देश की सुरक्षा के साथ ही जवान, जम्मू-कश्मीर को कोरोना मुक्त करने के लिए योद्धा के रूप में जुटे हैं। वहीं, कई ऐसे सुरक्षा कर्मी भी हैं जो छुट्टी रद्द कर देश सेवा में मसरूफ हैं। उनका कहना है कि छुट्टी से ज्यादा देश और लोगों की चिंता है। यही जज्बा हमारे जवानों में कूट-कूटकर भरा है, जिनपर हमें ही नहीं संपूर्ण देश को गर्व है।
कोरोना से जंग में जवानों को सलाम: इस योद्धा ने कहा- अब युद्ध जीतना है घर तो बाद में जाएंगे
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ऐसे ही एक कोरोना योद्धा हैं एसएसबी एएसआई पी. गोस्वामी। ये कभी हाईवे पर तो कभी संपर्क मार्ग पर ड्यूटी दे रहे हैं। करीब सात माह से उन्होंने छुट्टी नहीं ली है। हालांकि, इस माह की शुरुआत में छुट्टी सेंक्शन हुई थी, लेकिन कर्तव्य के चलते छुट्टी रद्द करवा कर यहीं डटे हुए हैं।
उनका कहना है कि सुरक्षा पहले है। लॉकडाउन के बाद ही वह घर जाएंगे। इस समय देश और लोगों को उनकी जरूरत है। घरवालों से बात हो जाती है, जिससे खुश हैं। अब तो कोरोना से जंग को जीतना है उसके बाद ही घर के बारे में सोचेंगे।
कोरोना से जंग में जवानों के साथ ही स्वास्थ्यकर्मी भी लोगों की मदद में जुटे हैं। एक ऐसा ही मामला रियासी जिले का है। जहां पनासा खड्ड क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद असलम की गर्भवती पत्नी परेजा बेगम को प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की 108 नंबर हेल्प लाइन सेवा पर संपर्क किया। थोड़ी ही देर में मौके पर पहुंची टीम, महिला और उसके पति को एंबुलेंस में बैठाकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुई।
रास्ता खराब होने के कारण एंबुलेंस को तेज चलाना मुश्किल था और महिला को दर्द भी हो रहा था। महिला की बिगड़ती हालत को देखकर टीम ने रास्ते में ही डिलीवरी करवाने की हामी भरी। टीम ने एंबुलेंस में ही डिलीवरी कराई। महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। बाद में दोनों को जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां पर जांच के बाद डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य बताया। वहीं, स्वास्थ्य टीम के इस कदम की लोगों ने काफी सराहना की है।