भारत की चिंताओं के बावजूद चीनी नौसेनिक जहाज 'युआन वांग-5' इसी सप्ताह 16 अगस्त को श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंचा। यह जहाज 22 अगस्त तक इस रणनीतिक बंदरगाह पर रहेगा। इस बीच श्रीलंका के पर्यटन मंत्री हारनि फर्नाडो ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे कोई बड़ा कूटनीतिक विवाद नहीं होगा क्योंकि भारत उसकी स्थिति को समझता है।
चीन श्रीलंका की अतीत की जरूरतों को समझता रहा है : फर्नाडो
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श्रीलंका के पर्यटन मंत्री हारिन फर्नाडो
- फोटो : सोशल मीडिया
द्वीपीय देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अहमदाबाद आए फर्नाडो ने कहा कि चीन ने श्रीलंका में काफी निवेश किया है और अतीत में उसकी जरूरतों को समझता रहा है। वहीं भारतीय अधिकारियों ने जहाज की जासूसी क्षमता को लेकर चिंता जताई है।
मोदी और जयशंकर से लगातार संपर्क में विक्रमसिंघे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के उनके समकक्ष रानिल विक्रमसिंघे
- फोटो : एएनआई (फाइल)
फर्नाडो ने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और उनके विदेश मंत्री लगातार भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वे हमारी स्थिति को समझते हैं।
'उम्मीद है बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बनेगा'
मंत्री ने आगे कहा, "श्रीलंका में चीनियों द्वारा बहुत अधिक निवेश किया गया है और वे अतीत में हमारी जरूरतों की काफी समझ रखते रहे हैं। इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि यह एक बड़ा राजनयिक मुद्दा नहीं है। इस पर ध्यान दिया जा सकता है।"
श्रीलंका की सरकार ने 13 अगस्त को दी थी अनुमति
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चीनी अनुसंधान जहाज युआन वांग-5
- फोटो : ANI
बैलिस्टिक मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैकिंग जहाज 'युआन वांग-5' श्रीलंका के दक्षिण में हंबनटोटा में खड़ा है और 22 अगस्त तक बंदरगाह पर रहेगा। हंबनटोटा बंदरगाह का संचालन चीन ही करता है। श्रीलंका की सरकार ने 13 अगस्त को इस शर्त के साथ जहाज को बंदरगाह तक आने की अनुमति प्रदान की कि यह देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के भीतर स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) को चालू रखेगा और उसके जल क्षेत्र में कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं किया जाएगा।
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