पुलवामा जिले के लेथपोरा इलाके के लोग 14 फरवरी 2019 की शाम को नहीं भूल पाए हैं। अभी भी हमले को याद कर वे सिहर उठते हैं। तेज धमाका, चारों ओर फैला खून और मांस के लोथड़े स्थानीय लोगों के जेहन में हैं। उनकी जुबान से सिर्फ यही निकलता है कि बस, बहुत हुआ। कई बेगुनाहों का खून बहा। अब सिर्फ अमन चाहिए।
पुलवामा हमला याद कर सिहर उठते हैं लेथपोरा के लोग, बोले- बस, बहुत हुआ...अब अमन चाहिए
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हमले के फौरन बाद स्थानीय लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई थी। कुछ ने बचाव कार्य करने की कोशिश भी की थी। कुछ लोग मौके पर पहुंचे तो घटनास्थल को सील कर दिया गया था। यहां के लोगों (नाम जाहिर न करने की शर्त पर) का कहना है कि सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था। हाईवे पर वाहन भी अपनी गति से चल रहे थे। अचानक तेज धमाका हुआ। आसमान में धुएं का गुबार और कुछ चीजें उड़ती दिखीं। कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। धुआं जिस ओर उठ रहा था सभी उसी तरफ भागकर पहुंचे। मौके पर पहुंचकर देखा तो चारों ओर खून बिखरा हुआ था।
सीआरपीएफ की बस तहस-नहस हो गई थी। इधर-उधर जवानों के शव क्षत विक्षत हालत में बिखरे पड़े थे। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे पता चला कि आत्मघाती हमला हुआ है। कार सवार आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ की गाड़ी को विपरीत दिशा से आकर पूरी रफ्तार में हिट किया है।
लोगों ने बताया कि घटना के बाद कई दिनों तक आस पास के लोग दहशत में रहे। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से लोगों से पूछताछ की जा रही थी। कई दिनों तक मौके पर जाने की इजाजत भी नहीं थी। बाद में वहां से मलबा हटाकर यातायात को सुचारु किया गया। उनका कहना है कि इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर खून खराबे से क्या मिल रहा है। पिछले तीन दशक से यहां के लोगों ने काफी कुछ झेला है। अब किसी बेगुनाह का खून न बहे। कश्मीर को बस अमन चाहिए।
चश्मदीद बिलाल अहमद ने बताया कि वह घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर दुकान में बैठा था। पहले जोरदार धमाका हुआ और फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाका गूंज उठा। ऐसा महसूस हुआ कि आसमान से कोई चीज जमीन पर आ गिरी हो। दुकानों और मकानाें के शीशे टूट गए। एक स्थानीय महिला ने कहा कि उसका घर कुछ ही दूरी पर है। सबकुछ आज भी आंखों में ताजा हो उठता है। चारों ओर लाशें और मास के लोथड़े थे। मरने वाला इंसान ही है।