भारत सरकार ने निजता और डेटा सुरक्षा के खतरे का हवाला देकर 59 चीनी एप्स पर इसी हफ्ते बैन लगा दिया है। इन सभी एप्स पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि ये चीनी सरकार के दिशानिर्देशों पर काम करती हैं और भारतीय नागरिकों के डेटा चुराकर उसे अपने यहां की सरकार को भेजती हैं।
भारतीय सेना की तरफ से भी इन एप्स को लेकर कई बार चेतावनी दी गई है और लोगों से सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमने ऐसी ही एक बहुप्रतिष्ठित चीनी कंपनी में काम कर चुके वहां के एक पूर्व कर्मचारी से बातचीत की और देश में काम कर रही इन कंपनियों के कार्य प्रणाली के बारे में जानने की कोशिश की। इस बातचीत में कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं जो सरकार के दावों को सही ठहराती हैं और चीनी कंपनियों के इरादों पर कई सवाल खड़े करती हैं।
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chinese apps Banned
- फोटो : For Refernce Only
इस पूर्व कर्मचारी ने बताया कि इन कंपनियों में कई तरह के नियमों का उल्लंघन होता है और भारतीय कानून का पालन नहीं किया जाता है। इन कंपनियों में आपसी बातचीत के लिए सिर्फ डिंगटॉक, वी चैट जैसे खुद के चीनी एप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि अपने ऑफिस के काम के लिए ये कंपनियां गूगल के किसी भी एप का इस्तेमाल नहीं करती हैं।
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chinese apps banned in india
- फोटो : ग्राफिक्स- रोहित झा/अमर उजाला
इस एप ने एक बार आईआरसीटीसी के सिस्टम को हैक कर बिना इजाजत टिकट बुकिंग एप लांच की थी, इसे लेकर कोर्ट में एक मामला भी चल रहा है। ये एप्स अपने यूजर को बताए बिना ही गलत तरीके से उनके फोन की कई जानकारियां निकाल लेती हैं।
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Chinese APP
- फोटो : अमर उजाला
इन एप्स पर चीन यहां या पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी खबर नहीं चलाई जाती है, बलूचिस्तान में होने वाले नरसंहार हों या तिब्बत में चीनी उत्पीड़न या उइगर मुस्लिमों का मामला, इनसे जुड़ी कोई भी खबर यहां ब्लॉक कर दी जाती है।
इन कंपनियों के चीनी कर्मचारी खुद के इस्तेमाल के लिए भारत की सिम अपने भारतीय कर्मचारियों के नाम पर ही मंगाते और इस्तेमाल करते हैं।