रिसर्च एंड एनालेसिस विंग (रॉ) के मुखिया रह चुके एएस दुलत ने इस माह के दूसरे सप्ताह में पीएसए में बंद चल रहे जम्मू-कश्मीर के पांच बार के मुख्यमंत्री रह चुके डॉ फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की थी, इस दौरान दोनों के बीच लंबी बातचीत भी हुई। दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इसकी जानकारी नहीं मिल पायी है। दुलत फारूक के करीबी मित्र भी हैं। हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर दुलत ने ऐसी किसी बैठक से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मेरी इस पर कोई टिप्पणी नहीं है।
फारूक अब्दुल्ला से मिले रॉ के पूर्व प्रमुख दुलत, दोनों के बीच हुई लंबी बातचीत बदलेगी घाटी की हवा ?
अधिकारियों ने कहा, यह बैठक 12 फरवरी को फारूक के गुपकर रोड स्थित आवास पर हुई, जिसे जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने सहायक जेल में बदल दिया है। अधिकारियों ने इसे यह दो मित्रों अब्दुल्ला और दुलत की शिष्टाचार मुलाकात बताया। पूर्व रॉ प्रमुख पिछले साल 5 अगस्त को हिरासत में लिए गए डॉ.फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात करने के लिए जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों से लगातार संपर्क कर रहे थे।
अजहर की रिहाई के लिए फारूक को मनाया था
यहां यह बात उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में राजग सरकार ने दुलत को अब्दुल्ला को मनाने भेजा था, ताकि वह इंडियन एअरलाइंस के अपहृत विमान आईसी-814 को अपहर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने के बदले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर की रिहाई के लिए तैयार हो जाएं।
रूबिया की रिहाई में भी थी भूमिका
इससे पहले 1989 में वीपी सिंह की सरकार के दौरान भी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला किया था। जब खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के रूप में दुल्लत ने तत्कालीन गृहममंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अपहृत बेटी रूबिया सईद की रिहाई के बदले पांच आतंकियों की रिहाई कराई थी। रूबिया का अपहरण जेकेएलएफ के आतंकियों ने किया था।
अपनी पुस्तक ‘कश्मीर द वाजपेयी इयर्स’ में दुलत ने 1999 में अब्दुल्ला के साथ अपनी मुलाकातों का उल्लेख करते हुए लिखा था कि अब्दुल्ला ने उन्हें देख कर कहां आप फिर यहां? आप रूबिया के अपहरण के दौरान भी आए थे। अब आप फिर कैसे? आप जो भी कर रहे हैं मैं उससे सहमत नहीं हूं, यह गलत है। उन्होंने अब्दुल्ला के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों का किताब में उल्लेख किया है।