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मुस्लिम शिक्षक ने बेटे की तरह किया हिंदू का अंतिम संस्कार, वजह जानकर रोने को हो जाएंगे मजबूर

Thu, 06 Dec 2018 11:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Updated Thu, 06 Dec 2018 11:47 AM IST
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Muslim teacher made funeral of hindu like son in west bengal
funeral - फोटो : google

अपने देश में एक कहावत खूब प्रचलित है कि 'हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में हैं भाई-भाई'। हालांकि ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में एक व्यक्ति ने इस कहावत को हकीकत में बदल कर दिखाया है। यहां एक मुस्लिम शिक्षक ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से अपने एक हिंदू साथी का अंतिम संस्कार किया है। उसने ऐसा करने के पीछे बेहद ही भावुक वजह बताई है। 

Muslim teacher made funeral of hindu like son in west bengal
Hindu funeral - फोटो : Quora

दरअसल, जलपाईगुड़ी जिले के बनरहट के रहने वाले अशफाक एक सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। उनके हिंदू दोस्त संजन कुमार विश्वास भी यहीं पढ़ाते थे। हालांकि वो उम्र में अशफाक से काफी बड़े थे। हाल ही में उनकी मृत्यु हो गई। अब चूंकि संजन कुमार के परिवार में सिर्फ उनकी तीन बेटियां ही हैं, इसलिए उन्होंने एक साथी और एक बेटे की तरह फर्ज निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, उन्होंने इसके लिए अपना सिर और मूंछें भी मुड़वा लीं। साथ ही वो परिवार के साथ 11 दिन का शोक भी मनाएंगे। 

Muslim teacher made funeral of hindu like son in west bengal
प्रतीकात्मक तस्वीर

अशफाक का कहना है कि संजन कुमार उनके पिता के समान थे। उनसे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने बताया कि संजन कुमार साल 2005 में रिटायर हो गए थे और उनका स्कूल आना-जाना बंद हो गया था, लेकिन उनकी दोस्ती हमेशा बरकरार थी, क्योंकि उनसे उन्हें जो सबसे बेहतरीन चीज सीखने को मिली थी, वो है मानवता। 

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Muslim teacher made funeral of hindu like son in west bengal
Hindu-Muslim unity - फोटो : social media

अशफाक ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, 'जिस साल स्कूल अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा था, उसी साल स्कूल में मेरी नियुक्ति हुई थी। स्कूल में ऐसे कई लोग थे, जो धर्म के आधार पर मेरी नियुक्ति का विरोध कर रहे थे, लेकिन संजन कुमार हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। सिर्फ यही नहीं, जब तक मुझे वहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल गया, मैं उन्हीं के घर पर रूका रहा।' अशफाक ने कहा कि वो धर्म में नहीं बल्कि मानवता में विश्वास करते थे और ये चीज मैनें उन्हीं से सीखी है और इसीलिए उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। 

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Muslim teacher made funeral of hindu like son in west bengal
Humanity - फोटो : Pixabay

अशफाक ने कहा कि मैं उदारवादी विचारों वाला व्यक्ति हूं और ये सब मैंने सिर्फ और सिर्फ संजन सर से ही सीखा है। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहता हूं कि मेरे तीन पिता है- एक वो जिन्होंने मुझे जन्म दिया, दूसरे वो जिन्होंने मुझे शिक्षा दी और इस काबिल बनाया और तीसरे संजन सर, जिन्होंने मुझे दुनिया की सबसे बड़ी चीज मानवता सिखाई। उन्होंने कभी किसी बात की परवाह नहीं की और जो सही था, वही किया और आज मैं भी वही कर रहा हूं। 

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