Union Budget 2026: इस खास फैब्रिक की साड़ी पहनकर बजट पेश करने पहुंची वित्त मंत्री, सदियों पुराना है इतिहास
History and Significance of Kanjivaram Saree: आज वित्त मंत्री संसद में कांजीवरम सिल्क फैब्रिक की साड़ी पहनकर पहुंची हैं। इस साड़ी की क्या खासियत है, हम यहां इसी बारे में बात करेंगे।
कांजीवरम सिल्क साड़ी कहां बनती है?
- कांजीवरम सिल्क साड़ियां तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनाई जाती हैं
- इसकी शुरुआत लगभग 400 से 500 साल पहले हुई, जब आंध्र प्रदेश से आए बुनकर समुदाय देवांग और सालिगर कांचीपुरम में बस गए।
- इन्हीं बुनकरों ने मंदिर वास्तुकला और पौराणिक कथाओं से प्रेरित डिजाइनों को साड़ियों में उतारना शुरू किया था।
- ये शहर सदियों से रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है
- इसे बनाने में हमेशा शुद्ध मल्बरी सिल्क और असली जरी का इस्तेमाल होता है
- इस तरह की साड़ी को बनाने में हमेशा मोटा, मजबूत और बेहद टिकाऊ कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है
- इसका चमकदार रंग और पारंपरिक मंदिर-प्रेरित डिजाइन आकर्षण का केंद्र होती हैं
- इसका लुक काफी एलिगेंट और प्रोफेशनल होता है
- एक साड़ी तैयार होने में 15 दिन से लेकर 2 महीने तक का समय लग जाता है।
- इसकी वजह है कि ये साड़ी पूरी तरह हाथ से बुनी जाती है
- कई-कई दिन तक कारीगरों का समूह मिलकर एक साड़ी तैयार करते हैं
हमेशा हैंडलूम की साड़ियां क्यों पहनती हैं वित्त मंत्री ?
निर्मला सीतारमण इस तरह की पारंपरिक और हैंडलूम साड़ियां पहनने के पीछे कई अहम कारण हैं, जो उनकी सोच और सार्वजनिक छवि को दर्शाते हैं। दरअसल, वो अपने पहनावे के ज़रिये भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक वस्त्रों को सम्मान देती हैं।
खास मौकों पर हैंडलूम साड़ियां पहनकर वो स्थानीय बुनकरों और कारीगरों के काम को राष्ट्रीय पहचान दिलाती हैं। उनका पहनावा आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करता है। ऐसा माना जाता है कि उनके लिए पहनावा फैशन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने का माध्यम है। इसी वजह से बजट जैसे राष्ट्रीय महत्व के मंच पर उनका पारंपरिक साड़ी लुक हर साल चर्चा का विषय बन जाता है।
