भारतीय जनता पार्टी में पिछले कुछ सालों के दौरान संबित पात्रा बेहद तेजी से उभरे हैं। आज वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक हैं और हर बड़ी चर्चा में वह शामिल नजर आते हैं। पेशे से डॉक्टर रहे संबित पात्रा ने भाजपा में तेजी से अपनी जगह बनाई है। 2010 में उनका सियासी करियर भाजपा से ही शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत एमसीडी चुनाव लड़ने के साथ हुई थी। 2019 चुनाव में भाजपा ने ओडिशा के पुरी से उन्हें उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के इस फैसले ने सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि संबित पात्रा का सियासी करियर किस तरह शुरू हुआ और फिर कैसे परवान चढ़ा।
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शख्सियत: जानिए किस तरह परवान चढ़ा संबित पात्रा का सियासी करियर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 03 Apr 2019 06:44 PM IST
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संबित पात्रा का सियासी सफर
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संबित पात्रा
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13 दिसंबर 1974 को झारखंड के धनबाद में जन्मे संबित पात्रा एक डॉक्टर हैं। वह दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर रहे हैं। उन्होंने 2002 में एससीबी मेडिकल कॉलेज कटक से जनरल सर्जरी में मास्टर ऑफ सर्जरी की डिग्री ली थी। उन्होंने 1997 में ओडिशा में बुर्ला के संबलपुर स्थित वीएसएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। 2003 में उन्होंने यूपीएससी संयुक्त मेडिकल सेवा पास किया और दिल्ली के मलका गंज स्थित हिंदू राव अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर तैनात हुए।
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संबित पात्रा
- फोटो : Twitter
2006 में पात्रा ने स्वराज नाम से एनजीओ भी बनाया। इसका मकसद दलित, आदिवासियों खास तौर पर ओडिशा और छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है। वह अपने अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों का दौरा भी करते रहे हैं। इसी दौरान उन्हें पता चला कि गांवों और दूर दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल है।
संबित पात्रा
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डॉक्टरी पेशे के दौरान ही उन्होंने राजनीति में भी कदम रख दिया। 2010 में उन्हें दिल्ली भाजपा का प्रवक्ता नियुक्त किया गया। 2012 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर दिल्ली में एमसीडी चुनाव लड़ा। वह कश्मीरी गेट से उम्मीदवार बने। लेकिन इस पहली चुनावी जंग में उन्हें हार मिली। इसी दौरान उन्होंने अस्पताल से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह राजनीति में उतर पड़े।
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संबित पात्रा
- फोटो : सोशल मीडिया
हार से उनका हौसला कम नहीं हुआ था। वह पूरी शिद्दत के साथ पार्टी के लिए काम करते रहे। भाजपा ने भी उनके संघर्ष और जज्बे को पहचान देते हुए उन्हें ओडिशा राज्य की तरफ से केंद्रीय कमेटी में जगह मिली। इसके बाद से भाजपा में उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। 2014 में वह लोगों के लिए जाना पहचाना चेहरा बन गए। लोकसभा चुनाव के दौरान टेलीविजन पर उन्हें भाजपा की तरफ से चर्चा-बहस कार्यक्रमों में देखा जाने लगा।