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पुलवामा मुठभेड़: आतंकियों को खत्म करने में इन 5 जवानों ने लगा दी जान की बाजी, जानिए इनके बारे में
Mon, 18 Feb 2019 04:08 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 Feb 2019 04:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलिन इलाके में रविवार को आधी रात के बाद लगभग डेढ़ बजे शुरू हुई मुठभेड़ 18 घंटे चली। इस दौरान एक मेजर समेत 5 जवान शहीद हो गए जबकि 1 जवान घायल, डीआईजी साउथ कश्मीर और सेना के एक ब्रिगेडियर और लेफ्टिनेंट को भी गोली लगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस घेरेबंदी में तीन आतंकियों के मारे जाने की खबर है। सेना ने उनके ठिकाने को उड़ा दिया है। पूरे इलाके को घेरकर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
शहीद मेजर विभूति खंडूरी
- फोटो : फाइल फोटो
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलिन इलाके में रविवार को आधी रात के बाद शुरू हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मेजर विभूति ढौंडियाल (34) शहीद हो गए। उनका आवास देहरादून के नेश्विवला रोड के 36 डंगवाल मार्ग में है। शहीद मेजर का संबंध 55 राष्ट्रीय रायफल्स से है। पिताजी स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल सीडी एयरफोर्स में थे। 2012 में उनका निधन हो गया था। 2018 में शहीद का विवाह हुआ था। उनकी पत्नी नितिका कश्मीरी पंडित हैं। जानकारी के मुताबिक शहीद का शव आज ही देहरादून पहुंचेगा। सेना तैयारी में जुट गई है।
थे तीन बहनों के इकलौते भाई
शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। तीनों बहनें उनसे बड़ी हैं। घर में उनकी पत्नी, दादी और मां को मेजर डीएस ढौंडियाल की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। लेकिन बाद में सेना के अफसरों ने पत्नी को शहादत की खबर दे दी। वह कश्मीर विस्थापित परिवार से हैं। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। पत्नी निकिता आज सुबह ही ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। शहीद की मां सरोज दिल की मरीज हैं। उन्हें अभी तक जानकारी नहीं दी गई है।
थे तीन बहनों के इकलौते भाई
शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। तीनों बहनें उनसे बड़ी हैं। घर में उनकी पत्नी, दादी और मां को मेजर डीएस ढौंडियाल की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। लेकिन बाद में सेना के अफसरों ने पत्नी को शहादत की खबर दे दी। वह कश्मीर विस्थापित परिवार से हैं। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। पत्नी निकिता आज सुबह ही ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। शहीद की मां सरोज दिल की मरीज हैं। उन्हें अभी तक जानकारी नहीं दी गई है।
martyr ajay kumar
पुलवामा में हुई मुठभेड़ में शहीद हुए चार जवानों में मोदीनगर से सटे जानी ब्लॉक में बसी टीकरी गांव के सिपाही अजय कुमार पुत्र वीरपाल सिंह भी शामिल हैं। बेटे की शहादत की सूचना मिलते ही जवान अजय के घर में कोहराम मच गया। आस-पास के लोगों की भीड़ उनके घर पर जुटी हुई है।
जानकारी के अनुसार शहीद जवान अजय 7 अप्रैल 2011 को '20 ग्रेनेडियर्स' में नियुक्त हुए थे। फिलहाल वह 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। परिजनों ने बताया कि अजय 31 जनवरी को एक माह की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे। तीन दिन पहले ही पुलवामा हमले के बाद परिजनों को उनकी चिंता होने लगी थी, जिसके बाद परिजनों ने अजय से फोन पर बात की थी।
जानकारी के अनुसार शहीद जवान अजय 7 अप्रैल 2011 को '20 ग्रेनेडियर्स' में नियुक्त हुए थे। फिलहाल वह 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। परिजनों ने बताया कि अजय 31 जनवरी को एक माह की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे। तीन दिन पहले ही पुलवामा हमले के बाद परिजनों को उनकी चिंता होने लगी थी, जिसके बाद परिजनों ने अजय से फोन पर बात की थी।
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martyred hari singh
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में हरियाणा के हरि सिंह शहीद हो गए। शहादत की खबर गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलान इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच रविवार रात से मुठभेड़ जारी है। इसमें एक मेजर समेत चार जवानों के शहीद होने की खबर है। जवानों में हरियाणा के रेवाड़ी जिला निवासी 28 वर्षीय सिपाही हरि सिंह शहीद हो गए।
सोमवार देर शाम तक शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंच सकता है। 55 राष्ट्रीय राइफल में तैनात हरि सिंह के शहीद होने की खबर के बाद से परिवार में कोहराम मचा गया है। मां और पत्नी सदमे में हैं। वहीं बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग भी गांव राजगढ़ में पहुंच रहे हैं। शहीद हरी सिंह के पिता अगड़ी सिंह भी सेना में थे, उनका देहांत हो चुका है। शहीद हरी सिंह के घर में अब उनकी मां पिस्ता देवी, पत्नी राधा बाई और बेटा लक्ष्य है। गांव के सरपंच ने बताया की शहीद की तीन बहनें भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। पिता की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी हरि सिंह के कंधों पर ही थी।
सोमवार देर शाम तक शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंच सकता है। 55 राष्ट्रीय राइफल में तैनात हरि सिंह के शहीद होने की खबर के बाद से परिवार में कोहराम मचा गया है। मां और पत्नी सदमे में हैं। वहीं बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग भी गांव राजगढ़ में पहुंच रहे हैं। शहीद हरी सिंह के पिता अगड़ी सिंह भी सेना में थे, उनका देहांत हो चुका है। शहीद हरी सिंह के घर में अब उनकी मां पिस्ता देवी, पत्नी राधा बाई और बेटा लक्ष्य है। गांव के सरपंच ने बताया की शहीद की तीन बहनें भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। पिता की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी हरि सिंह के कंधों पर ही थी।
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Hav Sheo Ram
- फोटो : अमर उजाला
पुलवामा में रविवार रात से चल रही मुठभेड़ में सोमवार सुबह राजस्थान झुंझुनू के हवालदार सेओ राम शहीद हो गए। उन्होंने साल 2000 में सेना ज्वाइन की थी। सेओ राम के शहीद होने की सूचना के बाद से उनके गांव टीबा में कोहराम मच गया है। पत्नी सुनीता देवी को जब इस खबर के बारे में पता चला तो वह तब से बेसुद हैं।