मध्य कश्मीर के श्रीनगर की रमणीय डल झील में एक बड़ा घड़ियाल देखा गया है। इस वजह से देशी मछली प्रजातियों पर इसके प्रभाव के बारे में आशंकाएं पैदा हो गईं है। दुर्लभ घड़ियाल को जम्मू-कश्मीर झील संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण (एलसीएमए) ने शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) के पास नियमित निगरानी प्रक्रिया के दौरान पकड़ा है।
श्रीनगर: डल के लिए खतरा बना विदेशी घड़ियाल, झील की वनस्पतियों और जीवों को नुकसान की आशंका
डल झील में एक बड़ा घड़ियाल देखा गया है। इस वजह से देशी मछली प्रजातियों पर इसके प्रभाव के बारे में आशंकाएं पैदा हो गईं है।
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सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट बैरकपुर कोलकाता की प्रमुख वैज्ञानिक अर्चना सिन्हा ने कहा कि यह भारतीय प्रजाति नहीं है और आम तौर पर उत्तरी और मध्य अमेरिका और मैक्सिको में भी पाया जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में यह भारत के कुछ हिस्सों जैसे भोपाल, केरल, महाराष्ट्र और कोलकाता के जलाशयों में भी पाया गया है। शिकारी और मांसाहारी होने के कारण यह घड़ियाल सभी प्रकार की मछलियों को खा सकता है। इसलिए यह मूल प्रजातियों और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा पैदा करता है। गार प्रजाति का यह घड़ियाल तेजी से बढ़ता है। इसका जीवन काल 20-30 वर्ष होता है।
वास्तविक कारणों के बारे में बताना अभी जल्दबाजी
अनुसंधान और निगरानी अनुभाग जेएंडके झील संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण (एलसीएमए) के अधिकारियों का कहना है कि डल झील में घड़ियाल कैसे पाया गया, इसके वास्तविक कारणों के बारे में बताना अभी जल्दबाजी होगी। हमने संबंधित मत्स्य पालन विभाग और शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) के मत्स्य पालन प्रभाग के समक्ष यह मामला उठाया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विदेशी घड़ियाल डल झील तक कैसे और क्यों पहुंचा। डल झील में कुल 12 देशी मछली की प्रजातियां पाई जाती हैं। कोई भी विदेशी प्रजाति देशी मछली प्रजातियों के लिए खतरनाक हो सकती है।
मछलियों की मौत से स्थानीय लोगों में दहशत
जीव विज्ञानियों का कहना है कि इस तरह के घड़ियाल और मगरमच्छ जाने अनजाने में भारतीय जलाशयों में फेंक दिए जाते हैं। गार मछलियां यूरीहैलाइन होती हैं और आठ फीट तक बढ़ सकती हैं। सर्दियों के दौरान वे डल के ठंडे पानी में भी टिके रह सकते हैं, क्योंकि जिस तापमान में वे ज्यादातर रहते हैं वह 11-23 डिग्री सेल्सियस होता है। डल में घड़ियाल पाए जाने के दो सप्ताह बाद पिछले महीने भारी बारिश के बाद डल झील में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से स्थानीय लोगों में दहशत है।
विदेशी प्रजाति की मौजूदगी का यह भी कारण संभव
इस प्रकार की मछलियों को एक्वेरियम में पालने के लिए देश में आयात किया जाता है। जब मछली आकार में बढ़ने लगती है और यह अन्य मछलियों को मारने लगती है तो एक्वेरियम के शौकीन उन्हें स्थानीय जल निकायों में छोड़ देते हैं। जीव विज्ञानियों का कहना है कि भारत के उन राज्यों में गार मछलियां देखी जा सकती हैं, जहां एक्वेरियम व्यापार फल-फूल रहा है। उदाहरण के लिए कोलकाता के गैलिफ स्ट्रीट पालतू बाजार में रविवार को गार मछली सहित 100 से अधिक विदेशी प्रजातियां बेची जाती हैं, जबकि भारत सरकार ने केवल 92 प्रजातियों को अनुमति दी है, जिन्हें आयात किया जा सकता है। गार मछली उस सूची में नहीं है।