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Rewari News: शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड

Tue, 28 Jul 2026 04:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 28 Jul 2026 04:35 PM IST
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Sharmila Dhankhar won gold at the Commonwealth Games.
शर्मिला धनखड़
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला पैरा शॉट पुट (एफ-57) स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
शर्मिला ने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि केवल खेल की जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, कठिनाइयों और अटूट हौसले की मिसाल भी है। शर्मिला मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव की रहने वाली हैं और वर्तमान में रेवाड़ी में रहकर अभ्यास कर रही हैं। महज दो वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया।
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शर्मिला के पिता छोटे किसान हैं, जबकि उनकी मां दृष्टिबाधित हैं। सीमित संसाधनों के कारण उनका समुचित इलाज भी नहीं हो सका। जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद 34 वर्ष की उम्र में उन्होंने रेवाड़ी में कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में एफ-57 वर्ग की सीटेड शॉट पुट स्पर्धा की ट्रेनिंग शुरू की।
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आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि वर्ष 2023 में अभ्यास और प्रतियोगिताओं का खर्च जुटाने के लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। इसके बाद परिवार किराये के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। साल 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला चौथे स्थान पर रहीं। हालांकि उन्होंने हार से निराश होने के बजाय अपनी मेहनत जारी रखी। लगातार अभ्यास और बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया।
शर्मिला की दोनों बेटियां भी खेलों में अपना भविष्य संवार रही हैं। बड़ी बेटी अनुज जेवलिन थ्रो की राज्य स्तरीय खिलाड़ी हैं, जबकि छोटी बेटी लक्ष्मी लंबी कूद की राज्य स्तरीय खिलाड़ी हैं। मां की यह उपलब्धि दोनों बेटियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।
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जीवन में आए कई कठिन मोड़
कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई लेकिन 26 वर्ष की उम्र में पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया। उस समय उनकी दो बेटियां थीं। दोनों बेटियों के साथ वह मायके लौट आईं। बाद में 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। एक समाचार पत्र में पैरा खिलाड़ियों की सफलता की खबर पढ़ने के बाद अजीत ने ही शर्मिला को पैरा एथलेटिक्स में कॅरिअर बनाने के लिए प्रेरित किया।

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रोडवेज की नौकरी मिली, फिर छिन गई :
साल 2018 में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान शर्मिला को प्रदेश की पहली महिला कंडक्टर के रूप में अस्थायी नौकरी मिली। नौकरी मिलने पर उन्हें खूब बधाइयां मिलीं, लेकिन हड़ताल समाप्त होते ही नौकरी भी चली गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने तय किया कि अब ऐसा मुकाम हासिल करेंगी जिसे कोई उनसे छीन न सके।
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