कारगिल युद्ध के 21 साल पूरे होने पर देश सर्वोच्च बलिदान देने वाले अपने वीर जवानों को नमन कर रहा है। भारतीय सेना के जवानों ने अदम्य वीरता और रणकौशल का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सेना को धूल चटाई। वीरों के पराक्रम और घातक हथियारों के प्रहार से पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए थे। जानिए वो कौन-कौन से हथियार थे जिन्होंने पाकिस्तानी सेना को घुटनों के बल ला दिया था।
कारगिल विजय के 21 साल: वीरों के पराक्रम और इन हथियारों के प्रहार से पाकिस्तान ने टेके थे घुटने
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बोफोर्स तोप
स्वीडन की इस तोप ने कारगिल युद्ध के दौरान अपने दम पर पूरे युद्ध का रूख ही बदल दिया। ऊंचाई पर बंकरों में छिपकर बैठे दुश्मनों को मार गिराने में इस तोप की फायर पावर ने बहुत मदद की। इसका बैरल 70 डिग्री तक घूम सकता है और 42 किलोमीटर तक मार कर सकता है। यह तोप 14 सेकेंड में तीन राउंड फायर कर सकती है।
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों की इंफैन्ट्री (पैदल सेना) को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। ट्रकों पर लगे इस सिस्टम को डीआरडीओ ने बनाया है। इस सिस्टम की एक यूनिट में 12 रॉकेट होते हैं जो 44 सेकेंड में फायर होते हैं। इसके मार्क-1 और मार्क-2 का रेंज 40 किलोमीटर है जबकि मार्क-3 की रेंज 65 किलोमीटर है।
इंसास राइफल
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दुश्मनों को मौत की नींद सुलाने के लिए इंसास राइफल का प्रयोग किया था। हालांकि युद्ध के दौरान इस राइफल के जाम हो जाने, मैगजीन के टूट जाने व रेंज कम होने की शिकायतें भी मिलती रहीं। इंसास का पूरा नाम इंडियन न्यू स्मॉल आर्म्स सिस्टम है। इस भारतीय राइफल को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने बनाया है।
एके-47 राइफल
भारतीय सेना के क्लोज कॉम्बेट(नजदीकी युद्ध) के लिए एके सीरीज की एके-47 राइफल का प्रयोग किया था। इस राइफल को भारतीय सेना बहुत समय से प्रयोग कर रही है। कारगिल युद्ध में ऊंचाई वाले इलाकों में भी इस राइफल ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। यह एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग कर सकती है।