मेरी दिली ख्वाहिश है कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव खत्म हो। दोनों तरफ के लोग अमन और शांति से रहें। इस समस्या को मिलकर सुलझाना चाहिए। मैं 65 साल का हूं और मरने से पहले पाकिस्तान देखना चाहता हूं। मैं चाहता हूं मेरे बच्चे अपनी जड़ें देखें। बस किसी भी तरह इसका हल निकलवा दीजिए। कश्मीर मसले पर नवंबर 2017 में यह ट्वीट किया था जानेमाने अदाकार ऋषि कपूर ने। इसके बाद वह कई लोगों के निशाने पर भी आ गए थे।
ऋषि कपूर की फिल्म रिलीज होने के बाद बढ़ जाता था कश्मीर के दर्जियों का काम, वजह भी जान लीजिए
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अपने बेबाक राय और खुशमिजाज अंदाज के लिए जाने जाने वाले ऋषि कपूर का कश्मीर से लगाव अलग तरह का रहा। वह कश्मीर में लगातार होने वाली हिंसा से चिंतित और अन्य घटनाओं को लेकर काफी संजीदा थे। उनका सपना था कि घाटी में सिनेमा हाल खुलें और यहां फिल्मों की लगातार शूटिंग हो। फिल्म हिना की शूटिंग करने के 23 साल बाद जब वह 2011 में कश्मीर आए तो उन्होंने कहा था कि गुलमर्ग और कश्मीर वह जगह हैं जिसने मुझे बनाया, जो कुछ भी मैं आज हूं सब यहां के लोगों की देन है। हमारे खानदान का कश्मीर की मिट्टी से रिश्ता है। मैं पूरी उम्र कश्मीर से प्यार करूंगा और इसका कर्जदार रहूंगा।
ऋषि कपूर के निधन की खबर मिलते ही सोशल मीडिया में उनकी फिल्मों की बातें शुरू हो गईं। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया कि ऋषि कपूर रोमांस का पहला एहसास दिलाने वाले हीरो थे। फिल्म ‘बॉबी’ को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस फिल्म की शूटिंग कश्मीर में हुई थी। इस फिल्म के नाम पर गुलमर्ग और पहलगाम में एक हट आज भी है।
हर मसले पर राय रखने वाले बेबाक कपूर हर खांचे में अपनी छाप छोड़ते थे। उनकी फिल्म ‘बॉबी’ कश्मीर के इकलौते सिनेमा हॉल पैलेडियम में उस समय कई हफ्ते चली थी। लोगों ने इसे खासा पसंद किया था। वर्तमान में घाटी में एक भी सिनेमा घर नहीं है।
यह ऋषि कपूर के पहनावे के खासियत थी की कश्मीर में फिल्म रिलीज होते ही दर्जियों का काम बढ़ जाता था। बॉबी फिल्म देखने के बाद घाटी के लोग उनके मुरीद हो गए थे। हर साल कपूर परिवार जब कश्मीर पहुंचता था तो लोग दर्जियों से उनके जैसे कपड़े सिलने की मांग करते थे।