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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: शर्मिला धनखड़ के गोल्ड पर बेटियों को गर्व, बोलीं- अब हमारी बारी, देश के लिए जीतेंगे मेडल

Tue, 28 Jul 2026 09:59 PM IST
मयूर शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Published by: मयूर शर्मा Updated Tue, 28 Jul 2026 09:59 PM IST
सार

दोनों बेटियों ने कहा कि उनकी मां हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती हैं। मां के संघर्ष और सफलता ने उन्हें नई ताकत दी है। अब उनका भी सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें।

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Commonwealth Games 2026 Daughters proud of Sharmila Dhankhar gold say Now its our turn we will win medals
शर्मिला धनखड़ के गोल्ड मेडल जीतने पर बेटियों को गर्व - फोटो : संवाद
कॉमनवेल्थ पैरा खेलों की महिला एफ-57 शॉटपुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन करने वाली शर्मिला धनखड़ की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरा परिवार खुशी से झूम उठा है। उनकी दोनों बेटियों ने मां की सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि यह जीत वर्षों के संघर्ष, मेहनत और अटूट हौसले का परिणाम है। बड़ी बेटी अनुज जैवलिन थ्रो की खिलाड़ी हैं और छोटी बेटी लक्ष्मी लॉन्ग जंप में अपना भविष्य संवारने के लिए लगातार अभ्यास कर रही हैं। अनुज ने कहा कि उनकी मां ने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया है।
Commonwealth Games 2026 Daughters proud of Sharmila Dhankhar gold say Now its our turn we will win medals
शर्मिला धनखड़ की बेटियां अनुज और लक्ष्मी - फोटो : संवाद
मां के संघर्ष और सफलता ने नई ताकत दी

दोनों बेटियों ने कहा कि उनकी मां हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती हैं। मां के संघर्ष और सफलता ने उन्हें नई ताकत दी है। अब उनका भी सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें। मां की तरह दोनों बेटियां भी गोल्ड मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ लगातार संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि मां ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर यह मुकाम हासिल किया है और अब वे भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए देश के लिए पदक जीतने का सपना साकार करेंगी।

मां की तरह मेहनत और समर्पण से अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगी

अनुज और लक्ष्मी ने विश्वास जताया कि जिस तरह उनकी मां ने संघर्षों को पीछे छोड़कर इतिहास रचा, उसी तरह वे भी कड़ी मेहनत और समर्पण से अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगी। बेटियों ने कहा कि मां की यह उपलब्धि उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है और वे भी एक दिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा लहराकर भारत का गौरव बढ़ाएंगी।
Commonwealth Games 2026 Daughters proud of Sharmila Dhankhar gold say Now its our turn we will win medals
मां के गोल्ड मेडल जीतने पर पिता अजीत का मुंह मीठा करवाती हुई दोनों बेटियां - फोटो : संवाद
26 वर्ष की उम्र में पहली शादी टूटी, दो साल बाद अजीत से हुआ दूसरा विवाह

शर्मिला का जीवन परेशानियों से भरा रहा। परिवार ने कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी लेकिन 26 वर्ष की उम्र में पहले पति ने छोड़ दिया। उस समय उनकी दो बेटियां थीं। दोनों बेटियों के साथ वह मायके लौट आईं। बाद में 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। एक समाचार पत्र में पैरा खिलाड़ियों की सफलता की खबर पढ़ने के बाद अजीत ने ही शर्मिला को पैरा एथलेटिक्स में कॅरिअर बनाने के लिए प्रेरित किया।

रोडवेज की नौकरी मिली, फिर छिन गई

इससे पहले साल 2018 में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान शर्मिला को प्रदेश की पहली महिला कंडक्टर के रूप में अस्थायी नौकरी मिली। नौकरी मिलने पर उन्हें खूब बधाइयां मिलीं, लेकिन हड़ताल समाप्त होते ही नौकरी भी चली गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने तय किया कि अब ऐसा मुकाम हासिल करेंगी जिसे कोई उनसे छीन न सके।
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