फिल्में देखने का बहुत शौक था। 'पड़ोसन' उनकी फेवरेट फिल्म थी जिसे उन्होंने बहुत बार देखा था। मैंने अरुण को कई बार फिल्मों के डायलॉग बोलते सुना है। 'जॉनी मेरा नाम' में देवानंद ने किस रंग की कमीज़ पहन रखी थी, ये तक अरुण जेटली को याद रहता था।'
वाजपेयी चाहते थे उन्हें 1977 का चुनाव लड़ाना
लेखिका कुमकुम चड्ढा बताती हैं, जब 1977 में जनता पार्टी बनी तो जेटली को उसकी राष्ट्रीय कार्य समिति में रखा गया। वाजपेयी उन्हें 1977 का लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन उनकी उम्र चुनाव लड़ने की न्यूनतम सीमा से एक साल कम थी। वैसे भी जेल में रहने के कारण उनका पढ़ाई का एक साल ख़राब हो गया था। इसलिए उन्होंने अपनी क़ानून की डिग्री पूरी करने का फ़ैसला किया।
नाचना न जानते हुए भी डिस्कोथेक जाते थे जेटली
छात्र राजनीति में आने से पहले अरुण और उनके दोस्त दिल्ली के एकमात्र डिस्कोथेक 'सेलर' में जाया करते थे। कुमकुम चड्ढा बताती हैं, "उनकी दोस्त बीना ने मुझे बताया था कि उनका डिस्कोथेक जाना नाम भर का ही होता था, क्योंकि उन्हें नाचना बिल्कुल नहीं आता था। उन्हें ड्राइविंग करना भी कभी नहीं आया। जब तक उनकी ड्राइवर रखने की हैसियत नहीं हुई, उनकी पत्नी संगीता ही उनकी कार चलाती थीं।'
दिलचस्प बात ये है कि अरुण जेटली की शादी संगीता डोगरा से हुई जो कांग्रेस के बड़े नेता गिरधारी लाल डोगरा की बेटी हैं जो दो बार जम्मू से सांसद और जम्मू कश्मीर सरकार में भी मंत्री रहे थे।
इनकी शादी में अटलबिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी दोनों शामिल हुए थे। अरुण जेटली अपने जमाने में भारत के चोटी के वकील थे जिनकी बहुत मंहगी फीस हुआ करती थी। उनको महंगी घड़ियां खरीदने का हमेशा शौक रहा। उन्होंने उस समय 'पैटेक फिलिप' घड़ी खरीदी थी जब ज्यादातर भारतीय 'ओमेगा' के आगे सोच नहीं पाते थे।
अरुण का 'मो ब्लां' पेनों और जामवार शॉलों का संग्रह भी गजब का है। 'मो ब्लां' कलम का नया एडिशन सबसे पहले खरीदने वालों में अरुण जेटली हुआ करते थे।

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