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कहीं आप पर भी तो बेअसर नहीं हो रही एंटीबायोटिक दवा, ये हो सकती है प्रमुख वजह 

Thu, 21 Nov 2019 04:26 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Thu, 21 Nov 2019 04:26 PM IST
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Antibiotics over use in Delhi Haryana Punjab crops making them ineffective
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कहीं आप पर भी तो एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर तो नहीं होने लगी हैं? बीमार होने पर ली जाने वाली जो दवाएं खाकर आप पहले ठीक हो जाते थे, अब उनसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा! अगर आपको लगता है कि दवा बदलने से कुछ फायदा होगा, तो ऐसा नहीं है। दरअसल आपकी थाली में परोसे जाने वाले खाने की वजह से आपके शरीर पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होता जा रहा है। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में किसान खतरनाक मात्रा में एंटीबायोटिक्स का उपयोग कर रहे हैं, जो खेतों से होकर हमारी थाली तक पहुंच रहा है। 



विश्व एंटीबायोटिक जागरुकता सप्ताह (18 से 24 नवंबर) के दौरान 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट' (CSE) ने यह अध्ययन किया है। सीएसई का कहना है, 'दिल्ली, हरियाणा के हिसार और पंजाब के फजिल्का में यमुना किनारे खेती करने वाले किसान स्ट्रेप्टोसाइक्लाइन नाम की दवा का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दवा स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासाइक्लाइन के 90:10 के अनुपात से बनी है।' 

टीबी के इलाज के लिए होता है इस्तेमाल : 

स्ट्रेप्टोमाइसिन दवा का इस्तेमाल टीबी के इलाज के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग टीबी के उन मरीजों पर किया जाता है, जिन पर अन्य दवाएं काम करना बंद हो जाती हैं। साथ ही दिमागी टीबी के मरीजों को भी यह दवा दी जाती है। अध्ययन के मुताबिक, 'स्ट्रेप्टोमाइसिन का प्रतिरोध काफी ज्यादा है और गैर—इंसानों पर ज्यादा प्रयोग समस्या खड़ी कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा को इंसानों के लिए काफी ज्यादा अहम बताया है।'

 

जिन फसलों में जरूरत नहीं वहां भी इस्तेमाल

Antibiotics over use in Delhi Haryana Punjab crops making them ineffective
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
अध्ययन के मुताबिक जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल तो एक समस्या है ही, लेकिन साथ ही जिन फसलों में इसकी कोई जरूरत नहीं है। वहां भी इसका छिड़काव किया जा रहा है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण का कहना है कि हमें लगता है कि इस मामले में समय रहते मजबूत कदम उठाने की जरूरत है। स्टडी के मुताबिक, 'एंटीबायोटिक्स लगातार बेअसर होती जा रही हैं क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया ने एंटीबायोटिक्स की प्रतिरोधक शक्ति विकसित कर ली है। भारत में बैक्टीरिया संक्रमण काफी आम है और इसका इलाज काफी मुश्किल है।'



 

किसानों को पता ही नहीं सही मात्रा 

Antibiotics over use in Delhi Haryana Punjab crops making them ineffective
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
'फूड एंड टॉक्सिंस' कार्यक्रम के निदेशक अमित खुराना की मानें तो किसानों को पता ही नहीं है कि फसलों में कितनी मात्रा में इन एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना है। उन्होंने कहा, 'अध्ययन के दौरान हमने पाया कि किसानों को पता ही नहीं कब और कितनी मात्रा में इन दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।'

 
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मुर्गे, मछलियों में भी हो रहा प्रयोग 

Antibiotics over use in Delhi Haryana Punjab crops making them ineffective
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
सिर्फ फसलों में ही नहीं बल्कि मांस के लिए इस्तेमाल होने वाले मुर्गों, मछलियों व अन्य मवेशियों में भी इसका प्रयोग हो रहा है। अध्ययन में कहा गया है कि एएमआर या एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधकता वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता खड़ी कर रही है। भारत पर इसका प्रभाव बहुत ज्यादा हो सकता है।
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