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Birthday Special: मकबूल फिदा हुसैन, भारत का पिकासो

नवीन चौहान/ नई दिल्ली Updated Sat, 17 Sep 2016 03:05 AM IST
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Birthday Special: maqbool fida hussain' s 101th birthday
मकबूल फिदा हुसैन - फोटो : google
आज पिकासो ऑफ इंडिया के नाम से दुनिया भर में मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन यानी एम एफ हुसैन का 101 वां जन्मदिन है। हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1916 को महाराष्ट्र के पंढारपुर में सुलेमानी बोहरा परिवार में हुआ था। हुसैन जब बहुत छोटे थे तब उनकी मां का देहांत हो गया था। उसके बाद उनके पिता इंदौर चले गए जहां मकबूल की प्रारंभिक शिक्षा हुई। बड़ोदा में एक मदरसे में प्रवास के दौरान सुलेखन करते-करते उनकी रूचि कला में जागी। बीस साल की उम्र में हुसैन बम्बई गये और जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में दाखिला ले लिया। अपने करियर के शुरूआती दौर में पैसा कमाने के लिए हुसैन सिनेमा के पोस्टर बनाते थे। पैसे की तंगी के कारण वे दूसरे काम भी करते थे जैसे खिलौने की फैक्टरी में काम जहां उन्हें अच्छे पैसे मिल जाते थे। जब भी उन्हें समय मिलता वे गुजरात जाकर प्राकृतिक दृश्यों के चित्र बनाते थे।
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मकबूल फिदा हुसैन - फोटो : google
हुसैन के पिता ने उनके हुनर को पहचाना था, इसके बाद उनके पिता ने उन्हें पेंटिंग की प्रारंभिक शिक्षा दिलवाई। इस दौरान हुसैन एक टेलर के यहां काम करते थे। हुसैन ने अपने पिता से बेहद कम उम्र में कह दिया था कि वह पढ़ाई नहीं करना चाहते वह सिर्फ पेंटिंग करना चाहते थे। उस जमाने में किसी आर्टिस्ट की क्या हैसियत होती थी? ऐसे आदमी के साथ कौन अपनी लड़की व्याहेगा, इसकी चिन्ता उनके पिता को  थी।  लेकिन हुसैन के पिता को संगीत और कला का शौक था, हुसैन जो करते उनके पिता को वह अच्छा लगता था। छह वर्ष की उम्र से ही हुसैन पेंटिंग करने लगे थे।
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मकबूल फिदा हुसैन - फोटो : google
जब वह 11 साल के थे तब उनके पिता उन्हें एक पेंटिंग कॉलेज में ले गए थे। जहां चार पांच वर्षों से पेंटिंग का प्रशिक्षण ले रहे छात्रों की पेंटिंग उन्हें दिखाई गईं तब उन्होंने अपने पिता से कहा कि वह इन सभी से बेहतर पेंटिंग बना सकते हैं और जब उनसे बनाने को कहा गया तो उन्होंने पेंटिंग बना दी। इसके बाद पिता ने पेंटिंग करने की इजाजत दे दी। हुसैन मानते थे कि  वह एक छलांग थी।  हुसैन ने पिता से कहा कि मुझे कोई डिग्री नहीं चाहिए, मुझे नौकरी नहीं करनी है, सिर्फ पेंटिंग करनी है। मेरे हाथ में ब्रश है, कुछ नहीं होगा तो दीवारें पेंट करके पेट भर लूंगा।

 
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मकबूल फिदा हुसैन - फोटो : google
एक युवा पेंटर के तौर पर मकबूल फ़िदा हुसैन ‘बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट्स’ की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर कुछ नया करना चाहते थे इसलिए कुछ और चित्रकारों और कलाकारों के साथ मिलकर उन्होंने वर्ष 1947 में फ्रांसिस न्यूटन सूजा और पांच अन्य कलाकारों के साथ मिलकर ‘द प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप ऑफ बॉम्बे’ की स्थापना की। एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स की पहली प्रदर्शनी सन 1952 में जर्मनी के ज्यूरिख में लगी थी। साल 1964 में अमेरिका में पहली बार उनकी पेंटिग्स की प्रदर्शनी न्यू यॉर्क के ‘इंडिया हाउस’ में लगी थी।
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मकबूल फिदा हुसैन - फोटो : google
1967 में अपने करियर की पहली फिल्म "थ्रू द आइस ऑफ अ पेंटर" नाम की फिल्म का निर्माण और निर्देशन  किया था। इस फिल्म को उसी साल बर्लिन फिल्म समारोह में शॉर्ट फिल्म कैटेगरी के लिए गोल्डन बियर पुरस्कार मिला था।  
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