उत्तराखंड की राजधानी देहरादून...। रविवार का दिन यहां के लिए खास था। 'अमर उजाला संवाद - उत्तराखंड' के लिए यहां अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जो जुटीं थीं। इन हस्तियों ने अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। यह दूसरा मौका था, जब देहरादून में ऐसा संवाद हुआ। विचारों को जानने के सिलसिले की शुरुआत एक ऐसे व्यक्तित्व से हुई, जो धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों को लोगों के मन से जोड़ना जानते हैं। ये वक्ता थे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज। फिर अध्यात्म की राह विकास से तब जुड़ गई, जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा ने विकसित भारत की बात की।
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'अमर उजाला संवाद - उत्तराखंड' के लिए यहां अलग-अलग क्षेत्रों की जो हस्तियां जुटीं थीं। इन हस्तियों ने अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। यह दूसरा मौका था, जब देहरादून में ऐसा संवाद हुआ। यहां पढ़िए, दिनभर के संवाद का सार।
‘जीवन का मार्ग’ सत्र से हुई संवाद कार्यक्रम की शुरुआत
संवाद कार्यक्रम की शुरुआत ‘जीवन का मार्ग’ सत्र से हुई। अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने स्वामी श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज का स्वागत किया। महाराज जी ने कहा कि भारत का निर्माण उत्तराखंड से होता है और उत्तरांड से ही भारत को प्रकाश मिला है। उन्होंने आगे कहा, ‘उत्तराखंड का विकास यहां की समस्याओं के समाधान से होगा। उत्तराखंड का कण कण तीर्थ है। प्रदेश में बाहर के घुसपैठियों का दबाव बढ़ रहा है। उत्तराखंड के युवाओं को इस बात के लिए जागरूक करना जरूरी है कि बाहर से पढ़कर वापस उत्तराखंड लौटें और राज्य का विकास करें।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय संस्कृति के ज्ञान के इस प्रकाश में ही हमें उत्तराखंड की समस्याओं का समाधान करना पड़ेगा। मन व्यथित हो जाता है, जब यहां के युवा पलायन करते हैं।’
उत्तराखंड को आईटी हब बनाना होगा- अजय टम्टा
कार्यक्रम का अगला सत्र 'विकसित भारत की बात' में केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा से बातचीत की गई। अजय टम्टा ने कहा, ‘उत्तराखंड में पढ़ने-लिखने पर बहुत जोर है। डॉक्टर यहां काम आते हैं, लेकिन कोई इंजीनियर बन जाता है तो उसके लिए यहां नौकरियों के उतने अवसर नहीं हैं। ऐसे युवाओं के लिए यहां अवसर बनाने होंगे। यहां आईटी हब बनाना होगा। जहां रेल, सड़क और हवाई कनेक्टविटी है, वहां पर ये हब विकसित करने होंगे। हमारी कुछ प्रतिभाएं वापस भी आई हैं। लोगों ने अपनी पढ़ाई-करियर के साथ यहां भी रोजगार के मौके देखे। होम स्टे इसका एक उदाहरण है।’ जब केंद्रीय मंत्री से सवाल किया गया कि उत्तराखंड की जमीन कैसे बचाई जा सकती है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड के भूस्वामियों के पास बड़ी जमीनें नहीं हैं। 2007 में उत्तराखंड सरकार की पहली कैबिनेट में इस पर चर्चा की गई थी। तब हमने रोक लगाई थी कि ढाई सौ वर्ग मीटर से ज्यादा भूमि बाहर के लोग नहीं खरीद सकेंगे। भविष्य का समय चुनौतीपूर्ण है। यहां के लोग भूमिविहीन न हों, इसकी चिंता करनी होगी।’ अजय टम्टा ने आगे कहा, ‘उत्तराखंड में बहुत सी संभावनाएं हैं। यहां की भौगौलिक परिस्थितियां विशेष हैं।’
निवेश के लिए आदर्श राज्य है उत्तराखंड- शुभ्रांशु सिंह
कार्यक्रम के अगले सत्र ‘देश के विकास की बात’ में में अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रेसिडेंट मार्केटिंग हेड अजय डांग और सीवीबीयू टाटा मोटर्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शुभ्रांशु सिंह से चर्चा की गई। शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि उत्तराखंड निवेश के लिए आदर्श राज्य है। उन्होंने आगे कहा, ‘20 वर्ष पहले राज्य की पहचान बनना शुरू हुई। पहचान बनते देर लगती है। सकारात्मक बात यह है कि उत्तराखंड को लेकर नकारात्मक पहलू ज्यादा नहीं हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उद्योग आता है तो वह एक व्यक्ति के लिए नहीं होता। पूरा परिवेश मिलना जरूरी है। देश के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह परिवेश मिले। इसके लिए बुनियादी ढांचा जरूरी है।’ शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि विकास होगा या नहीं, रोजगार बढ़ेगा या नहीं, यह देखना होगा। उत्तराखंड को आप पूरी तरह सील नहीं कर सकते। विकास के लिए जहां से भी पूंजी, तकनीक और लोग चाहिए, आपको उन्हें यहां लाना होगा।
उत्तराखंड में पूंजी निर्माण सबसे महत्वपूर्ण- अजय डांग
उधर, अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रेसिडेंट मार्केटिंग हेड अजय डांग ने कहा, ‘उत्तराखंड में पूंजी निर्माण सबसे महत्वपूर्ण होगा। हमें स्थानीय उत्पाद प्रमोट करने होंगे, लेकिन इसी के साथ बाहरी निवेश आए, यह जरूरी है। यह निवेश भी निजी क्षेत्र और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आए तो पहचान तेजी से बढ़ेगी। हथकरघा के मामले में उत्तराखंड की पहचान बन सकती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘विकास के लिए जमीनें भी लगेंगी, प्राकृतिक संसाधन भी चाहिए होंगे। लोग मूल निवासी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी कहीं की मूल निवासी नहीं होती। पूंजी जहां आए, वहां उसका स्वागत होना चाहिए और यह राज्य के लोगों को तय करना है।’
