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सिरसा: मेजर कर्मजीत कौर ने 47 हजार किलोमीटर समुद्र नापकर लहराया तिरंगा, रचा इतिहास; गांव में हुआ जोरदार स्वागत
Sat, 08 Aug 2026 10:28 PM IST
मयूर शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Published by: मयूर शर्मा
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:28 PM IST
सार
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि अभियान की शुरुआत 11 सितंबर 2025 को मुंबई से हुई थी। यह विश्व का पहला ऐसा समुद्री परिक्रमा अभियान था जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना की वर्दीधारी महिला अधिकारी एक साथ शामिल हुईं।
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मेजर कर्मजीत कौर
- फोटो : संवाद
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हौसले बुलंद हों तो समुद्र की लहरें भी रास्ता छोड़ देती हैं। सिरसा की बेटी मेजर कर्मजीत कौर ने ऐसा ही जज्बा दिखाते हुए दुनिया के पहले समुद्र प्रदक्षिणा अभियान (भारत का पहला तीनों सेनाओं का सर्व-महिला वैश्विक नौकायन अभियान) को सफलतापूर्वक पूरा कर देश व सिरसा का नाम रोशन किया है।
गांव कंगनपुर पहुंचीं मेजर कर्मजीत कौर का हुआ भव्य स्वागत
- फोटो : संवाद
मेजर कर्मजीत कौर का हुआ भव्य स्वागत
अभियान की सफलता के बाद शनिवार को सिरसा के गांव कंगनपुर पहुंचीं मेजर कर्मजीत कौर का ग्रामीणों व परिजनों ने ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। परिजनों ने बेटी का मुंह मीठा करवाकर उसकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताई।
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि अभियान की शुरुआत 11 सितंबर 2025 को मुंबई से हुई थी। यह विश्व का पहला ऐसा समुद्री परिक्रमा अभियान था जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना की वर्दीधारी महिला अधिकारी एक साथ शामिल हुईं।
314 दिन तक किया समुद्र का सफर
314 दिन के सफर में टीम ने दुनिया के चार प्रमुख महासागर को पार किया। इस दौरान भूमध्य रेखा को दो बार पार किया गया और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को भी लांघा गया। टीम ने केप ऑफ गुड होप, केप लीउविन और केप हॉर्न जैसे तीन प्रमुख अंतरीपों का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। इस उपलब्धि के बाद टीम की महिला अधिकारी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय केप हॉर्नर्स बिरादरी का हिस्सा बन गईं।
कभी तकनीकी खराबी, कभी जान पर बनी, फिर भी नहीं मानी हार
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि पूरा अभियान 50 फीट लंबे आईएएसवी त्रिवेणी पोत पर पूरा किया गया। भारत में डिजाइन और निर्मित यह पोत आत्मनिर्भर भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण है। समुद्र में सफर के दौरान कई बार पोत में तकनीकी खराबियां आईं। कई मौकों पर समुद्र की परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण रहीं कि जान पर भी बन आई। इसके बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं हारी। हर मुश्किल का सामना करते हुए महिला अधिकारियों ने अपने मिशन को जारी रखा और आखिरकार तिरंगा लहराते हुए सफलतापूर्वक वापसी की।
पति भी मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर
मेजर कर्मजीत कौर के पति कोमलप्रीत सिंह मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर हैं। इससे पहले भी कर्मजीत इसी प्रकार की हवा से चलने वाली बोट पर एक मिशन पूरा कर चुकी हैं। उस समय परिवार को उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी लेकिन उनके हौसले को देखते हुए पिता रिछपाल सिंह रंधावा, माता, भाई और पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया। कर्मजीत ने कहा कि परिवार के सहयोग और टीम के सदस्यों के मजबूत हौसले ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।
अभियान की सफलता के बाद शनिवार को सिरसा के गांव कंगनपुर पहुंचीं मेजर कर्मजीत कौर का ग्रामीणों व परिजनों ने ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। परिजनों ने बेटी का मुंह मीठा करवाकर उसकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताई।
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि अभियान की शुरुआत 11 सितंबर 2025 को मुंबई से हुई थी। यह विश्व का पहला ऐसा समुद्री परिक्रमा अभियान था जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना की वर्दीधारी महिला अधिकारी एक साथ शामिल हुईं।
314 दिन तक किया समुद्र का सफर
314 दिन के सफर में टीम ने दुनिया के चार प्रमुख महासागर को पार किया। इस दौरान भूमध्य रेखा को दो बार पार किया गया और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को भी लांघा गया। टीम ने केप ऑफ गुड होप, केप लीउविन और केप हॉर्न जैसे तीन प्रमुख अंतरीपों का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। इस उपलब्धि के बाद टीम की महिला अधिकारी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय केप हॉर्नर्स बिरादरी का हिस्सा बन गईं।
कभी तकनीकी खराबी, कभी जान पर बनी, फिर भी नहीं मानी हार
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि पूरा अभियान 50 फीट लंबे आईएएसवी त्रिवेणी पोत पर पूरा किया गया। भारत में डिजाइन और निर्मित यह पोत आत्मनिर्भर भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण है। समुद्र में सफर के दौरान कई बार पोत में तकनीकी खराबियां आईं। कई मौकों पर समुद्र की परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण रहीं कि जान पर भी बन आई। इसके बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं हारी। हर मुश्किल का सामना करते हुए महिला अधिकारियों ने अपने मिशन को जारी रखा और आखिरकार तिरंगा लहराते हुए सफलतापूर्वक वापसी की।
पति भी मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर
मेजर कर्मजीत कौर के पति कोमलप्रीत सिंह मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर हैं। इससे पहले भी कर्मजीत इसी प्रकार की हवा से चलने वाली बोट पर एक मिशन पूरा कर चुकी हैं। उस समय परिवार को उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी लेकिन उनके हौसले को देखते हुए पिता रिछपाल सिंह रंधावा, माता, भाई और पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया। कर्मजीत ने कहा कि परिवार के सहयोग और टीम के सदस्यों के मजबूत हौसले ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सराहा
- फोटो : संवाद
रक्षा मंत्री ने सराहा, राष्ट्रपति ने भी किया स्वागत
अभियान की सफल वापसी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दल का औपचारिक स्वागत किया और महिला अधिकारियों के साहस व हौसले को सलाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी साहसिक टीम का स्वागत कर महिला अधिकारियों की जमकर सराहना की।
अभियान की सफल वापसी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दल का औपचारिक स्वागत किया और महिला अधिकारियों के साहस व हौसले को सलाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी साहसिक टीम का स्वागत कर महिला अधिकारियों की जमकर सराहना की।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी किया स्वागत
- फोटो : संवाद
सिर्फ नौकरी नहीं, देश के लिए मिशन लेकर चलें युवा
मेजर कर्मजीत कौर ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सेना या नौसेना में केवल नौकरी करने के उद्देश्य से नहीं जाना चाहिए। नौकरी के साथ देश के लिए कुछ अलग करने का मिशन होना चाहिए। ऐसा लक्ष्य होना चाहिए जिससे देशवासियों के साथ-साथ दूसरी पीढ़ी के युवाओं को भी प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा कि मुश्किलें हर सफर का हिस्सा हैं लेकिन मजबूत इरादे व टीम भावना के साथ हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
मेजर कर्मजीत कौर ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सेना या नौसेना में केवल नौकरी करने के उद्देश्य से नहीं जाना चाहिए। नौकरी के साथ देश के लिए कुछ अलग करने का मिशन होना चाहिए। ऐसा लक्ष्य होना चाहिए जिससे देशवासियों के साथ-साथ दूसरी पीढ़ी के युवाओं को भी प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा कि मुश्किलें हर सफर का हिस्सा हैं लेकिन मजबूत इरादे व टीम भावना के साथ हर चुनौती को पार किया जा सकता है।