क्यों आज भी चुनौती है साड़ी पहनना? जानिए साड़ी की दुनिया की रोचक बातें
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क्या होती है साड़ी
साड़ी दुनिया की सबसे लंबे और पुराने परिधानों में से एक है। यह आदिकाल से भारतीयता की पहचान भी है। इसकी लंबाई सभी परिधानों से ज्यादा है। साड़ी के बॉर्डर और पल्लू पर थोड़ी बहुत कढ़ाई (एंब्रॉयडरी) देखी जा सकती है। पल्लू पर भारी-भरकम कारीगरी होने की वजह से महिलाएं इसे बदन पर आसानी से लपेट पाती हैं। वैसे तो बाजार में कॉटन, सिल्क और सिंथेटिक फाइबर से बनी साड़ियां ही लोगों की पहली पसंद होती हैं, लेकिन 700 रुपये से कम में मिलने वाली ज्यादातर साड़ियां पॉलिस्टर की होती हैं, जिसे शरीर के लिए सही नहीं माना जाता।
साड़ी बांधने का तरीका
साड़ी बांधने की कला को ड्रेपिंग कहा जाता है। आपने महिलाओं को सिर्फ एक तरह से साड़ी बांधते देखा होगा, जबकि साड़ी बांधने के 100 से भी ज्यादा तरीके हैं। आमतौर साड़ी बांधने का जो तरीका महिलाओं द्वारा अपनाया जाता है, उसे निवी ड्रेप कहते हैं।
साड़ी की लंबाई
वैसे तो एक साड़ी की औसत लंबाई 3.5 गज से 9 गज तक होती है, लेकिन इसे बांधने के विभिन्न तरीकों पर भी निर्भर करता है कि इसके एक टुकड़े की लंबाई कितनी होनी चाहिए. इसलिए यह 9 गज से ज्यादा भी हो सकती है।
साड़ी पहनने का आलस
यह बात सही है कि ज्यादातर महिलाओं को साड़ी पहनना रॉकेट लॉन्च करने से भी मुश्किल काम लगता है। जबकि ऐसी कई महिलाएं हैं जिनके वॉर्डरॉब में साड़ी के अलावा कोई दूसरा विशेष परिधान नजर ही नहीं आता। वे रोजाना सिर्फ साड़ी कैरी करना ही पसंद करती हैं। एक सर्वे में पता चला कि भारत में करीब 95 प्रतिशत महिलाएं किसी दूसरी महिला से साड़ी पहनना ज्यादा बेहतर विकल्प समझती हैं।