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अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान: LG ने अभिभावकों को दी खास सीख, बोले- बच्चों पर ना थोपें अपने सपने

Mon, 11 Sep 2023 09:30 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 11 Sep 2023 09:30 PM IST
सार

उपराज्यपाल ने सोमवार को जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में दसवीं और बारहवीं कक्षा के मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए मां वैष्णो देवी से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

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amar ujala medhavi chhatra samman organized in jammu lg manoj sinha gave special message to parents
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : पीआरओ

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अभिभावकों पर जोर देते हुए कहा कि वे बच्चों पर अपनी आकांक्षाएं और सपने थोपने बंद करे। ऐसा वातावरण विद्यार्थियों को तनाव दे रहा है। पढ़ाई के बोझ के साथ अभिभावकों का अपेक्षा से अधिक दबाव बच्चों पर बोझ बढ़ा रहा है। हर विद्यार्थी का व्यक्तिगत और उसकी प्रतिभा प्राकृतिक है, उसे जो गोल्ड मेडल मिलता है वह मानव सृजन है और उसकी प्रतिभा का सही मोल नहीं हो सकता है। 



उपराज्यपाल ने सोमवार को जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में दसवीं और बारहवीं कक्षा के मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए मां वैष्णो देवी से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 
 

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दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ करते हुए उपराज्यपाल - फोटो : पीआरओ

'हर एक बच्चा मेधावी है'
उपराज्यपाल ने कहा कि पढ़ाई में जो बच्चे आगे निकल रहे उन्हें अच्छे ग्रेड देना सही है, लेकिन यह भी ध्यान देना होगा जो बच्चे पंक्ति में पीछे हैं उनमें भी कुछ विशेष है। उनके लिए अवसरों को पहचान करने की जरूरत है। हर एक बच्चा मेधावी है। अभिभावक अपने बच्चों की क्षमता को सम्मान दें। शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण औजार है जो हमें धरती से चांद तक पहुंचाता है और आपको सूर्य की आंखों में आंखें डालकर देखने का सामर्थ दे सकता है। 

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बच्चों को किया सम्मानित - फोटो : संवाद

उन्होंने कहा कि विद्यालय एकमात्र ऐसी जगह है यहां 1500 साल गुजर जाने के बाद नई पीढ़ी को आर्यभट्ट से प्रेरणा मिल सकती है। हमारी नई पीढ़ी के लिए शिक्षा, सफलता और उसके माध्यम से बदलाव ही जीवन का मिशन है। पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिला है, जिसमें उनकी दबी हुई आकांक्षाएं जागृत हुई है। चंद्रयान 3 के लांच में जम्मू कश्मीर समेत देशभर के सभी हिस्सों में विद्यार्थी उत्सुक थे। स्पेस मिशन को लेकर बच्चों में नई रुचि और नई जिज्ञासा पैदा हुई है।

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अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समरोह - फोटो : संवाद

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश की शिक्षा में बदलाव आ रहा

उपराज्यपाल ने कहा कि जब कोई बच्चा स्कूल छोड़ देता है तो सालों बाद उसे यह याद नहीं रहता है कि उसने कक्षा में क्या पढ़ा, बल्कि उसे शिक्षक के पढ़ने का स्टाइल, सिखाने का माध्यम और उस कक्षा को अटेंड करने का उत्साह जीवन भर याद रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय बाद देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिली है। जिसमें बच्चों को रुचि के हिसाब से उन्हें सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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सम्मान समरोह के दौरान सेल्फी लेते होनहार - फोटो : संवाद

लाइफ लांग लर्निंग कौशल पर विशेष ध्यान दें

उपराज्यपाल ने कहा कि कक्षाओं में पाठ्यक्रम के अलावा लाइफ लांग लर्निंग कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। लर्निंग की यात्रा में जब विद्यार्थी को अपनी असली क्षमता का पता चलता है तो उसके भीतर से असफल होने का भय समाप्त हो जाता है। वह आत्मविश्वास को प्राप्त कर लेता है और यही उसे कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। अपने भीतर के भय को समाप्त करना चाहिए। चुनौतियां और समस्याओं से घबराने की जरूरत नहीं बल्कि उनसे सीखने की जरूरत है। अपनी लीडरशिप को विकसित होने का पूरा अवसर दे। आज अवसरों की कमी नहीं हैं, अनेक संभावनाएं आपने दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। आपको आगे आने की आवश्यकता है।

भविष्य के चयन में अपनी रुचि को प्राथमिकता दें

उपराज्यपाल ने दसवीं के मेधावी छात्रों को सीख देते हुए कहा कि आज जम्मू कश्मीर में हर क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक बच्चियां गोल्ड मेडल ले रही हैं। जम्मू कश्मीर के आर्थिक प्रगति के नींव में भी बच्चियां और बहने आगे रहकर हमें गोर्वान्वित कर रही हैं। आपके शिक्षा के महत्वपूर्ण तत्व पैसा और जिज्ञासा है। अभी आपके लिए कालेज के दो साल का समय है, आपको इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि आपका रुचि किस क्षेत्र में है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी, डिजिटल वर्ल्ड का जमाना है।

परिणाम आधारित शिक्षा पर जोर

उपराज्यपाल ने अध्यापकों पर जोर देते हुए कहा कि वे लीग से हटकर परिणाम आधारित शिक्षा पर ध्यान दें। कक्षा में जो सिखा रहे हैं केवल वह पाठ्यक्रम का हिस्सा न रहे बल्कि उन्हें प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और जुनून को समझना होगा। नई सोच, नई कल्पना, नए नवाचार को स्कूल स्तर पर लाना होगा। ऐसे विद्यार्थी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होंगे और सफलता को हासिल करेंगे। उन्होंने शिक्षा निदेशक से विशेष रूप से ध्यान देते हुए कहा कि शिक्षकों की भर्ती में यह ध्यान दिया जाए कि भले ही वह अपने सब्जेक्ट को अच्छी तरह से नहीं जानता हो, लेकिन उनमें विद्यार्थियों को सीखाने के लिए प्रेरित करने की क्षमता होनी चाहिए तभी वे असली शिक्षक है। विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले शिक्षकों का चयन किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को रचनात्मकता में लगाया जाए। तभी हमारा भारत अगले बीस वर्षों के बजाय दस वर्षों में विश्व की शक्तिशाली ताकत बन सकता है। इस दौरान मंच पर मेयर राजेंद्र शर्मा, डीडीसी चेयरमैन भारत भूषण शर्मा, स्कास्ट जम्मू के उपकुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी, एसएमवीडीयू के उपकुलपति प्रो. प्रगति कुमार मौजूद रहे।

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