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स्वराज पॉल: उद्यमिता के साथ-साथ परोपकार की अनमोल विरासत छोड़ी, पिता चलाते थे इस्पात ढलाई कारखाना

Sat, 23 Aug 2025 08:16 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 23 Aug 2025 08:16 AM IST
सार

94 साल की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले भारतीय मूल के दिग्गज उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पाल अपने पीछे उद्यमिता के साथ-साथ परोपकार की विरासत भी छोड़ गए हैं। 1978 में उन्हें ब्रिटिश महारानी से नाइटहुड की उपाधि मिली थी। निजी जीवन में कई हृदयविदारक दुख झेलने वाले लॉर्ड के पिता इस्पात ढलाई कारखाना चलाते थ। जानिए इनके जीवन से जुड़ी प्रेरक बातें

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Lord Swaraj Paul legacy personal tragedy made strong philanthropy entrepreneurship father steel foundry
लॉर्ड स्वराज पाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / पीटीआई

भारतीय मूल के दिग्गज ब्रिटिश कारोबारी और कपारो समूह के संस्थापक लॉर्ड स्वराज पाल को दुनिया उनके लंबे-चौड़े कारोबारी साम्राज्य के साथ-साथ उनके परोपकारी कार्यों के लिए भी याद रखेगी, जिसकी शुरुआत 60 के दशक में तब हुई जब उन्होंने अपनी महज चार वर्ष की बेटी को बीमारी के कारण गंवा दिया। उनकी परोपकारी संस्था अंबिका फाउंडेशन दुनियाभर में बच्चों-युवाओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर लाखों रुपये खर्च करती रही है।

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लॉर्ड स्वराज पॉल - फोटो : amarujala.com
व्यक्तिगत क्षति ने उन्हें और अधिक परोपकारी कार्य करने के लिए प्रेरित किया। वह 1966 में अपनी बेटी अंबिका के ल्यूकेमिया का इलाज कराने के लिए ब्रिटेन गए थे। उसके नहीं रहने के बाद अंबिका पॉल फाउंडेशन बनाया और जब 2022 में उन्होंने अपनी पत्नी अरुणा स्वराज पॉल को गंवा दिया तो ट्रस्ट का नाम बदलकर अरुणा एंड अंबिका पॉल फाउंडेशन कर दिया गया। ताकि फाउंडेशन के अनेक कार्यों में दिए सहयोग एवं योगदान को पहचान दी जा सके। उन्होंने 2015 में अपने बेटे अंगद पॉल को खो दिया।
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एनआरआई उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल - फोटो : एक्स@rashtrapatibhvn
पिता चलाते थे इस्पात ढलाई कारखाना
पंजाब के जालंधर जिले में रहने वाले प्यारे लाल के घर 18 फरवरी 1931 को जन्मे स्वरॉज पॉल जीवन के शुरुआती दिनों में ही कारोबारी दुनिया से परिचित हो गए थे। उनके पिता बाल्टियों और अन्य कृषि उपकरणों सहित इस्पात के सामान बनाने के लिए एक छोटा-सा ढलाई खाना चलाते थे। अपने शुरुआती अनुभव का लाभ उठाते हुए पॉल ने कपारो ग्रुप की स्थापना की जो एक विविध व्यवसाय इकाई है।
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लॉर्ड स्वराज पॉल - फोटो : एक्स@पीआईबी
ब्रिटिश महारानी ने प्रदान की नाइटहुड की उपाधि
1978 में उन्हें ब्रिटिश महारानी से नाइटहुड की उपाधि मिली और 1996 में कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने उन्हें हाउस ऑफ लॉर्ड्स में लाइफ पीयर नियुक्त किया गया, जिसके बाद वे मैरीलेबोन के लॉर्ड पॉल के रूप में जाने गए। उन्होंने 1998 से 2010 तक ब्रिटिश व्यापार के राजदूत के रूप में भी सेवा दी।
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लॉर्ड स्वराज पॉल - फोटो : एक्स@Rashtrapatibhvn
अमेरिका से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली
जालंधर में हाई स्कूल की शिक्षा और 1949 में पंजाब विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की उपाधि लेने के बाद स्वराज पॉल मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के लिए अमेरिका चले गए। एमआईटी में पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटे और अपने पारिवारिक व्यवसाय एपीजे सुरेंद्र ग्रुप (जो भारत के सबसे पुराने व्यापारिक समूहों  में से एक है) का हिस्सा बने।
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