कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए आजकल तमाम सियासी पार्टियां कोई ना कोई नया फार्मूला सुझाती आई हैं लेकिन असल मामले में अगर गौर करें तो कश्मीर को समझने का जो नजरिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी में था वो आज तक किसी भी नेता में नहीं दिखा।
आखिर क्यो कश्मीर विवाद को सुलझाना अटल जी के लिए ही संभव कहा जाता है। कुछ राजनीतिज्ञों का मानना है कि अटल कुछ और साल पीएम रह जाते तो शायद कश्मीर का मुद्दे का अब तक समाधान हो गया होता।
अटल जी चाहते थे कि भारत-पाक की सरहदों पर शांति हो। इस कारण से उन्होंने क्रास एलओसी ट्रेड जैसे कई द्विपक्षीय कदमों की शुरूआत की। इसके साथ ही कश्मीर में लोगों के लिए कई बड़े कदम भी उठाए गए जिससे कि कश्मीर की आवाम का सरकार पर भरोसा कायम कराया जा सके।
अटल जी का मत था कि कश्मीर के विवाद को जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के आधार पर सुलझा दिया जाए। खास बात ये भी थी कि अटल जी ने इस आशय के लिए अलगाववादी नेताओं से भी बातचीत की शुरूआत कराई थी।
अटल जी चाहते थे कि सरहदों पर शांति हो इस कारण उन्होंने क्रास एलओसी ट्रेड जैसे कई द्विपक्षीय कदमों की शुरूआत की। इसके साथ ही कश्मीर में लोगों के लिए कई बड़े कदम भी उठाए गए जिससे कि कश्मीर की आवाम का सरकार पर भरोसा कायम कराया जा सके। इसमें पाकिस्तान को जाने वाली कारवां-ए-अमन बस सेवा की शुरूआत समेत कई बड़े कदम शामिल थे।