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Mandi: महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले सजी 'चौहटे री जातर', दर्शनों के लिए उमड़ा जनसैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:27 AM IST
सार
छोटी काशी मंडी में महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन वाले दिन सभी देवी-देवता मंडी शहर के चौहटा बाजार में विराजते हैं। इसे स्थानीय बोली में 'चौहटे री जातर' कहा जाता है।
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महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले सजी 'चौहटे री जातर'
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
छोटी काशी मंडी में पिछले सात दिनों से जारी भव्य देव समागम का आज समापन होने जा रहा है। समापन से पहले सभी देवी-देवता मंडी शहर के चौहटा बाजार में विराजे जहां देव दर्शनों के लिए लोगों का भारी हजूम उमड़ पड़ा।
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महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले सजी 'चौहटे री जातर'
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यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि शिवरात्रि के समापन वाले दिन सभी देवी-देवता मंडी शहर के चौहटा बाजार में विराजते हैं। इसे स्थानीय बोली में 'चौहटे री जातर' कहा जाता है।
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महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले सजी 'चौहटे री जातर'
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
जो कोई व्यक्ति सप्ताह भर किन्हीं कारणों से देव दर्शन नहीं कर पाते वे इस दिन चौहटा बाजार आकर जरूर देव दर्शन करते हैं। 8 दिनों से टारना माता मंदिर में विराजे देव कमरूनाग भी इस दिन मंदिर से सीधे चौहटा बाजार आते हैं और उसके बाद सेरी चाणनी परिसर में बैठने के बाद अपने भक्तों के घरों की तरफ प्रस्थान करते हैं। प्रशासन की तरफ से डीसी मंडी ने भी देवी-देवताओं के पास शीष नवाया।
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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
स्थानीय निवासी होशियार चंद और चेत राम ठाकुर ने बताया कि यह मंडी शहर वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि एक साथ उन्हें इतने देवी-देवताओं के दर्शन और आशीर्वाद लेने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अब यह सभी वापिस लौट जाएंगे और फिर एक साल बाद ही यह मौका दोबारा से मिल पाएगा।
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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
अधिकतर देवी-देवता इस जातर के बाद सीधे अपने निवास स्थानों की तरफ चले जाते हैं जबकि कुछ प्रमुख देवी-देवता अंतिम शाही जलेब में शिरकत करने के बाद वापिस लौटते हैं। देव कमरूनाग के देवलु ने बताया कि वे सप्ताह भर की पैदल यात्रा के बाद वापिस अपने मूल स्थान पर पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष शिवरात्रि पर आना और इसका हिस्सा बनना एक अलग अहसास करवाता है।
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