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Exit Poll 2022: गुजरात, हिमाचल और दिल्ली MCD के एग्जिट पोल क्या संदेश दे गए? समझें सियासी समीकरण
Tue, 06 Dec 2022 01:37 AM IST
हिमांशु मिश्रा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 06 Dec 2022 01:37 AM IST
सार
न एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राजनीतिक दलों को क्या संदेश दिया? अगर ये आंकड़े हकीकत में तब्दील होते हैं तो किस पार्टी के लिए इसके क्या मायने होंगे? सियासी समीकरण क्या हैं?
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चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
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गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के साथ दिल्ली नगर निगम का चुनाव संपन्न हो चुका है। अब गुजरात और हिमाचल चुनाव के नतीजे आठ दिसंबर को जारी होंगे। सात दिसंबर को दिल्ली एमसीडी का रिजल्ट घोषित होना है। इसके पहले सोमवार को तमाम एग्जिट पोल के आंकड़े जारी हुए। तीनों चुनावों को लेकर अलग-अलग एजेंसियों ने सर्वे करवाया था। इसके अनुमान ने सियासी गलियारे में हलचल बढ़ा दी है।
गुजरात एग्जिट पोल।
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए एग्जिट पोल के आंकड़े क्या कहते हैं?
गुजरात : गुजरात को लेकर नौ एजेंसियों ने सर्वे किया था। सभी का अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी की सत्ता सूबे में बरकरार रहेगी। भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। यही नहीं, पिछली बार के मुकाबले इस बार सीटों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। सभी सर्वे की बात करें तो किसी भी सर्वे ने भाजपा को 110 से कम सीट नहीं दी है। ये आंकड़ा अधिकतम 151 तक जा रहा है। ऐसा होता है तो गुजरात के चुनावी इतिहास में ये नया रिकॉर्ड होगा।
वहीं, इस बार पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। एग्जिट पोल के आंकड़े कहते हैं कि अभी गुजरात में मुख्य लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2017 के मुकाबले इस बार कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गुजरात : गुजरात को लेकर नौ एजेंसियों ने सर्वे किया था। सभी का अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी की सत्ता सूबे में बरकरार रहेगी। भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। यही नहीं, पिछली बार के मुकाबले इस बार सीटों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। सभी सर्वे की बात करें तो किसी भी सर्वे ने भाजपा को 110 से कम सीट नहीं दी है। ये आंकड़ा अधिकतम 151 तक जा रहा है। ऐसा होता है तो गुजरात के चुनावी इतिहास में ये नया रिकॉर्ड होगा।
वहीं, इस बार पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। एग्जिट पोल के आंकड़े कहते हैं कि अभी गुजरात में मुख्य लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2017 के मुकाबले इस बार कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Himachal Exit Poll 2022
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश : यहां कांग्रेस और सत्ताधारी पार्टी भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। नौ में से छह सर्वे ने अनुमान लगाया है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा दोबारा सरकार बनाने जा रही है। तीन सर्वे में मुकाबला बेहद कांटे का बताया गया है। आजतक एक्सिस माय इंडिया ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी का अनुमान लगाया है। 68 विधानसभा सीटों वाले हिमाचल में बहुमत के लिए 35 सीटों की जरूरत पड़ती है। आजतक एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में कांग्रेस को 30 से 40 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। भाजपा को 24 से 34 सीटें मिल सकती हैं।
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MCD Exit Poll 2022
- फोटो : Amar Ujala
दिल्ली एमसीडी : तमाम एग्जिट पोल में दिल्ली नगर निगम चुनाव में बड़े उलटफेर का अनुमान लगाया गया है। पोल के अनुसार, 15 साल से एमसीडी में काबिज भाजपा के हाथ से सत्ता चली जाएगी। आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत हो सकती है। एमसीडी को लेकर पांच एजेंसियों ने सर्वे किया था। सभी ने इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत का अनुमान लगाया है। आजतक एक्सिस माय इंडिया ने आप को 149 से 171, टाइम्स नाऊ ईटीजी ने 146 से 156, इंडिया न्यूज जन की बात ने 150 से 175, टीवी9 ऑन द स्पॉट ने 145 और जी न्यूज बार्क ने आम आदमी पार्टी को 134 से 146 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। वहीं, भाजपा को 70 से 94 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस के खाते में तीन से 14 सीटें जा सकती हैं। अन्य को शून्य से 14 सीटें मिल सकती हैं।
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गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
क्या संदेश दे रहे हैं तीनों चुनाव के एग्जिट पोल?
इसे समझने के लिए हमने तीन वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों से बात की। सभी ने अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग दावे किए।
गुजरात : वरिष्ठ पत्रकार वीरांग भट्ट ने कहा, 'पिछले 27 साल में भाजपा ने गुजरात में काफी काम किया है। जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की सत्ता संभाली थी, तो उन्होंने उद्योग के साथ-साथ अत्याधुनिक विकास के क्षेत्र में काफी काम किया। इसका असर आज भी गुजरात में देखने को मिलता है। गुजरात देश का बड़ा औद्योगिक राज्य है। पूरे देश से लोग यहां नौकरी करने आते हैं। इसका फायदा आज तक भाजपा को मिल रहा है।'
वीरांग के अनुसार, '2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से गुजरात में भाजपा को कोई मजबूत चेहरा नहीं मिल पाया है। यही कारण है कि पहले आनंदी बेन पटेल और फिर विजय भाई रूपाणी को सात साल के अंदर बदलना पड़ा। अब भूपेंद्र भाई पटेल को भाजपा ने कमान सौंपा है, लेकिन वह भी पीएम मोदी के छाप से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका नुकसान पार्टी को हो रहा है।'
उन्होंने आगे बताया एग्जिट पोल के अनुसार, पिछली बार के मुकाबले इस बार भाजपा ज्यादा सीटें जीत रही है। ये इसलिए क्योंकि इस बार आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। एआईएमआईएम ने भी कई सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ा। इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा, जबकि भाजपा को फायदा मिल गया। कांग्रेस के वोट शेयर में बंटवारा हो गया। यही कारण है कि एंटी इनकम्बेंसी का भी असर नहीं हुआ और भाजपा पहले के मुकाबले ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापसी कर रही है।
इसे समझने के लिए हमने तीन वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों से बात की। सभी ने अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग दावे किए।
गुजरात : वरिष्ठ पत्रकार वीरांग भट्ट ने कहा, 'पिछले 27 साल में भाजपा ने गुजरात में काफी काम किया है। जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की सत्ता संभाली थी, तो उन्होंने उद्योग के साथ-साथ अत्याधुनिक विकास के क्षेत्र में काफी काम किया। इसका असर आज भी गुजरात में देखने को मिलता है। गुजरात देश का बड़ा औद्योगिक राज्य है। पूरे देश से लोग यहां नौकरी करने आते हैं। इसका फायदा आज तक भाजपा को मिल रहा है।'
वीरांग के अनुसार, '2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से गुजरात में भाजपा को कोई मजबूत चेहरा नहीं मिल पाया है। यही कारण है कि पहले आनंदी बेन पटेल और फिर विजय भाई रूपाणी को सात साल के अंदर बदलना पड़ा। अब भूपेंद्र भाई पटेल को भाजपा ने कमान सौंपा है, लेकिन वह भी पीएम मोदी के छाप से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका नुकसान पार्टी को हो रहा है।'
उन्होंने आगे बताया एग्जिट पोल के अनुसार, पिछली बार के मुकाबले इस बार भाजपा ज्यादा सीटें जीत रही है। ये इसलिए क्योंकि इस बार आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। एआईएमआईएम ने भी कई सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ा। इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा, जबकि भाजपा को फायदा मिल गया। कांग्रेस के वोट शेयर में बंटवारा हो गया। यही कारण है कि एंटी इनकम्बेंसी का भी असर नहीं हुआ और भाजपा पहले के मुकाबले ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापसी कर रही है।