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स्वर्णिम विजय मशाल: सेना ने 1971 के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, जीओसी 15 कोर समेत कई सुरक्षाबलों ने किए पुष्प अर्पित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 16 Jul 2021 10:31 PM IST
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Golden Victory Torch: Army pays tribute to the martyrs of 1971, many security forces including GOC 15 Corps laid flowers
स्वर्णिम विजय मशाल - फोटो : अमर उजाला

श्रीनगर स्थित चिनार कोर 15 कोर मुख्यालय में विजय दिवस की 50वीं वर्षगांठ मनाई गई। इसे 1971 के युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। 50 साल पहले इस महत्वपूर्ण दिन पर लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी की कमान के तहत 93000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने सफेद झंडे उठाए और भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कमांडरों की उपस्थिति में ढाका में बिना शर्त आत्मसमर्पण किया। दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के सशस्त्र बलों पर भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक और ऐतिहासिक जीत की स्मृति में और स्वर्णिम विजय मशाल को श्रद्धांजलि देने के लिए बादामी बाग छावनी में स्थित युद्ध स्मारक पर एक भव्य पुष्पांजलि समारोह हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सभी धर्मों के धर्म गुरुओं के दिवंगत शहीदों के लिए प्रार्थना पाठ के साथ हुई।

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Golden Victory Torch: Army pays tribute to the martyrs of 1971, many security forces including GOC 15 Corps laid flowers
स्वर्णिम विजय मशाल - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद चिनार कोर मुख्यालय के सबसे जूनियर सिपाही और सूबेदार मेजर के माल्यार्पण से समारोह शुरू हुआ।
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Golden Victory Torch: Army pays tribute to the martyrs of 1971, many security forces including GOC 15 Corps laid flowers
स्वर्णिम विजय मशाल - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 1971 के युद्ध वेटरंस जनरल ऑफिसर कमांडिंग 31 सब एरिया चिनार कोर मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ  और जीओसी ने श्रद्धांजलि दी।
Golden Victory Torch: Army pays tribute to the martyrs of 1971, many security forces including GOC 15 Corps laid flowers
स्वर्णिम विजय मशाल - फोटो : अमर उजाला
समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि आज का कार्यक्रम बहुत ही अहम और भावुक रहा।
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Golden Victory Torch: Army pays tribute to the martyrs of 1971, many security forces including GOC 15 Corps laid flowers
स्वर्णिम विजय मशाल - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि 1947, 1962, 1965, 1971 के युद्ध और कारगिल युद्ध के दौरान चिनार कोर के सिपाहियों ने कश्मीरी भाइयों के साथ कंधे से कांधा मिलकर लड़ाई लड़ी है और फतेह हासिल की।

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