कहते हैं यदि किसी को आने का न्योता दिया जाए तो वह जरूर आता है चाहे भगवान ही क्यों ना हो। ऐसा ही उदयपुर में हुआ, यहां गीता ज्ञान यज्ञ के आयोजन के लिए सांवरिया सेठ के मंदिर में न्योता भेजा गया तो प्रभु महोत्सव में पधारे।
बताया जा रहा है कि भगवान सांवरियाजी पहली बार मण्डफिया चित्तौड़ से उदयपुर पधारे हैं। यह पहला आयोजन है जब सांवरिया के प्रतिरूप को भक्तों के बीच लाया गया। इससे पहले यह प्रतिरूप केवल मात्र फूलडोल महोत्सव के दौरान ही मंदिर से बाहर भक्तों के बीच लाया गया है।
नाचने—गाने लगे भक्त
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प्रभु के स्वागत में नाचते भक्त
- फोटो : amar ujala
उदयपुर के फतेहपुरा चौराहे के समीप एक गार्डन में होने वाले गीता ज्ञान यज्ञ महोत्सव में सांवरियाजी के पधारने का भक्तों को जैसे ही पता लगा वे दौड़े चले आए। मण्डफिया चित्तौड़ से फतेहपुरा उदयपुर तक रास्ते में भक्तों ने प्रभु के स्वागत में फूल बिखेर दिए। यहां तक कि प्रभु के स्वागत में भक्त नाचने गाने लगे।
गोद में बिठाकर लाए महाराज
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प्रभु के प्रतिरूप को गोद में लेकर बैठे महाराज
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उदयपुर शहर के सौ फिट रोड पर भक्तों की ओर से सांवरियाजी की विशाल आरती का आयोजन किया गया। यहां प्रभु प्रतिरूप के पहुंचते ही पूरा पांडाल भजनों पर झूम उठा। इसी बीच मण्डफिया से सांवरियाजी को गोद में बिठाकर लाए महाराज ने उनकी आरती उतारी।
हर कोई उनकी तस्वीर को कैद करना चाहता था
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मोबाइल से तस्वीरें खींचते भक्त
- फोटो : amar ujala
भगवान सांवरियाजी की एक झलक पाने के लिए भक्त लालायित दिखे। कोई अपने मोबाइल फोन में उनकी तस्वीर कैद करना चाहता तो कोई अपनी आंखों में ही हमेशा के लिए उन्हें बंद करना चाहता था। ऐसा भक्तिमय माहौल यहां सोमवार को सांवरियाजी के पधारने के दौरान दिखा।
तीन दिन तक भक्तों के बीच विराजेंगे सांवरियाजी
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प्रभु पर फूल बरसाते भक्त
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तीन दिनों तक भगवान सांवरियाजी भगवत गीता महोत्सव के लिए आयोजन स्थल पर ही विराजेंगे। भक्तों का कहना है कि प्रभु को अपने बीच में देखकर उनका तो जीवन ही धन्य हो गया। कहा जाता है कि यदि मन से प्रभु को भक्तों के बीच बुलाया जाए तो वे जरूर भक्तों का मान रखते हैं।