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बड़ा सवाल: आखिर किसने जलाई पूर्व वित्तमंत्री की कोठी? 19 और 20 फरवरी 2016 को हुई थी शहर में सबसे ज्यादा हिंसा
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 28 Feb 2026 12:28 PM IST
सार
साल 2016 में जाट आरक्षण हिंसा के दौरान रोहतक में हरियाणा के तत्कालीन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 56 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। सीबीआई की पंचकूला अदालत में 60 लोगों के खिलाफ विस्तृत जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
जाट आरक्षण आंदोलन में 19 और 20 फरवरी 2016 को शहर में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी। दो दिनों तक शहर पूरी तरह बंधक था। उपद्रवियों ने दुकानें और आशियाने ही नहीं शहर का अमन, चैन भी जलाकर राख कर दिया था।
उपद्रवियों ने पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की सेक्टर-14 स्थित कोठी भी आग के हवाले कर दी थी। 10 साल तक चली मुकदमों की सुनवाई के बाद शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अब सवाल उठता है कि अगर सभी आरोपी निर्दोष थे तो कैप्टन की कोठी में आग किसने लगाई थी?
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
जाट आरक्षण हिंसा का जिक्र आते ही जलते रोहतक की तस्वीरें आंखों के सामने उभर आती हैं। आरक्षण की मांग को लेकर 10 साल पहले रोहतक से आंदोलन ने जोर पकड़ा था। सांपला में रैली के बाद आंदोलन तेजी से भड़का। 16 फरवरी तक शहर के चारों तरफ के रास्तों पर भीड़ जमा हो गई।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी
- फोटो : फाइल फोटो
अगले दो दिन शहर में हालात कर्फ्यू जैसे हो गए। एमडीयू से लेकर छोटूराम चौक तक जाम की स्थिति बन गई थी। 19 फरवरी को भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया। रोहतक के अलावा झज्जर में सेना बुलानी पड़ी। दोपहर बाद भीड़ ने पूर्व वित्तमंत्री की कोठी में आग लगा दी।
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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
- फोटो : सर्वखाप पंचायत
भीड़ में कौन लोग शामिल थे? किसने शहर को जलाया? ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब शायद ही मिले। वजह, पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन की कोठी जलाने के केस की तरह ज्यादातर मामलों में आरोपी बरी हो चुके हैं।
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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
- फोटो : फाइल फोटो
20 फरवरी को कर्फ्यू भी हो गया बेअसर
रोहतक में हिंसा रोकने के लिए लगाया गया कर्फ्यू 20 फरवरी को बेअसर हो गया था। हालात संभालने के लिए शहर में सेना तक उतर आई थी लेकिन उपद्रवी किसी के काबू में नहीं आए थे। सड़कों पर अन्य दिनों के मुकाबले उपद्रवियों और सामान्य लोगों की भारी भीड़ उमड़ आई थी। हालात ऐसे बन आए थे कि सेना को भी बैकफुट पर जाना पड़ा था।
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