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17 साल पहले 13 साल की उम्र में गंवा दिए थे दोनों हाथ, पढ़िए मालविका की प्रेरणादायक कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 04 Dec 2019 02:19 PM IST
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National Disability Day Malvika Iyer Nari Shakti Puraskar President Ram Nath Kovind
मालविका अय्यर - फोटो : Facebook

17 साल पहले 13 साल की मलविका अय्यर एक फटी जींस को ठीक करना चाहती थी। जिसके लिए वह कुछ तलाश रही थी जो इस काम में उसकी मदद कर सके। वो दौड़ते हुए अपने घर के गराज में गई और भारी वस्तु की तलाश में वह  एक ग्रेनेड बम उठा लाई। उसका प्रयोग करने से पहले उसके बारे में वह कुछ समझ पाती कि ग्रेनेड फट गया और बच्ची ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए और उसके शरीर में बहुत सी चोटें आईं। आज भी मालविका याद उस वक्त को याद करते हुए कहती हैं कि सबने सोच लिया था कि अब हमारी जिंदगी खत्म हो जाएगी। 

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मालविका अय्यर - फोटो : Facebook

मालविका ने अपने जीवन के उन दर्दनाक अनुभवों को बयां करते हुए कहा कि वह पहली बार था जब मैं खूब रोई थी। जब मैं अस्पताल में बिस्तर पर थी मैंने कुछ औरतों को फुसफुसाते सुना था- 'क्या तुमने जनरल वॉर्ड में उस लड़की को देखा? कितने दुख की बात है! जरूर इस बच्ची को किसी ने श्राप दिया होगा, इस लड़की जिंदगी तो अब खत्म हो गई है।

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मालविका अय्यर - फोटो : Facebook

मालविका ने बताया कि मई, 2002 की छब्बीस तारीख। उस दिन सबकी छुट्टी थी, रविवार का दिन था। मैं नवीं कक्षा में थी। मम्मी-पापा सभी लोग घर पर थे। कुछ मेहमान उनसे मिलने आए थे। पापा मेहमानों के साथ बैठक कक्ष में बैठे थे। मेरी बहन उनके लिए रसोई में चाय बना रही थी। गर्मी बढ़ गई थी, सो मां कूलर में पानी भरने गई हुई थीं। तभी मेरी नजर अपनी जींस की फटी जेब पर गई।

मैंने सोचा, क्यों न इसे फेवीकॉल से चिपका दूं! यह सोचकर मैं गराज में किसी भारी वस्तु की तलाश में चली गई, जिससे चिपकाने के बाद जींस पर भार रखा जा सके। मेरे घर के पास ही सरकारी गोला-बारूद डिपो था। मुझे नहीं पता था कि हाल में ही उस डिपो में आग लगी है, जिससे डिपो में रखे कई विस्फोटक पदार्थ आसपास के इलाके में बिखर गए हैं।

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मालविका अय्यर - फोटो : Facebook

उन्होंने बताया कि गराज में भारी वस्तु की तलाश में वह एक ग्रेनेड बम उठा लाई। उसका प्रयोग करने से पहले उसके बारे में वह कुछ समझ पाती कि ग्रेनेड फट गया। मालविका ने बताया कि एक पल में ही उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। युद्धस्तर पर इलाज चला। उनकी जान तो बच गई, पर उस हादसे की वजह से उनको अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। साथ ही दोनों पैर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

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मालविका अय्यर - फोटो : Facebook

मालविका ने बताया कि उन्हें दो साल तक अस्पताल में रहना पड़ा। इस दौरान उन्हें कई स्तर की सर्जरी से गुजरना पड़ा। वह महीनों तक चल भी न सकी। वह एक झटके में दुनिया की नजर में सामान्य से दिव्यांग बन चुकी थी। उन्होंने बताया कि उनका जन्म तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था, पर उनकी परवरिश राजस्थान के बीकानेर में हुई है। मालविका ने बताया कि जिंदगी भर याद रहने वाले उस हादसे के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ना जारी रखा।

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