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World Saree Day 2024: क्या है कांजीवरम और बनारसी साड़ी में अंतर ? खरीदने से पहले जान लें

Sat, 21 Dec 2024 10:10 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Sat, 21 Dec 2024 10:10 AM IST
सार

कांजीवरम और बनारसी साड़ियां भारत की दो प्रसिद्ध और पारंपरिक साड़ियां हैं, जो अपनी विशिष्टता और पहचान के लिए जानी जाती हैं। आप भी इनके बीच के प्रमुख अंतर को जरूर जानें।

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world saree day 2024 know the Difference Between Kanjeevaram And Banarasi saree
क्या है कांजीवरम और बनारसी साड़ी में अंतर ? - फोटो : अमर उजाला

World Saree Day 2024: हर साल वर्ल्ड साड़ी डे 21 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय परिधान साड़ी को वैश्विक पहचान दिलाने और उसकी खूबसूरती, विविधता, और सांस्कृतिक महत्व का जश्न मनाने के लिए समर्पित है। वर्ल्ड साड़ी डे का मुख्य मकसद है साड़ी की अद्वितीयता और विविधता का जश्न मनाना और इस परिधान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना। यह दिन महिलाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और परंपराओं को गर्व से अपनाने का मौका देता है।



जब भी बात साड़ियों की होती है तो हर कोई बनारसी और कांजीवरम साड़ी का जिक्र अवश्य करता है। ये दोनों ही साड़ियां महिलाओं को न सिर्फ खूबसूरत दिखने में मदद करती हैं, बल्कि इसकी वजह से उनका अंदाज काफी हटकर भी लगता है। अक्सर लोग इन दोनों साड़ियों में फर्क नहीं कर पाते। ऐसे में हम वर्ल्ड साड़ी डे के दिन आपको इन दोनों साड़ियों में अंतर बताने जा रहे हैं, ताकि आप भी खरीदते समय धोखा न खाएं। 

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कांजीवरम साड़ी - फोटो : Instagram

कांजीवरम साड़ी 
  
कांजीवरम साड़ी अपने आप में ही काफी खूबसूरत और रॉयल दिखने वाला परिधान है। इसे मूलरूप से तमिलनाडु के कांजीवरम (कांचीपुरम) क्षेत्र में तैयार किया जाता है। इस साड़ी को शुद्ध रेशमी कपड़े पर तैयार किया जाता है।

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कांजीवरम साड़ी - फोटो : instagram

बात करें इस साड़ी की डिजाइन की तो ये साड़ियां काफी भारी होती हैं और इनका बॉर्डर भी काफी भारी होता है, क्योंकि उसपर सोने-चांदी का काम होता है। इन साड़ियों में मंदिर, फूल, पशु-पक्षियों (जैसे मोर, हंस) की पारंपरिक आकृतियां बनी होती हैं। कांजीवरम साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को अलग-अलग बुनकर बाद में जोड़ा जाता है, जिससे एक स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।  

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बनारसी साड़ी - फोटो : instagram
बनारसी साड़ी

शादियों मेें नई दुल्हनें ज्यादातर बनारसी साड़ी पहनना पसंद करती हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) क्षेत्र में बनाई जाती हैं। इन साड़ियों को शुद्ध रेशम के साथ-साथ कटक या शिफॉन फैब्रिक पर भी तैयार किया जाता है। इसकी डिजाइन काफी बारीक होती है।
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बनारसी साड़ी - फोटो : instagram

ज्यादातर बनारसी साड़ियों पर मुगल कला से प्रेरित डिज़ाइन जैसे बेल-बूटे, फूल-पत्ते, जाली और जटिल रूपांकन देखने को मिलता है। इसके साथ-साथ इन पर जरी और मीना का काम अधिक होता है। बनारसी साड़ियां आपको पारंपरिक और विविध रंगों में उपलब्ध हो जाती हैं। इस पूरी साड़ी पर भारी बुनाई होती है, जिससे यह भव्य और शाही दिखती है।  

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