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बाहुबली 2: माहिष्मति का भव्य महल राजस्थान के इन मंदिरों को देख हुआ तैयार

Mon, 08 May 2017 10:19 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 08 May 2017 10:19 AM IST
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The kingdom of Mahishmati may be inspired by these temples
माहिष्मति साम्राज्य की झलक - फोटो : डेमो पिक
बाहुबली 2, द कन्क्लूजन में माहिष्मति साम्राज्य की भव्यता को देखकर हर कोई चकित रह गया। निर्देशक एसएस राजामौली ने कोई कसर नहीं छोड़ी। माहिष्मति के महल की भव्यता देखते ही बनती है।


एक रिपोर्ट की मानें तो बाहुबली की टीम ने राजस्थान के दो मंदिरों पर गहन अध्ययन के बाद ही माहिष्मति के महल को तैयार किया था। इन्हीं मंदिरों के मुताबिक नक्काशी करके महल की भव्यता को मूर्त रूप दिया गया। राजस्थान से पेड़ और मार्बल भी मंगवाए इसी तरह की भव्यता दी गई। ये दो मंदिर कौन से थे इस बारे में राजस्थान के दो बड़े और नामचीन मंदिरों की तस्वीरें देखकर अंदाज लगाया जा सकता है। इन मंदिरों की भव्यता है ही ऐसी कि जो देखता है मोहित ही हो जाता है।

इस मंदिर के जैसी थी माहिष्मति के महल की झलक

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रणकपुर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इस तस्वीर को देखने के बाद महसूस होता है कि कहीं ये तो वो मंदिर नहीं जिसकी झलक फिल्म में नजर आई है। ये मंदिर है रणकपुर जैन मंदिर। उदयपुर से करीब सौ किमी दूर स्थित यह मंदिर खुबसूरत नक्काशी और अपनी प्राचीनता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

इन मंदिरों का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था। इन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा। यह जैन मुनि ऋषभदेव का मंदिर है। माना जाता है कि भारत के जैन मंदिरों में यह संभवतया सबसे बड़ा है। इसकी इमारत लगभग 40,000 वर्ग फीट में फैली है।
 

600 वर्ष पहले 99 लाख में तैयार हुआ था ये मंदिर

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रणकपुर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 600 वर्ष पहले शुरू हुआ था, जो 50 वर्षों से अधिक समय तक चला। इसके निर्माण में करीब 99 लाख रुपए का खर्च किए गए थे। मंदिर में चार कलात्मक प्रवेश द्वार हैं। मंदिर के मुख्य गृह में तीर्थंकर आदि नाथ की संगमरमर से बनी चार विशाल मूर्तियां हैं।

संभवतः 72 इंच ऊंची ये मूतियां चार अलग दिशाओं की ओर हैं। इसी कारण इसे चतुर्मुख मंदिर कहा जाता है।मंदिर की प्रमुख विशेषता इसके सैकड़ों खम्भे हैं।



 
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दिल जीत लेता है दिलवाड़ा का जैन मंदिर

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दिलवाड़ा मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह का एक दूसरा मंदिर है, दिलवाड़ा का जैन मंदिर। दरअसल दिलवाड़ा का जैन मंदिर पांच मंदिरों का समूह है। इसमें सबकी अलग अलग पहचान और खासियत है। सिरोही जिले के माउंट आबू स्थित इस मंदिर को देखने के लिए दूर दराज से पर्यटक आते हैं। दिलवाड़ा के इस मंदिर की सबसे खास बात यही है कि ये 48 खंभों पर खड़ा है। यह वास्तुकला और शिल्प का अद्भुत नमूना है।

 
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डेढ़ हजार कारीगरों की 14 साल की मेहनत

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दिलवाड़ा मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण गुजरात के सोलंकी राजा वीरहवज के महामंत्री वस्तुपाल और उसके भाई तेजपाल ने करवाया था। इसे ग्यारवहीं व बारहवीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह जैन तीर्थकरों का मंदिर है।

पांच मंदिरों में सबसे पुराना मंदिर विमल वसाही का है, जो 1031 ईसवीं में तैयार किया गया। इस मंदिर को बनाने में डेढ़ हजार कारीगरों ने 14 साल काम किया था, जब जाकर ऐसी भव्यता मिल पाई थी। यही भव्यता फिल्म से मिलती जुलती नजर आती है।
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