लंबे इंतजार के बाद रामलला टाट से निकलकर ठाठ में जाने वाले हैं। पांच अगस्त को अयोध्यानगरी की पावन धरती पर भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया। भगवान राम के बाल स्वरूप को किसी की नजर न लगे, इसलिए उन्हें खास तरह की पोशाक पहनाई जाती है।
रामलला को लगे न नजर, इसलिए पहनी खास पोशाक, जानें किस दिन कौन से रंग की पोशाक पहनते हैं भगवान राम
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बाबूलाल ने 85 में शुरू किया था पोशाक बनाने का काम
रामलला की पोशाक बनाने की शुरुआत स्वर्गीय बाबूलाल ने की थी। उनके बड़े बेटे भगवत प्रसाद बताते हैं, 'पिताजी सन 85 से रामलला की पोशाक तैयार कर रहे थे। तब वहीं पास में ही एक छोटी सी दुकान होती थी।'
चार पीढ़ियों से परिवार बना रहा पोशाक
बाबूलाल के देहांत के बाद अब भगवत प्रसाद और उनके छोटे भाई का परिवार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। भगवत प्रसाद का बेटा और पोता भी इस काम में उनके साथ जुटे हुए हैं। उनके छोटे भाई शंकर प्रसाद कहते हैं, 'भगवान राम ने हमें सब कुछ दिया है। खाने को रोटी के साथ यश भी। फिर उनकी सेवा छोड़ भला कुछ और क्यों करें।
भूमि पूजन के लिए रातभर जाग कर तैयार की पोशाक
भगवत प्रसाद के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से थोड़ी दिक्कतें आ रही थीं। लेकिन भगवान का काम था, तो मुश्किलें आसान होती चली गई। भूमि पूजन से पहले हर हाल में नई पोशाक तैयार करनी थी। इसलिए पूरा परिवार रात को जागकर भी काम करता रहा।
अब हर दिन नई पोशाक
रामलला जब टाट में रह रहे थे, तब चेतराम नवमी के मौके पर ही रामलला की नई पोशाक बनाई जाती थी। मगर अभी रामलला की हर दिन नई पोशाक तैयार हो रही है। भगवान की पोशाक में उनके वस्त्र, गमछा और बिछौना होता है। श्रीराम के अलावा लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की पोशाक भी तैयार होती है। इसके अलावा हनुमान जी की पोशाक और बिछौना तैयार होता है।